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Sirmour News: युवती का ऑनलाइन पीछा करने और यौन उत्पीड़न के मामले में आरोपी बरी
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न्यायिक दंडाधिकारी का फैसला, साक्ष्यों के अभाव में नहीं हो सका अपराध सिद्ध
साल 2019 में शिलाई थाना पुलिस ने की थी मामले की जांच
संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन। अदालत ने युवती का ऑनलाइन पीछा करने ((साइबर-स्टॉकिंग) और यौन उत्पीड़न के आरोपों से जुड़े एक मामले में आरोपी को बरी कर दिया है। न्यायिक दंडाधिकारी विकास कपूर ने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में असफल रहा।
मामला जनवरी, 2019 में पुलिस थाना शिलाई में दर्ज है। अभियोजन के अनुसार तहसील कमरऊ निवासी प्रवेश कुमार पर आरोप था कि उसने सोशल नेटवर्किंग प्लेटफॉर्म पर एक युवती के नाम से पीड़िता को संदेश भेजकर मदद मांगी। शिकायतकर्ता ने यह मानकर कि भेजने वाली एक छात्रा है, वीडियो कॉल का जवाब दिया। लेकिन, वीडियो कॉल में आरोपी ने अश्लील और अभद्र हरकतें कीं। इसके बाद पुलिस ने उसके खिलाफ आईपीसी की धारा 354-डी और आईटी एक्ट की धारा 66(सी) के तहत मामले की जांच कर आरोप पत्र दायर किया था।
मुकदमे की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने 13 गवाह पेश किए। अदालत ने निर्णय में कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपी के इस्तेमाल किए फोन नंबर और उसकी लोकेशन को फेक प्रोफाइल और वीडियो कॉल से जोड़ने में सफल नहीं हो पाया है। पर्याप्त और ठोस साक्ष्य के अभाव में आरोपी को दोषी ठहराना संभव नहीं है।
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साल 2019 में शिलाई थाना पुलिस ने की थी मामले की जांच
संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन। अदालत ने युवती का ऑनलाइन पीछा करने ((साइबर-स्टॉकिंग) और यौन उत्पीड़न के आरोपों से जुड़े एक मामले में आरोपी को बरी कर दिया है। न्यायिक दंडाधिकारी विकास कपूर ने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में असफल रहा।
मामला जनवरी, 2019 में पुलिस थाना शिलाई में दर्ज है। अभियोजन के अनुसार तहसील कमरऊ निवासी प्रवेश कुमार पर आरोप था कि उसने सोशल नेटवर्किंग प्लेटफॉर्म पर एक युवती के नाम से पीड़िता को संदेश भेजकर मदद मांगी। शिकायतकर्ता ने यह मानकर कि भेजने वाली एक छात्रा है, वीडियो कॉल का जवाब दिया। लेकिन, वीडियो कॉल में आरोपी ने अश्लील और अभद्र हरकतें कीं। इसके बाद पुलिस ने उसके खिलाफ आईपीसी की धारा 354-डी और आईटी एक्ट की धारा 66(सी) के तहत मामले की जांच कर आरोप पत्र दायर किया था।
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मुकदमे की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने 13 गवाह पेश किए। अदालत ने निर्णय में कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपी के इस्तेमाल किए फोन नंबर और उसकी लोकेशन को फेक प्रोफाइल और वीडियो कॉल से जोड़ने में सफल नहीं हो पाया है। पर्याप्त और ठोस साक्ष्य के अभाव में आरोपी को दोषी ठहराना संभव नहीं है।
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