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Sirmour News: चैक बाउंस मामले में महिला को भुगतनी होगी छह महीने की सजा
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अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश गौरव महाजन की अदालत ने ट्रायल कोर्ट के आदेशों को रखा बरकरार
ट्रायल कोर्ट ने आरोपी को 90,750 रुपये का मुआवजा देने की सजा भी सुनाई थी
संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन (सिरमौर)। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश गौरव महाजन की अदालत ने भूमिका पत्नी विशाल सोढ़ा, निवासी वाल्मीकि बस्ती, नाहन की अपील को खारिज करते हुए ट्रायल कोर्ट के आदेशों को बरकरार रखने का फैसला सुनाया है।
अपीलकर्ता ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, सिरमौर, नाहन के 29 मई 2023 के दोष सिद्धि के फैसले और 31 मई 2023 के सजा के आदेश से असंतुष्ट होकर अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश की अदालत में अपील दायर की थी। ट्रायल कोर्ट ने भूमिका को नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट, 1881 (एनआई एक्ट) की धारा 138 के तहत दोषी ठहराया था और छह महीने की साधारण कारावास और 90,750 रुपये का मुआवजा देने की सजा सुनाई थी।
ट्रायल कोर्ट में हिमाचल प्रदेश राज्य सहकारी बैंक की नाहन शाखा के प्रबंधन रविंद्र मोहन ने शिकायत दर्ज करवाई थी कि आरोपी ने ‘धानी ज्वाइंट लायबिलिटी ग्रुप (जेएलजी)’ की सदस्य होने के नाते, इसके अध्यक्ष के रूप में आपसी समझौते के अनुसार ऋण लिया था। यह ऋण शिकायतकर्ता बैंक से उसके ऋण खाता संख्या 55957200010 के विरुद्ध ऋण आवेदन के माध्यम से लिया गया था। आरोपी ने अपनी कानूनी देनदारी चुकाने के लिए शिकायतकर्ता बैंक के नाम पर 82,500 रुपये का चेक 13 अगस्त 2021 को जारी किया। 16 अगस्त 2021 को जब शिकायतकर्ता ने उक्त चेक कैश कराने के लिए पेश किया, तो वह ‘फंड अपर्याप्त’ होने के कारण बाउंस हो गया।
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इसके बाद शिकायतकर्ता बैंक ने आरोपी को डाक के माध्यम से नोटिस जारी कर 15 दिनों के अंदर शिकायतकर्ता बैंक को चेक की रकम का भुगतान करने को कहा था, लेकिन नोटिस मिलने के बावजूद आरोपी ने तय समय के अंदर शिकायतकर्ता बैंक को चेक की रकम का भुगतान नहीं किया। इसके बाद शिकायतकर्ता बैंक को मजबूर होकर ट्रायल कोर्ट के सामने यह शिकायत दर्ज करनी पड़ी।
संवाद
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ट्रायल कोर्ट ने आरोपी को 90,750 रुपये का मुआवजा देने की सजा भी सुनाई थी
संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन (सिरमौर)। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश गौरव महाजन की अदालत ने भूमिका पत्नी विशाल सोढ़ा, निवासी वाल्मीकि बस्ती, नाहन की अपील को खारिज करते हुए ट्रायल कोर्ट के आदेशों को बरकरार रखने का फैसला सुनाया है।
अपीलकर्ता ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, सिरमौर, नाहन के 29 मई 2023 के दोष सिद्धि के फैसले और 31 मई 2023 के सजा के आदेश से असंतुष्ट होकर अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश की अदालत में अपील दायर की थी। ट्रायल कोर्ट ने भूमिका को नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट, 1881 (एनआई एक्ट) की धारा 138 के तहत दोषी ठहराया था और छह महीने की साधारण कारावास और 90,750 रुपये का मुआवजा देने की सजा सुनाई थी।
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ट्रायल कोर्ट में हिमाचल प्रदेश राज्य सहकारी बैंक की नाहन शाखा के प्रबंधन रविंद्र मोहन ने शिकायत दर्ज करवाई थी कि आरोपी ने ‘धानी ज्वाइंट लायबिलिटी ग्रुप (जेएलजी)’ की सदस्य होने के नाते, इसके अध्यक्ष के रूप में आपसी समझौते के अनुसार ऋण लिया था। यह ऋण शिकायतकर्ता बैंक से उसके ऋण खाता संख्या 55957200010 के विरुद्ध ऋण आवेदन के माध्यम से लिया गया था। आरोपी ने अपनी कानूनी देनदारी चुकाने के लिए शिकायतकर्ता बैंक के नाम पर 82,500 रुपये का चेक 13 अगस्त 2021 को जारी किया। 16 अगस्त 2021 को जब शिकायतकर्ता ने उक्त चेक कैश कराने के लिए पेश किया, तो वह ‘फंड अपर्याप्त’ होने के कारण बाउंस हो गया।
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इसके बाद शिकायतकर्ता बैंक ने आरोपी को डाक के माध्यम से नोटिस जारी कर 15 दिनों के अंदर शिकायतकर्ता बैंक को चेक की रकम का भुगतान करने को कहा था, लेकिन नोटिस मिलने के बावजूद आरोपी ने तय समय के अंदर शिकायतकर्ता बैंक को चेक की रकम का भुगतान नहीं किया। इसके बाद शिकायतकर्ता बैंक को मजबूर होकर ट्रायल कोर्ट के सामने यह शिकायत दर्ज करनी पड़ी।
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