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Sirmour News: 90 वर्षीय बुजुर्ग के उपचार में लापरवाही का आरोप, उपायुक्त से जांच की मांग
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परिजनों ने एसपीओ-दो 74-77 फीसदी होने पर डिस्चार्ज करने की बात पर उठाए सवाल
परिजनों, तीमारदारों और स्वतंत्र गवाहों के बयान दर्ज करने का भी आग्रह
जरूरत पड़ने पर मरीज को पीजीआई चंडीगढ़ या उच्च चिकित्सा केंद्र रेफर करने का आग्रह
संवाद न्यूज एजेंसी
पांवटा साहिब (सिरमौर)। सिविल अस्पताल पांवटा साहिब में 90 वर्षीय बुजुर्ग महिला के उपचार में कथित लापरवाही का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। मामले को लेकर मरीज के परिजनों ने उपायुक्त को शिकायत भेजकर निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच की मांग की है। परिजनों ने जांच एसडीएम पांवटा साहिब की निगरानी में अथवा अस्पताल प्रशासन से स्वतंत्र किसी सक्षम अधिकारी से करवाने का आग्रह किया है।
बुजुर्ग महिला मुंगा देवी (90) के पोते सौरभ शर्मा समेत परिजनों ने कहा कि मरीज की सुरक्षा, सम्मान और उचित चिकित्सा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने मरीज की चिकित्सा स्थिति को लेकर भी चिंता जताई है। परिजनों के अनुसार मरीज का एसपीओ-दो करीब 74 से 77 फीसदी तक दर्ज होने के बावजूद उसे अस्पताल से डिस्चार्ज करने की बात कही जा रही थी। मरीज की स्थिति को देखते हुए परिजनों ने जब इस निर्णय पर सवाल उठाए तो डिस्चार्ज प्रक्रिया पर पुनर्विचार किया गया।
परिजनों का कहना है कि घटना को लेकर अस्पताल स्तर पर जांच की जा रही है, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में उन्हें इस जांच से अधिक उम्मीद नहीं है। उन्होंने एसडीएम पांवटा साहिब की निगरानी या अस्पताल प्रशासन से स्वतंत्र किसी सक्षम अधिकारी से जांच करवाने की मांग की है, ताकि किसी भी प्रकार के आंतरिक प्रभाव की संभावना न रहे।
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परिजनों ने मांग की है कि घटना से संबंधित सीसीटीवी फुटेज, ड्यूटी रोस्टर, ऑक्सीजन सप्लाई और सिलिंडर रिकॉर्ड, नर्सिंग रिकॉर्ड, उपचार संबंधी दस्तावेज तथा मरीज के वायटल मॉनिटरिंग रिकॉर्ड सुरक्षित रखे जाएं और जांच में शामिल किए जाएं। इसके अलावा घटना के समय मौजूद मरीज के परिजनों, अन्य मरीजों और तीमारदारों के साथ स्वतंत्र गवाहों के बयान भी दर्ज किए जाएं।
परिजनों ने ये भी मांग की है कि शिकायतकर्ता और गवाहों पर किसी तरह का दबाव, धमकी या समझौते के लिए दबाव न बनाया जाए। उन्होंने कहा कि यदि पांवटा सिविल अस्पताल में मरीज के लिए आवश्यक स्तर की चिकित्सा सुविधा या विशेषज्ञता उपलब्ध नहीं है तो उसकी स्थिति को देखते हुए पीजीआई चंडीगढ़ अथवा किसी अन्य उपयुक्त उच्च चिकित्सा केंद्र में रेफर करने पर विचार किया जाना चाहिए।
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परिजनों, तीमारदारों और स्वतंत्र गवाहों के बयान दर्ज करने का भी आग्रह
जरूरत पड़ने पर मरीज को पीजीआई चंडीगढ़ या उच्च चिकित्सा केंद्र रेफर करने का आग्रह
संवाद न्यूज एजेंसी
पांवटा साहिब (सिरमौर)। सिविल अस्पताल पांवटा साहिब में 90 वर्षीय बुजुर्ग महिला के उपचार में कथित लापरवाही का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। मामले को लेकर मरीज के परिजनों ने उपायुक्त को शिकायत भेजकर निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच की मांग की है। परिजनों ने जांच एसडीएम पांवटा साहिब की निगरानी में अथवा अस्पताल प्रशासन से स्वतंत्र किसी सक्षम अधिकारी से करवाने का आग्रह किया है।
बुजुर्ग महिला मुंगा देवी (90) के पोते सौरभ शर्मा समेत परिजनों ने कहा कि मरीज की सुरक्षा, सम्मान और उचित चिकित्सा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने मरीज की चिकित्सा स्थिति को लेकर भी चिंता जताई है। परिजनों के अनुसार मरीज का एसपीओ-दो करीब 74 से 77 फीसदी तक दर्ज होने के बावजूद उसे अस्पताल से डिस्चार्ज करने की बात कही जा रही थी। मरीज की स्थिति को देखते हुए परिजनों ने जब इस निर्णय पर सवाल उठाए तो डिस्चार्ज प्रक्रिया पर पुनर्विचार किया गया।
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परिजनों का कहना है कि घटना को लेकर अस्पताल स्तर पर जांच की जा रही है, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में उन्हें इस जांच से अधिक उम्मीद नहीं है। उन्होंने एसडीएम पांवटा साहिब की निगरानी या अस्पताल प्रशासन से स्वतंत्र किसी सक्षम अधिकारी से जांच करवाने की मांग की है, ताकि किसी भी प्रकार के आंतरिक प्रभाव की संभावना न रहे।
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परिजनों ने मांग की है कि घटना से संबंधित सीसीटीवी फुटेज, ड्यूटी रोस्टर, ऑक्सीजन सप्लाई और सिलिंडर रिकॉर्ड, नर्सिंग रिकॉर्ड, उपचार संबंधी दस्तावेज तथा मरीज के वायटल मॉनिटरिंग रिकॉर्ड सुरक्षित रखे जाएं और जांच में शामिल किए जाएं। इसके अलावा घटना के समय मौजूद मरीज के परिजनों, अन्य मरीजों और तीमारदारों के साथ स्वतंत्र गवाहों के बयान भी दर्ज किए जाएं।
परिजनों ने ये भी मांग की है कि शिकायतकर्ता और गवाहों पर किसी तरह का दबाव, धमकी या समझौते के लिए दबाव न बनाया जाए। उन्होंने कहा कि यदि पांवटा सिविल अस्पताल में मरीज के लिए आवश्यक स्तर की चिकित्सा सुविधा या विशेषज्ञता उपलब्ध नहीं है तो उसकी स्थिति को देखते हुए पीजीआई चंडीगढ़ अथवा किसी अन्य उपयुक्त उच्च चिकित्सा केंद्र में रेफर करने पर विचार किया जाना चाहिए।