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Sirmour News: अदालत 2, एक्सक्लूसिव खबर..
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पत्नी-बेटी को घर से निकाला, अब पति को देने होंगे 4-4 हजार रुपये प्रतिमाह
ददाहू क्षेत्र में घरेलू हिंसा मामला : मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी उपासना शर्मा ने सुनाया फैसला
पीड़ित महिला ने पति पर लगाए थे उत्पीड़न के आरोप
दीपक मेहता
नाहन (सिरमौर)। घरेलू हिंसा के एक मामले में अदालत ने पति को बड़ा झटका देते हुए पत्नी और नाबालिग बेटी के पक्ष में अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने पति को आदेश दिया है कि वह पत्नी और बेटी को 4-4 हजार रुपये प्रति माह अंतरिम भरण-पोषण के रूप में अदा करे। यह आदेश मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी उपासना शर्मा ने घरेलू हिंसा के तहत दायर याचिका पर सुनाया। अदालत ने कहा कि अंतरिम भरण-पोषण का उद्देश्य महिला और बच्चे को दर-दर भटकने से रोकना है।
यह मामला जिला सिरमौर के ददाहू क्षेत्र का है। मामले के अनुसार, शिकायतकर्ता सुधा ने आरोप लगाया कि पति अमित आए दिन झगड़ा करता था और उसे मानसिक व शारीरिक रूप से प्रताड़ित करता था। महिला का कहना है कि 17 अक्तूबर 2022 को पति ने उसे उसकी नवजात बेटी सहित घर से निकाल दिया। इसके बाद से उसके पास आय का कोई साधन नहीं है। वहीं पति ने सभी आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि पत्नी पढ़ी-लिखी है और स्वयं आजीविका कमा सकती है। यह भी दलील दी कि वह एक शिक्षक है और उसकी आय सीमित है।
अदालत ने पाया कि पति ने कई अवसर दिए जाने के बावजूद अपनी आय व संपत्ति का हलफनामा दाखिल नहीं किया। आरटीआई के तहत भी वेतन विवरण न देने पर अदालत ने प्रतिकूल अनुमान लगाया और पति की मासिक आय 16 हजार रुपये मानते हुए भरण-पोषण तय किया। अदालत ने प्रतिवादी अमित को निर्देश दिया है कि पीड़िता और उसकी बेटी को उनके भरण-पोषण के लिए आवेदन दाखिल करने की तारीख से मुख्य मामले के फैसले तक हर महीने 4,000-4000 रुपये दे। अदालत ने आदेश ने स्पष्ट किया कि महिला और बच्चे का भरण-पोषण पति की सामाजिक व नैतिक जिम्मेदारी है।
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संवाद
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ददाहू क्षेत्र में घरेलू हिंसा मामला : मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी उपासना शर्मा ने सुनाया फैसला
पीड़ित महिला ने पति पर लगाए थे उत्पीड़न के आरोप
दीपक मेहता
नाहन (सिरमौर)। घरेलू हिंसा के एक मामले में अदालत ने पति को बड़ा झटका देते हुए पत्नी और नाबालिग बेटी के पक्ष में अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने पति को आदेश दिया है कि वह पत्नी और बेटी को 4-4 हजार रुपये प्रति माह अंतरिम भरण-पोषण के रूप में अदा करे। यह आदेश मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी उपासना शर्मा ने घरेलू हिंसा के तहत दायर याचिका पर सुनाया। अदालत ने कहा कि अंतरिम भरण-पोषण का उद्देश्य महिला और बच्चे को दर-दर भटकने से रोकना है।
यह मामला जिला सिरमौर के ददाहू क्षेत्र का है। मामले के अनुसार, शिकायतकर्ता सुधा ने आरोप लगाया कि पति अमित आए दिन झगड़ा करता था और उसे मानसिक व शारीरिक रूप से प्रताड़ित करता था। महिला का कहना है कि 17 अक्तूबर 2022 को पति ने उसे उसकी नवजात बेटी सहित घर से निकाल दिया। इसके बाद से उसके पास आय का कोई साधन नहीं है। वहीं पति ने सभी आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि पत्नी पढ़ी-लिखी है और स्वयं आजीविका कमा सकती है। यह भी दलील दी कि वह एक शिक्षक है और उसकी आय सीमित है।
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अदालत ने पाया कि पति ने कई अवसर दिए जाने के बावजूद अपनी आय व संपत्ति का हलफनामा दाखिल नहीं किया। आरटीआई के तहत भी वेतन विवरण न देने पर अदालत ने प्रतिकूल अनुमान लगाया और पति की मासिक आय 16 हजार रुपये मानते हुए भरण-पोषण तय किया। अदालत ने प्रतिवादी अमित को निर्देश दिया है कि पीड़िता और उसकी बेटी को उनके भरण-पोषण के लिए आवेदन दाखिल करने की तारीख से मुख्य मामले के फैसले तक हर महीने 4,000-4000 रुपये दे। अदालत ने आदेश ने स्पष्ट किया कि महिला और बच्चे का भरण-पोषण पति की सामाजिक व नैतिक जिम्मेदारी है।
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