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नाहन में सरकारी संस्थानों के निजीकरण के खिलाफ फूटा गुस्सा
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सचित्र-03
नाहन में सरकारी संस्थानों के निजीकरण पर फूटा ट्रेड यूनियन का गुस्सा
पुरानी पेंशन बहाल करने और आउटसोर्स प्रणाली खत्म करने की मांग
भारतीय ट्रेड यूनियन की जिला सिरमौर संयुक्त समिति ने किया प्रदर्शन
संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन (सिरमौर)। भारतीय ट्रेड यूनियन की जिला सिरमौर संयुक्त समिति ने बुधवार को नाहन में देश में सरकारी संस्थानों के चल रहे निजीकरण के विरोध में भारत सरकार के खिलाफ रोष प्रदर्शन किया। समिति से जुड़े लोगों ने उपायुक्त कार्यालय के बाहर पहुंचकर केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। इस मौके पर समिति के प्रतिनिधिमंडल ने इंटक के जिलाध्यक्ष सुभाष शर्मा और सीटू के जिला महासचिव राजेंद्र ठाकुर की अगुवाई में प्रधानमंत्री के नाम उपायुक्त को एक 15 सूत्रीय मांगपत्र सौंपा। ज्ञापन के माध्यम से समिति के पदाधिकारियों ने वर्तमान जीवन सूचकांक के आधार पर राष्ट्रीय न्यूनतम वेतन 21 हजार रुपये प्रतिमाह करने, आउटसोर्स प्रणाली खत्म कर मजदूरों और कर्मचारियों की सीधी भर्ती करने, वर्ष 2003 के बाद नियुक्त सभी कर्मचारियों को पुरानी पेंशन योजना के दायरे में लाने, पोस्टल, बैंक, बीमा, बीएसएनएल, रक्षा, बिजली, रेलवे, कोयला, बंदरगाहों, एनटीपीसी, एसजेवीएनएल, बीएचईएल सार्वजनिक क्षेत्रों का विनिवेश और निजीकरण बंद करने, महंगाई रोकने के लिए खाद्य वस्तुओं की नीति बंद करने, पेट्रो पदार्थों पर से एक्साइज ड्यूटी कम करने, 44 श्रम कानूनों को खत्म कर 4 श्रम संहिताओं में बदलने के मजदूर विरोधी संशोधन वापस लेने, आंगनबाड़ी, मिड-डे मील, आशा कार्यकर्ताओं को सरकारी कर्मचारी बनाकर पेंशन का लाभ और हरियाणा की तर्ज पर वेतन का लाभ देने, मोटर व्हीकल एक्ट में परिवहन मजदूरों व मालिक विरोधी धाराओं को वापस लेने, सभी आउटसोर्स कर्मचारियों को अविलंब सरकारी अनुबंध पर लेने, केंद्र व राज्य सरकार में रिक्त पड़े सभी पदों को अविलंब भरने, मनरेगा मजदूरों को साल में कम से कम 120 काम रोजगार देकर न्यूनतम वेतन देने, रेहड़ी-फड़ी-तहबाजारी के अधिकारों की रक्षा करने, यूनियनों का पंजीकरण सरल करके एक महीने में इस कार्य को पूरा करने, सेवाकाल के दौरान मृत कर्मचारियों के आश्रितों को करूणामूलक आधार पर बिना शर्त नौकरी प्रदान करने और तहबाजारी कानून को सख्ती से लागू करने की मांग की।
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नाहन में सरकारी संस्थानों के निजीकरण पर फूटा ट्रेड यूनियन का गुस्सा
पुरानी पेंशन बहाल करने और आउटसोर्स प्रणाली खत्म करने की मांग
भारतीय ट्रेड यूनियन की जिला सिरमौर संयुक्त समिति ने किया प्रदर्शन
संवाद न्यूज एजेंसी
नाहन (सिरमौर)। भारतीय ट्रेड यूनियन की जिला सिरमौर संयुक्त समिति ने बुधवार को नाहन में देश में सरकारी संस्थानों के चल रहे निजीकरण के विरोध में भारत सरकार के खिलाफ रोष प्रदर्शन किया। समिति से जुड़े लोगों ने उपायुक्त कार्यालय के बाहर पहुंचकर केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। इस मौके पर समिति के प्रतिनिधिमंडल ने इंटक के जिलाध्यक्ष सुभाष शर्मा और सीटू के जिला महासचिव राजेंद्र ठाकुर की अगुवाई में प्रधानमंत्री के नाम उपायुक्त को एक 15 सूत्रीय मांगपत्र सौंपा। ज्ञापन के माध्यम से समिति के पदाधिकारियों ने वर्तमान जीवन सूचकांक के आधार पर राष्ट्रीय न्यूनतम वेतन 21 हजार रुपये प्रतिमाह करने, आउटसोर्स प्रणाली खत्म कर मजदूरों और कर्मचारियों की सीधी भर्ती करने, वर्ष 2003 के बाद नियुक्त सभी कर्मचारियों को पुरानी पेंशन योजना के दायरे में लाने, पोस्टल, बैंक, बीमा, बीएसएनएल, रक्षा, बिजली, रेलवे, कोयला, बंदरगाहों, एनटीपीसी, एसजेवीएनएल, बीएचईएल सार्वजनिक क्षेत्रों का विनिवेश और निजीकरण बंद करने, महंगाई रोकने के लिए खाद्य वस्तुओं की नीति बंद करने, पेट्रो पदार्थों पर से एक्साइज ड्यूटी कम करने, 44 श्रम कानूनों को खत्म कर 4 श्रम संहिताओं में बदलने के मजदूर विरोधी संशोधन वापस लेने, आंगनबाड़ी, मिड-डे मील, आशा कार्यकर्ताओं को सरकारी कर्मचारी बनाकर पेंशन का लाभ और हरियाणा की तर्ज पर वेतन का लाभ देने, मोटर व्हीकल एक्ट में परिवहन मजदूरों व मालिक विरोधी धाराओं को वापस लेने, सभी आउटसोर्स कर्मचारियों को अविलंब सरकारी अनुबंध पर लेने, केंद्र व राज्य सरकार में रिक्त पड़े सभी पदों को अविलंब भरने, मनरेगा मजदूरों को साल में कम से कम 120 काम रोजगार देकर न्यूनतम वेतन देने, रेहड़ी-फड़ी-तहबाजारी के अधिकारों की रक्षा करने, यूनियनों का पंजीकरण सरल करके एक महीने में इस कार्य को पूरा करने, सेवाकाल के दौरान मृत कर्मचारियों के आश्रितों को करूणामूलक आधार पर बिना शर्त नौकरी प्रदान करने और तहबाजारी कानून को सख्ती से लागू करने की मांग की।