शिलाई (सिरमौर)। राजस्थान, उत्तरप्रदेश और मध्यप्रदेश सहित आधा दर्जन प्रदेशों के साथ अब हिमाचल में भी एससी-एसटी एक्ट की खिलाफत की चिंगारी भड़कने लगी है। सिर्फ आर्थिक आधार पर आरक्षण देने और एससी-एसटी एक्ट में संशोधन करने की मांग को लेकर सोमवार को सवर्ण जाति के लोगों ने शिलाई में जिला स्तरीय महापंचायत का आयोजन किया। महापंचायत में पूरे जिले से हजारों लोगों ने हिस्सा लिया। राजपूत सभा के अध्यक्ष प्रताप सिंह तोमर, सुरेंद्र हिंदुस्तानी, रघुवीर कपूर, जीत सिंह आदि वक्ताओं ने कहा कि आर्थिक आधार पर आरक्षण दिया जाए। यदि केंद्र सरकार ऐसा नहीं करती है तो सवर्णों की ओर से पूरे देश में आंदोलन किया जाएगा। सवर्ण समुदाय की अगली बैठक जिला मुख्यालय नाहन में होगी। सवर्णों ने एकमत से आरक्षण को खत्म कर केवल आर्थिक आधार पर आरक्षण की मांग बुलंद की। महापंचायत में निर्णय लिया गया कि आरक्षण में मिलने वाले शौचालय, गैस सिलिंडर, राशन कार्ड में छूट, पीएम आवास योजना, निशुल्क बिजली कनेक्शन, नौकरी में आरक्षण के अलावा सभी तरह के जातिगत आरक्षण तुरंत बंद कर केवल आर्थिक आरक्षण रखा जाए। वक्ताओं ने कहा कि प्रदेश में एससी-एसटी के सैकड़ों केस सवर्ण जाति पर बनाए गए हैं, जिसमें 99 प्रतिशत मामले केवल आरक्षण के कारण मिल रही सुविधाओं का लाभ लेने के लिए किए गए हैं। सिर्फ एक्ट का फायदा उठा कर झूठे मामले बनाए गए हैं। इसलिए यदि एक्ट में संशोधन न किया गया तो पूरे देश के हर राज्य में सरकार के खिलाफ आंदोलन की आवाज उठेगी। इस मौके पर स्थानीय नेताओं पर भी महापंचायत ने तंज कसे। कहा कि वर्तमान विधायक और पूर्व विधायक दोनों ही नेता सवर्ण जाति से हैं लेकिन समुदाय की बैठक में कोई भी उपस्थित नहीं होता। भविष्य में यदि ये नेता समुदाय के साथ खड़े नहीं होते हैं तो दोनों ही नेता 85 और 15 प्रतिशत का जोड़ समझ लें। महापंचायत के बाद लोगों ने एसडीएम की मार्फत प्रदेश और केंद्र सरकार को मांगों का ज्ञापन भी भेजा। इस अवसर पर जालम सिंह, नाथूराम, सहीराम, मायाराम, मानसिंह, कल्याण सिंह, संतराम शर्मा, अमर सिंह, बहादुर सिंह, महेंद्र नेंगी, जगत सिंह, भीम सिंह सहित सैकड़ों लोग उपस्थित रहे।