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Sirmour News: रेबीज के लक्षण के बाद गाय की मौत, मात्तर गांव में 150 लोगों ने लगाई वैक्सीन

Mon, 24 Aug 2026 11:25 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Mon, 24 Aug 2026 11:25 PM IST
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Cow dies after showing rabies symptoms; 150 people in Mattar village get vaccinated.
पीएचसी शंभूवाला में प्री-एक्सपोजर रेबीज वैक्सीन  लगाने पहुंचे ग्रामीण। संवाद
फरवरी में रेबीज संक्रमित कुत्ते ने गाय को था काटा, 21 अगस्त को मौत
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मार्च में आयोजित समारोह में गाय के दूध से तैयार शर्बत का लोगों ने किया सेवन
स्वास्थ्य विभाग ने पीएचसी शंभूवाला में एहतियातन 150 लोगों को लगाया टीका
जिला टीकाकरण अधिकारी की टीम ने गांव पहुंचकर ग्रामीणों को रेबीज से बचाव की दी जानकारी
चंद्र ठाकुर
नाहन (सिरमौर)। जिले के मात्तर गांव में रेबीज के लक्षण के बाद एक गाय की मौत से ग्रामीणों में हड़कंप मच गया। इस वर्ष फरवरी में गाय को एक रेबीज संक्रमित कुत्ते ने काटा था। इसके बाद मार्च में गांव में आयोजित एक समारोह में इसी गाय के दूध से तैयार शर्बत का लोगों ने सेवन किया था। करीब एक सप्ताह पहले गाय में रेबीज जैसे लक्षण दिखाई देने लगे थे। 21 अगस्त को उसकी मौत हो गई।
गाय की मौत के बाद ग्रामीणों में संक्रमण फैलने की आशंका को लेकर डर का माहौल बन गया। ग्रामीणों ने प्रशासन से एहतियातन टीकाकरण की मांग की। प्रशासन के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग ने सोमवार को एहतियाती कदम उठाते हुए पीएचसी शंभूवाला में 150 लोगों को रेबीज की वैक्सीन लगाई। सुबह से ही वैक्सीन लगवाने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। पीएचसी में दिनभर कतारें लगी रहीं। कुछ लोग टीकाकरण से वंचित रह गए, जिन्हें आगामी दिनों में टीका लगाया जाएगा।
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वैक्सीन लगवाने पहुंचे पूर्णानंद और अमरनाथ ने बताया कि पिछले दिनों गांव में एक गाय बीमार हुई थी। बाद में उसमें रेबीज जैसे लक्षण दिखाई दिए और 21 अगस्त को उसकी मौत हो गई। ग्रामीणों को पहले जानकारी नहीं थी कि गाय में रेबीज के लक्षण हैं। इस दौरान कई लोगों ने उसके दूध और दूध से बने पदार्थों का सेवन किया था। गाय की मौत के बाद संक्रमण की आशंका बढ़ गई, जिसके चलते वे टीका लगवाने पीएचसी पहुंचे।
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जिला टीकाकरण अधिकारी के नेतृत्व में स्वास्थ्य विभाग की टीम ने मात्तर भेड़ों गांव का दौरा किया। टीम ने ग्रामीणों को रेबीज के फैलने के कारण, लक्षण और बचाव के उपायों की जानकारी दी। लोगों को बताया गया कि रेबीज मुख्य रूप से संक्रमित जानवर के काटने अथवा उसकी लार के घाव या श्लेष्मा झिल्ली के संपर्क में आने से फैलता है। टीम ने ग्रामीणों की आशंकाओं को दूर करते हुए उन्हें अनावश्यक रूप से घबराने से बचने की सलाह दी।
जिला टीकाकरण अधिकारी डॉ. विनोद सांगल ने बताया कि प्रभावित गांव का दौरा किया है। जिन लोगों ने संक्रमित मवेशी के संपर्क में आने के बाद उसके दूध का सेवन किया था, उन्हें एहतियात के तौर पर वैक्सीन लगाई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल दूध के सेवन से रेबीज संक्रमण फैलने का खतरा नहीं होता। इसके बावजूद ग्रामीणों में भय का माहौल है और वे टीकाकरण की मांग कर रहे हैं। इसको देखते हुए स्वास्थ्य विभाग की ओर से लोगों को जागरूक करने के साथ एहतियाती टीकाकरण किया जा रहा है।

घटना की सूचना मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग के डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों की टीम को मात्तर भेजा गया। सोमवार को 150 लोगों को रेबीज की वैक्सीन लगाई गई। लोग किसी भी तरह की अफवाह या भ्रम में न आएं। रेबीज सामान्य तौर पर संक्रमित जानवर के काटने से फैलता है। दूध को उबालकर पीने की स्थिति में संक्रमण का खतरा नहीं रहता। स्वास्थ्य विभाग की टीमें गांव में लोगों को लगातार जागरूक कर रही हैं। टीकाकरण भी किया जा रहा है।
-डॉ. राकेश प्रताप, मुख्य चिकित्सा अधिकारी, नाहन
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