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आईआईटी मद्रास: क्या एआई छीन लेगी युवाओं की पहली नौकरी? जानें किन क्षेत्रों पर पड़ेगा असर और क्यों बढ़ेगी चिंता
Tue, 27 Oct 2026 10:44 AM IST
शिवम तिवारी
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो
Published by: शिवम तिवारी
Updated Tue, 27 Oct 2026 10:44 AM IST
सार
आईआईटी मद्रास के 'सेंटर फॉर रिस्पॉन्सिबल एआई' ने यह चेतावनी दी है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता भारत में शुरुआती नौकरियों का स्वरूप बदल सकती है। आईटी, बीपीओ, वित्त और पेशेवर सेवाओं में दोहराए जाने वाले काम एआई संभाल सकता है। इससे युवाओं के सीखने और करियर में आगे बढ़ने के अवसर प्रभावित हो सकते हैं। रिपोर्ट में कंपनियों को कर्मचारियों की ट्रेनिंग, काम की नई जिम्मेदारियां तय करने और इंसानी फैसलों की जरूरत वाले क्षेत्रों पर ध्यान देने की सलाह दी गई है।
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IIT Madras
- फोटो : AI Generated
विस्तार
एआई भारत में जूनियर कर्मचारियों की शुरुआती नौकरियों (एंट्री लेवल) का रूप पूरी तरह बदल सकती है। आईआईटी मद्रास के 'सेंटर फॉर रिस्पॉन्सिबल एआई' ने यह चेतावनी दी है। साथ ही सुझाव दिया है कि कंपनियों को अब जूनियर कर्मचारियों को ट्रेनिंग देने और उनके रोल को नए सिरे से डिजाइन करने की जरूरत है। इंसानों की जरूरत वहां बनी रहेगी जहां बड़े फैसले लेने हों, असामान्य स्थितियों को संभालना हो और जवाबदेही लेनी हो।
'हाउ एआई इज रीकॉन्फिगरिंग वर्क इन इंडिया' शीर्षक वाली रिपोर्ट के अनुसार, एआई के प्रभाव को इस बात से नहीं मापा जाना चाहिए कि कितनी नौकरियां खत्म हुईं, बल्कि इस बात से आंका जाना चाहिए कि यह रोजमर्रा के छोटे-छोटे कामों को कैसे बदल रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक आईटी, बीपीओ, फाइनेंस और प्रोफेशनल सर्विसेज जैसे क्षेत्रों पर एआई का सबसे ज्यादा असर पड़ेगा। इन सेक्टर्स में एंट्री-लेवल नौकरियों में दोहराव वाले और प्रोसेस-ओरिएंटेड काम ज्यादा होते हैं, जिन्हें अब एआई आसानी से कर सकता है। एजेंसी
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'हाउ एआई इज रीकॉन्फिगरिंग वर्क इन इंडिया' शीर्षक वाली रिपोर्ट के अनुसार, एआई के प्रभाव को इस बात से नहीं मापा जाना चाहिए कि कितनी नौकरियां खत्म हुईं, बल्कि इस बात से आंका जाना चाहिए कि यह रोजमर्रा के छोटे-छोटे कामों को कैसे बदल रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक आईटी, बीपीओ, फाइनेंस और प्रोफेशनल सर्विसेज जैसे क्षेत्रों पर एआई का सबसे ज्यादा असर पड़ेगा। इन सेक्टर्स में एंट्री-लेवल नौकरियों में दोहराव वाले और प्रोसेस-ओरिएंटेड काम ज्यादा होते हैं, जिन्हें अब एआई आसानी से कर सकता है। एजेंसी
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करियर ग्रोथ पर संकट भी
जूनियर भूमिकाएं पारंपरिक रूप से सीखने के दौर की तरह काम करती हैं। छोटे और दोहराव वाले काम भले ही कम मूल्य के लगें, लेकिन इन्हीं को लगातार करने से कर्मचारी में वह समझ और निर्णय लेने की क्षमता विकसित होती है, जो सीनियर बनने के लिए जरूरी है। अगर एआई इन कामों को संभाल लेगा, तो युवाओं के सीखने और आगे बढ़ने का जरिया प्रभावित होगा। आईआईटी मद्रास ने सिफारिश की है कि नियोक्ताओं को भारतीय लेबर मार्केट के हिसाब से इस पर और रिसर्च करना चाहिए कि कौन से काम एआई को दिए जाएं और कहां इंसानों का होना बेहद जरूरी है।
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