{"_id":"60902d0d8ebc3ec0da564738","slug":"case-crops-destroyed-in-lanabanka-panchyat-nahan-news-sml3692677178","type":"story","status":"publish","title_hn":"ओलावृष्टि से लानाबांका पंचायत में नकदी फसलें तबाह","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
ओलावृष्टि से लानाबांका पंचायत में नकदी फसलें तबाह
विज्ञापन
नाहन (सिरमौर)। पच्छाद विधानसभा क्षेत्र की लानाबांका पंचायत में ओलावृष्टि के कहर ने लोगों की टमाटर की फसल को पूरी तरह तबाह कर दिया। इसके चलते बीते तीन महीनों की किसानों की मेहनत पर पानी फिर गया है। बीते रविवार की शाम हुई बारिश और ओलावृष्टि से खराब हुई फसलों के कारण किसानों को चिंता सताने लगी है।
गौरतलब है कि सैनधार क्षेत्र में इन दिनों नकदी फसलों का लगाने का कार्य चला हुआ है। सैकड़ों बीघा भूमि पर लगी टमाटर की फसल बिल्कुल नष्ट हो गई है। हिमाचल किसान सभा की क्षेत्रीय कमेटी बागथन, लानाबांका के संयोजक गणेश शर्मा और सह संयोजक आशीष कुमार ने बताया कि लानाबांका पंचायत के अलावा आसपास क्षेत्र के कृष्णदत्त, राकेश, चंद्रमणी, कमल, अमित, राजेश सहित सैकड़ों किसानों की टमाटर फसल ओलावृष्टि से भेंट चढ़ गई है।
आशीष कुमार ने बताया कि किसानों की पूरे तीन महीने की मेहनत पर मौसम की बेरुखी ने पानी फेर दिया है। पहले ही किसान सूखे की मार से झेल रहे थे। जब बारिश की उम्मीद हुई तो ओलावृष्टि ने फसल को ही तबाह कर दिया। इससे किसानों में काफी निराशा है। उन्होंने बताया कि किसानों को टमाटर के बीज का 1 पैकेट 1000 से 1500 रुपये तक मिलता है। इसके अलावा किसानों की मेहनत और कीटनाशकों का छिड़काव आदि बहुत ही महंगा पड़ता है। फसलों के साथ-साथ किसानों की उम्मीदों को भी इस ओलावृष्टि ने चूर-चूर कर दिया।
विज्ञापन
हिमाचल किसान सभा का मानना है कि किसानों का लाखों का नुकसान हुआ है। हिमाचल किसान सभा ने मांग की कि प्रशासन किसानों के नुकसान का मूल्यांकन कर मुफ्त में बीज और खाद की व्यवस्था करे ताकि किसानों को आर्थिक नुकसान से बचाया जा सके।
विज्ञापन
गौरतलब है कि सैनधार क्षेत्र में इन दिनों नकदी फसलों का लगाने का कार्य चला हुआ है। सैकड़ों बीघा भूमि पर लगी टमाटर की फसल बिल्कुल नष्ट हो गई है। हिमाचल किसान सभा की क्षेत्रीय कमेटी बागथन, लानाबांका के संयोजक गणेश शर्मा और सह संयोजक आशीष कुमार ने बताया कि लानाबांका पंचायत के अलावा आसपास क्षेत्र के कृष्णदत्त, राकेश, चंद्रमणी, कमल, अमित, राजेश सहित सैकड़ों किसानों की टमाटर फसल ओलावृष्टि से भेंट चढ़ गई है।
विज्ञापन
आशीष कुमार ने बताया कि किसानों की पूरे तीन महीने की मेहनत पर मौसम की बेरुखी ने पानी फेर दिया है। पहले ही किसान सूखे की मार से झेल रहे थे। जब बारिश की उम्मीद हुई तो ओलावृष्टि ने फसल को ही तबाह कर दिया। इससे किसानों में काफी निराशा है। उन्होंने बताया कि किसानों को टमाटर के बीज का 1 पैकेट 1000 से 1500 रुपये तक मिलता है। इसके अलावा किसानों की मेहनत और कीटनाशकों का छिड़काव आदि बहुत ही महंगा पड़ता है। फसलों के साथ-साथ किसानों की उम्मीदों को भी इस ओलावृष्टि ने चूर-चूर कर दिया।
विज्ञापन
हिमाचल किसान सभा का मानना है कि किसानों का लाखों का नुकसान हुआ है। हिमाचल किसान सभा ने मांग की कि प्रशासन किसानों के नुकसान का मूल्यांकन कर मुफ्त में बीज और खाद की व्यवस्था करे ताकि किसानों को आर्थिक नुकसान से बचाया जा सके।