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लोगों का धंधा चौपट, मुश्किल से चल रहा घर, अब जीएसटी की मार
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नाहन (सिरमौर)। नए साल पर रेडिमेड कपड़ों और जूतों पर अधिक जीएसटी लगाने से दुकानदारों में रोष है। अब एक हजार से कम कीमत वाले कपड़ों और जूतों पर सरकार 5 फीसदी की जगह 12 प्रतिशत जीएसटी वसूलेगी। दुकानदारों का कहना है कि पहले रेडिमेड कपड़े पर शुल्क नहीं था। सरकार ने शुल्क लगाया, उसे दुकानदारों ने दिया। जब कोरोना के कारण व्यवसाय में मंदी है, लोगों के पास घर चलाने के लिए पैसे तक नहीं और बाजार से ग्राहक नदारद हैं। ऐसे में राहत देने की बजाय सरकार ने जीएसटी बढ़ाकर लोगों की कमर तोड़ दी है। इसका सीधा असर आम आदमी और व्यापारी वर्ग को होगा।
कारोबार को नुकसान, जनता की जेब पर चलेगी कैंची
दुकानदार संजय सिंगला ने कहा कि सरकार के इस फैसले से कारोबार को नुकसान होगा। कोरोना काल में पहले ही ग्राहक नहीं हैं। कपड़े महंगे होने से ग्राहकों की जेब पर ही कैंची चलेगी। वह पहले ही महंगाई से त्रस्त हैं। कम खरीदारी होगी तो व्यापारी भी परेशानी झेलेगा।
दुकानदार राजू ने कहा कि हर गली-कूचे में दर्जनों दुकानें खुल चुकी हैं। अब अधिक जीएसटी लगने से कारोबार को नुकसान होगा। काम है नहीं, कारोबारी हर ओर से नुकसान झेल रहा है। जिंदगी में कुछ अच्छा करने की संभावनाओं पर भी पानी फिर रहा है।
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जूता व्यवसायी गोपाल अग्रवाल ने कहा कि सरकार के फैसले से जूते और कपड़े महंगे होंगे। आमजन पहले ही बेहाल है। उस पर महंगाई की ज्यादा मार पड़ेगी। ऐसे समय में जब कोरोना की मार से दुकानदार और आमजन दोनों बुरी तरह से प्रभावित हैं। जीएसटी की दर बढ़ाने का औचित्य नहीं था। सरकार को फैसला वापस लेना चाहिए।
दुकानदार राजेश कुमार ने कहा कि सरकार दुकानदारों और आमजन से सिर्फ कमाने में लगी हुई है। ऑनलाइन कारोबार ने पहले ही धंधा चौपट कर रखा है। रही सही कसर कोरोना ने निकाल रखी है। सरकार जीएसटी थोप कर कारोबारी और जनता को बेहाल कर रही है। यह फैसला वापस लेना चाहिए।
असाइनमेंट-
सचित्र- 1 से 4 तक
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कारोबार को नुकसान, जनता की जेब पर चलेगी कैंची
दुकानदार संजय सिंगला ने कहा कि सरकार के इस फैसले से कारोबार को नुकसान होगा। कोरोना काल में पहले ही ग्राहक नहीं हैं। कपड़े महंगे होने से ग्राहकों की जेब पर ही कैंची चलेगी। वह पहले ही महंगाई से त्रस्त हैं। कम खरीदारी होगी तो व्यापारी भी परेशानी झेलेगा।
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दुकानदार राजू ने कहा कि हर गली-कूचे में दर्जनों दुकानें खुल चुकी हैं। अब अधिक जीएसटी लगने से कारोबार को नुकसान होगा। काम है नहीं, कारोबारी हर ओर से नुकसान झेल रहा है। जिंदगी में कुछ अच्छा करने की संभावनाओं पर भी पानी फिर रहा है।
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जूता व्यवसायी गोपाल अग्रवाल ने कहा कि सरकार के फैसले से जूते और कपड़े महंगे होंगे। आमजन पहले ही बेहाल है। उस पर महंगाई की ज्यादा मार पड़ेगी। ऐसे समय में जब कोरोना की मार से दुकानदार और आमजन दोनों बुरी तरह से प्रभावित हैं। जीएसटी की दर बढ़ाने का औचित्य नहीं था। सरकार को फैसला वापस लेना चाहिए।
दुकानदार राजेश कुमार ने कहा कि सरकार दुकानदारों और आमजन से सिर्फ कमाने में लगी हुई है। ऑनलाइन कारोबार ने पहले ही धंधा चौपट कर रखा है। रही सही कसर कोरोना ने निकाल रखी है। सरकार जीएसटी थोप कर कारोबारी और जनता को बेहाल कर रही है। यह फैसला वापस लेना चाहिए।
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