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Sirmour News: पांवटा साहिब कॉलेज एबीवीपी इकाई ने की सांकेतिक भूख हड़ताल
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मात्र मंत्रियों, नेताओं के बेटी को नौकरी, हजारों बेरोजगारों से खिलवाड़ : शिवानी
पांवटा कॉलेज के प्राचार्य ने वीरवार को जूस पिलाकर भूख हड़ताल करवाई समाप्त
संवाद न्यूज एजेंसी
पांवटा साहिब (सिरमौर)। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद पांवटा इकाई ने प्रदेश सरकार की छात्र विरोधी नीतियों, शिक्षा व्यवस्था की गिरती स्थिति और प्रशासन की निष्क्रियता के खिलाफ 24 घंटे की सांकेतिक भूख हड़ताल की।
राजकीय महाविद्यालय परिसर में शांतिपूर्ण तरीके से आयोजन हुआ। इसमें एबीवीपी के छात्र सदस्यों और परिषद के कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। प्रदेश सरकार को बेरोजगारी व युवा विरोधी जॉब ट्रेनिंग पॉलिसी पर घेरा गया। प्रदेश में सीएससीए चुनावी बहाली की मांग उठाई गई। जिला संयोजक वंश भंडारी ने कहा कि भूख हड़ताल में प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य मनीष समटा, कॉलेज इकाई सह सचिव अनिकेत भंडारी परिषद के अन्य वरिष्ठ कार्यकर्ता उपस्थित रहे। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही है। शिक्षा संस्थानों की दुर्दशा, बेरोजगारी और नशे का बढ़ता प्रकोप चिंताजनक है, जबकि प्रशासन हाथ पर हाथ धरे बैठा है।
विभिन्न मांगों को लेकर बुधवार एक बजे से वीरवार को 1 बजे तक 24 घंटे की सांकेतिक भूख हड़ताल की गई। परिषद की मांगों में छात्र संघ चुनाव तुरंत बहाल हो, राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 लागू हो, शिक्षण संस्थानों को राजनीतिक दलीयकरण से मुक्त किया जाए और उन्हें स्वतंत्र रूप से कार्य करने दिया जाए। शिक्षा संस्थानों की आधारभूत संरचना जैसे भवन, पुस्तकालय, प्रयोगशाला, खेल मैदान बेहतर हो, मूल्यांकन प्रक्रिया को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाया जाए ताकि छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ न हो।
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प्रदेश में बढ़ते नशा कारोबार पर लगे व कानून व्यवस्था को सुदृढ़ किया जाए। विभिन्न विभागों में खाली पदों को शीघ्र भरा जाए ताकि युवाओं को रोजगार के अवसर मिल सकें। आपदाओं से प्रभावित परिवारों को उचित व शीघ्र मुआवजा मिले। छात्र विरोधी जॉब ट्रेनिंग पॉलिसी को अविलंब वापस ली जाए। इकाई मंत्री शिवानी चौहान ने कहा कि प्रदेश में मंत्रियों व नेताओं के बच्चों को नौकरी मिल गई। हजारों बेरोजगार नौकरी के इंतजार में हैं। परिषद छात्र हितों की रक्षा के लिए संकल्पबद्ध है और आगे भी छात्र आवाज को बुलंद करती रहेगी, चाहे इसके लिए कितनी भी लंबी लड़ाई क्यों न लडऩी पड़े।
पांवटा कॉलेज के प्राचार्य डॉ. जगदीश चौहान व अधिवक्ता दिनेश चौहान ने वीरवार को दोपहर एक बजे के बाद छात्रों को जूस पिलाकर अनशन समाप्त करवाया।
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पांवटा कॉलेज के प्राचार्य ने वीरवार को जूस पिलाकर भूख हड़ताल करवाई समाप्त
संवाद न्यूज एजेंसी
पांवटा साहिब (सिरमौर)। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद पांवटा इकाई ने प्रदेश सरकार की छात्र विरोधी नीतियों, शिक्षा व्यवस्था की गिरती स्थिति और प्रशासन की निष्क्रियता के खिलाफ 24 घंटे की सांकेतिक भूख हड़ताल की।
राजकीय महाविद्यालय परिसर में शांतिपूर्ण तरीके से आयोजन हुआ। इसमें एबीवीपी के छात्र सदस्यों और परिषद के कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। प्रदेश सरकार को बेरोजगारी व युवा विरोधी जॉब ट्रेनिंग पॉलिसी पर घेरा गया। प्रदेश में सीएससीए चुनावी बहाली की मांग उठाई गई। जिला संयोजक वंश भंडारी ने कहा कि भूख हड़ताल में प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य मनीष समटा, कॉलेज इकाई सह सचिव अनिकेत भंडारी परिषद के अन्य वरिष्ठ कार्यकर्ता उपस्थित रहे। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही है। शिक्षा संस्थानों की दुर्दशा, बेरोजगारी और नशे का बढ़ता प्रकोप चिंताजनक है, जबकि प्रशासन हाथ पर हाथ धरे बैठा है।
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विभिन्न मांगों को लेकर बुधवार एक बजे से वीरवार को 1 बजे तक 24 घंटे की सांकेतिक भूख हड़ताल की गई। परिषद की मांगों में छात्र संघ चुनाव तुरंत बहाल हो, राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 लागू हो, शिक्षण संस्थानों को राजनीतिक दलीयकरण से मुक्त किया जाए और उन्हें स्वतंत्र रूप से कार्य करने दिया जाए। शिक्षा संस्थानों की आधारभूत संरचना जैसे भवन, पुस्तकालय, प्रयोगशाला, खेल मैदान बेहतर हो, मूल्यांकन प्रक्रिया को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाया जाए ताकि छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ न हो।
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प्रदेश में बढ़ते नशा कारोबार पर लगे व कानून व्यवस्था को सुदृढ़ किया जाए। विभिन्न विभागों में खाली पदों को शीघ्र भरा जाए ताकि युवाओं को रोजगार के अवसर मिल सकें। आपदाओं से प्रभावित परिवारों को उचित व शीघ्र मुआवजा मिले। छात्र विरोधी जॉब ट्रेनिंग पॉलिसी को अविलंब वापस ली जाए। इकाई मंत्री शिवानी चौहान ने कहा कि प्रदेश में मंत्रियों व नेताओं के बच्चों को नौकरी मिल गई। हजारों बेरोजगार नौकरी के इंतजार में हैं। परिषद छात्र हितों की रक्षा के लिए संकल्पबद्ध है और आगे भी छात्र आवाज को बुलंद करती रहेगी, चाहे इसके लिए कितनी भी लंबी लड़ाई क्यों न लडऩी पड़े।
पांवटा कॉलेज के प्राचार्य डॉ. जगदीश चौहान व अधिवक्ता दिनेश चौहान ने वीरवार को दोपहर एक बजे के बाद छात्रों को जूस पिलाकर अनशन समाप्त करवाया।