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Sirmour News: अदालत ने दस्तावेजों के आधार पर माना संबंध
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- पत्नी ने मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न के लगाए थे आरोप
संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन (सिरमौर)। फैमिली कोर्ट ने भरण-पोषण के एक मामले में पति को पत्नी को अंतरिम भरण-पोषण देने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने कहा कि मुख्य याचिका के अंतिम निर्णय तक पति को हर महीने 5 हजार रुपये देने होंगे।
मामला पांवटा साहिब की रहने वाली जयवंती की दायर याचिका से जुड़ा है। याचिका में उन्होंने अदालत से अंतरिम भरण-पोषण की मांग करते हुए कहा कि उनकी शादी 20 जनवरी 2020 को हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार वीरेंद्र के साथ हुई थी। कुछ समय बाद पति की ओर से मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न किए जाने के आरोप भी लगाए गए। मामले में प्रतिवादी ने अदालत में जवाब दाखिल करते हुए कहा कि जयवंती उनकी पत्नी नहीं हैं और उनके बीच कोई विवाह नहीं हुआ। उन्होंने यह भी कहा कि वह अपनी पत्नी और बेटी के साथ रह रहे हैं और आवेदिका का उनसे कोई संबंध नहीं है।
सुनवाई के दौरान अदालत ने रिकॉर्ड पर उपलब्ध दस्तावेजों और पूर्व में हुए समझौते के आधार पर माना कि आवेदिका का पति के साथ वैवाहिक संबंध प्रथम दृष्टया स्थापित होता है। अदालत ने कहा कि मुख्य याचिका के निर्णय में समय लगेगा, इसलिए अंतरिम राहत देना आवश्यक है। फैमिली कोर्ट ने आदेश दिया कि प्रतिवादी पति आवेदिका को आवेदन की तारीख से लेकर मुख्य याचिका के निपटारे तक 5 हजार रुपये प्रतिमाह अंतरिम भरण-पोषण देगा।
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संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन (सिरमौर)। फैमिली कोर्ट ने भरण-पोषण के एक मामले में पति को पत्नी को अंतरिम भरण-पोषण देने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने कहा कि मुख्य याचिका के अंतिम निर्णय तक पति को हर महीने 5 हजार रुपये देने होंगे।
मामला पांवटा साहिब की रहने वाली जयवंती की दायर याचिका से जुड़ा है। याचिका में उन्होंने अदालत से अंतरिम भरण-पोषण की मांग करते हुए कहा कि उनकी शादी 20 जनवरी 2020 को हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार वीरेंद्र के साथ हुई थी। कुछ समय बाद पति की ओर से मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न किए जाने के आरोप भी लगाए गए। मामले में प्रतिवादी ने अदालत में जवाब दाखिल करते हुए कहा कि जयवंती उनकी पत्नी नहीं हैं और उनके बीच कोई विवाह नहीं हुआ। उन्होंने यह भी कहा कि वह अपनी पत्नी और बेटी के साथ रह रहे हैं और आवेदिका का उनसे कोई संबंध नहीं है।
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सुनवाई के दौरान अदालत ने रिकॉर्ड पर उपलब्ध दस्तावेजों और पूर्व में हुए समझौते के आधार पर माना कि आवेदिका का पति के साथ वैवाहिक संबंध प्रथम दृष्टया स्थापित होता है। अदालत ने कहा कि मुख्य याचिका के निर्णय में समय लगेगा, इसलिए अंतरिम राहत देना आवश्यक है। फैमिली कोर्ट ने आदेश दिया कि प्रतिवादी पति आवेदिका को आवेदन की तारीख से लेकर मुख्य याचिका के निपटारे तक 5 हजार रुपये प्रतिमाह अंतरिम भरण-पोषण देगा।
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