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अमर उजाला शिक्षा अभियान-- बच्चों में सीखने की ललक को फिर से पैदा करेंगे शिक्षक
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education
नाहन (सिरमौर)। जिले में दो साल बाद पहली बार नए सत्र के शुरूआती दौर से स्कूल खुलने जा रहे हैं। कई विद्यार्थी तो दो साल में पहली बार स्कूल पहुंचेंगे। ऐसे बच्चों से किस तरह से पेश आना है। इसके लिए स्कूल प्रशासन रूपरेखा तैयार करने में जुटे हैं। शहर के प्रतिष्ठित एसवीएन स्कूल नाहन में प्रधानाचार्य रोज ही शिक्षकों के साथ बैठकें कर रहे हैं।
सभी कक्षाओं के विद्यार्थियों को लेकर निर्देश दिए जा रहे हैं ताकि छोटी कक्षाओं के बच्चों को घर जैसा माहौल मिले और वह कक्षाओं में बैठने के आदी हो जाएं। बड़ी कक्षाओं के बच्चों को व्यावहारिक ज्ञान पर भी ध्यान केंद्रित करने के निर्देश दिए गए हैं।
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क्या कहते हैं शिक्षक :
1. घर जैसा माहौल और व्यावहारिक ज्ञान देने पर रहेगा जोर
एसवीएन स्कूल के प्रधानाचार्य कुंदन सिंह ठाकुर ने कहा कि छोटे बच्चे दो साल से घर पर रहे हैं, जिससे वह घर के आदी हो गए हैं। स्कूल में उनको घर जैसा माहौल देने के निर्देश दिए गए हैं ताकि बच्चे धीरे-धीरे स्कूल के माहौल में ढल जाएं। बड़े बच्चों में पाठ्यक्रम से पहले सीखने की प्रवृत्ति पैदा की जाएगी, जिससे वह दूर चले गए हैं।
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2. शिक्षिका नसीमा प्रवीण ने कहा कि कई बच्चे पहली बार स्कूल पहुंचेंगे। उनको स्कूल में घर जैसा माहौल देने का प्रयास रहेगा ताकि उसे कोई परेशानी न हो।
3. शिक्षिका किरण बाला धीमान ने कहा कि दो साल घर पर रहकर बच्चों में पढ़ने और सीखने की प्रवृत्ति नष्ट हुई है। उनको फिर से सीखने का जुनून पैदा किया जाएगा।
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क्या कहते हैं विद्यार्थी :
4. 11वीं की छात्रा दृष्टि ने कहा कि घर में रहकर दो साल बर्बाद हो गए। उम्मीद है नये सत्र से स्कूल सुचारु रूप से चलेंगे ताकि पढ़ाई के साथ व्यावहारिक ज्ञान भी हासिल कर सकें।
5. 10वीं के तोषित ठाकुर ने कहा कि स्कूल खुलने पर हम छुट्टी की प्रतीक्षा करते थे, अब जब दो साल स्कूल बंद रहे, तब जाकर हमें स्कूल की अहमियत पता चली। स्कूल खुल रहे हैं, अच्छा लग रहा है।
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क्या कहते हैं अभिभावक:
6. साहिल कुमार ने कहा कि बेटी चार साल की हो चुकी है। पिछले साल स्कूल में बैठाना था लेकिन एक साल बाद अब नर्सरी में बिठा रहा हूं। उम्मीद है स्कूल खुले रहेंगे ताकि बच्चों का भविष्य बर्बाद न हो।
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सभी कक्षाओं के विद्यार्थियों को लेकर निर्देश दिए जा रहे हैं ताकि छोटी कक्षाओं के बच्चों को घर जैसा माहौल मिले और वह कक्षाओं में बैठने के आदी हो जाएं। बड़ी कक्षाओं के बच्चों को व्यावहारिक ज्ञान पर भी ध्यान केंद्रित करने के निर्देश दिए गए हैं।
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क्या कहते हैं शिक्षक :
1. घर जैसा माहौल और व्यावहारिक ज्ञान देने पर रहेगा जोर
एसवीएन स्कूल के प्रधानाचार्य कुंदन सिंह ठाकुर ने कहा कि छोटे बच्चे दो साल से घर पर रहे हैं, जिससे वह घर के आदी हो गए हैं। स्कूल में उनको घर जैसा माहौल देने के निर्देश दिए गए हैं ताकि बच्चे धीरे-धीरे स्कूल के माहौल में ढल जाएं। बड़े बच्चों में पाठ्यक्रम से पहले सीखने की प्रवृत्ति पैदा की जाएगी, जिससे वह दूर चले गए हैं।
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2. शिक्षिका नसीमा प्रवीण ने कहा कि कई बच्चे पहली बार स्कूल पहुंचेंगे। उनको स्कूल में घर जैसा माहौल देने का प्रयास रहेगा ताकि उसे कोई परेशानी न हो।
3. शिक्षिका किरण बाला धीमान ने कहा कि दो साल घर पर रहकर बच्चों में पढ़ने और सीखने की प्रवृत्ति नष्ट हुई है। उनको फिर से सीखने का जुनून पैदा किया जाएगा।
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क्या कहते हैं विद्यार्थी :
4. 11वीं की छात्रा दृष्टि ने कहा कि घर में रहकर दो साल बर्बाद हो गए। उम्मीद है नये सत्र से स्कूल सुचारु रूप से चलेंगे ताकि पढ़ाई के साथ व्यावहारिक ज्ञान भी हासिल कर सकें।
5. 10वीं के तोषित ठाकुर ने कहा कि स्कूल खुलने पर हम छुट्टी की प्रतीक्षा करते थे, अब जब दो साल स्कूल बंद रहे, तब जाकर हमें स्कूल की अहमियत पता चली। स्कूल खुल रहे हैं, अच्छा लग रहा है।
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क्या कहते हैं अभिभावक:
6. साहिल कुमार ने कहा कि बेटी चार साल की हो चुकी है। पिछले साल स्कूल में बैठाना था लेकिन एक साल बाद अब नर्सरी में बिठा रहा हूं। उम्मीद है स्कूल खुले रहेंगे ताकि बच्चों का भविष्य बर्बाद न हो।