{"_id":"67d80f1b4419dae8b70e8949","slug":"bhagvat-katha-in-renuka-ji-nahan-news-c-177-1-nhn1003-145881-2025-03-17","type":"story","status":"publish","title_hn":"Sirmour News: रेणुका जी में भागवत कथा में सुनाया गया श्रीकृष्ण जन्म का वृतांत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Sirmour News: रेणुका जी में भागवत कथा में सुनाया गया श्रीकृष्ण जन्म का वृतांत
विज्ञापन
निर्वाण आश्रम रेणुका जी में श्रद्धालुओं को भागवत कथा का रसपान करवाते कथा व्यास आचार्य मोहन चंद्
रेणुका जी में भागवत कथा में सुनाया गया श्रीकृष्ण जन्म का वृतांत
संवाद न्यूज एजेंसी
ददाहू (सिरमौर)। रेणुकाजी तीर्थ के निर्वाण आश्रम में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन सोमवार को समुद्र मंथन, भगवान बावन, परशुराम व श्री राम चरित्र सहित श्रीकृष्ण जन्मोत्सव के प्रसंगों का वर्णन किया गया। इस दौरान निर्वाण आश्रम में भगवान श्री कृष्ण की किलकारियां गूंजने लगीं। बाल रूप में भगवान श्री कृष्ण की झांकियों ने श्रोताओं को भावविभोर कर दिया।
कथा व्यास आचार्य मोहनचंद्र शास्त्री ने कहा कि भगवान विष्णु ने माता देवकी को उनकी कोख से जन्म लेने का वरदान दिया था। भगवान श्री कृष्णा बाल्यकाल से ही बड़े पराक्रमी व बलशाली थे। उन्होंने अधर्मी व दुष्ट दैत्यों का संहार करने के लिए ही धरती पर जन्म लिया। अधर्मी कंश के खौफ से बचने के लिए घोर रात्रि में उनके पिता वासुदेव जब उन्हें नंदग्राम की ओर ले जा रहे थे तो मार्ग में यमुना नदी भगवान श्रीकृष्ण के पांव के स्पर्श से ही अपने वेग को भूलकर शांत होकर बहने लगी।
इस दौरान संगीतकारों ने श्री कृष्ण जन्म पर आधारित भजनों की धुनों पर श्रद्धालुओं को झूमने पर विवश कर दिया। इस मौके पर निर्माण आश्रम के महंत महात्मा रेणेंद्र मुनि सहित अन्य संत-महात्मा व सैकड़ों श्रद्धालु मौजूद रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
ददाहू (सिरमौर)। रेणुकाजी तीर्थ के निर्वाण आश्रम में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन सोमवार को समुद्र मंथन, भगवान बावन, परशुराम व श्री राम चरित्र सहित श्रीकृष्ण जन्मोत्सव के प्रसंगों का वर्णन किया गया। इस दौरान निर्वाण आश्रम में भगवान श्री कृष्ण की किलकारियां गूंजने लगीं। बाल रूप में भगवान श्री कृष्ण की झांकियों ने श्रोताओं को भावविभोर कर दिया।
कथा व्यास आचार्य मोहनचंद्र शास्त्री ने कहा कि भगवान विष्णु ने माता देवकी को उनकी कोख से जन्म लेने का वरदान दिया था। भगवान श्री कृष्णा बाल्यकाल से ही बड़े पराक्रमी व बलशाली थे। उन्होंने अधर्मी व दुष्ट दैत्यों का संहार करने के लिए ही धरती पर जन्म लिया। अधर्मी कंश के खौफ से बचने के लिए घोर रात्रि में उनके पिता वासुदेव जब उन्हें नंदग्राम की ओर ले जा रहे थे तो मार्ग में यमुना नदी भगवान श्रीकृष्ण के पांव के स्पर्श से ही अपने वेग को भूलकर शांत होकर बहने लगी।
विज्ञापन
इस दौरान संगीतकारों ने श्री कृष्ण जन्म पर आधारित भजनों की धुनों पर श्रद्धालुओं को झूमने पर विवश कर दिया। इस मौके पर निर्माण आश्रम के महंत महात्मा रेणेंद्र मुनि सहित अन्य संत-महात्मा व सैकड़ों श्रद्धालु मौजूद रहे।

निर्वाण आश्रम रेणुका जी में श्रद्धालुओं को भागवत कथा का रसपान करवाते कथा व्यास आचार्य मोहन चंद्

निर्वाण आश्रम रेणुका जी में श्रद्धालुओं को भागवत कथा का रसपान करवाते कथा व्यास आचार्य मोहन चंद्
विज्ञापन