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पांवटा-सतौन में डेंगू का प्रकोप, दो दर्जन चपेट में
Updated Sat, 13 Oct 2018 07:56 PM IST
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पांवटा साहिब (सिरमौर)। पांवटा और सतौन में डेंगू के रोगियों की संख्या बढ़ने लगी है। अधिकतर डेंगू के रोगी निजी अस्पताल, पीजीआई और देहरादून में अपना उपचार करवा रहे हैं। सिविल अस्पताल में अब तक डेंगू के चार मरीज पहुंचे हैं। इनकी एलाइजा टेस्ट रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। इनको सिविल अस्पताल में उपचार दिया जा रहा है या नाहन रेफर किया गया है।
डेंगू के ज्यादातर मरीज निजी अस्पतालों में उपचार को पहुंच रहे हैं। डेंगू रोगियों की प्लेटलेट्स कम होने पर कुछ लोग होम्योपैथिक उपचार भी करवा रहे हैं। निजी क्लीनिक संचालक डॉ. रोहताश नागिया ने कहा कि अक्तूबर माह में ही एक दर्जन डेंगू के मरीज सामने आ चुके हैं। इनमें से अधिकतर उपचार के बाद घर लौट गए हैं। डेंगू होने पर सही समय पर सही उपचार जरूरी है। डेंगू का इलाज होम्योपैथिक में संभव है। वहीं, पांवटा सिविल अस्पताल में भी डेंगू के 4 मरीज पहुंच चुके हैं। चिकित्सकों का कहना है कि प्लेटलेट्स कम हैं तो वायरल भी वजह हो सकती है। इस तरह के सभी मामलों में डेंगू होना जरूरी नहीं है। उधर, सतौन पंचायत प्रधान रजनीश चौहान व उपप्रधान रामेश्वर शर्मा ने कहा कि डेंगू के काफी मरीज सामने आ चुके हैं। इसके बाद पंचायत क्षेत्र में फॉगिंग करवाई गई है। जल ठहराव वाले स्थलों को साफ करवाया जा रहा है।
सिविल अस्पताल पांवटा के प्रभारी डॉ. संजीव सहगल ने कहा कि अस्पताल में डेंगू के 4 मरीज अब तक सामने आए हैं। पांच दिनों के भीतर एलाइजा टेस्ट करवाने पर डेंगू के लक्षण सामने आ जाते हैं। ज्यादा दिनों बाद टेस्ट करवाने से परिणाम कई बार गलत भी सामने आ सकते हैं। डेंगू से बचने के लिए सतर्कता व बचाव जरूरी है। डेंगू के लक्षण होने पर जांच करवानी चाहिए।
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डेंगू के ज्यादातर मरीज निजी अस्पतालों में उपचार को पहुंच रहे हैं। डेंगू रोगियों की प्लेटलेट्स कम होने पर कुछ लोग होम्योपैथिक उपचार भी करवा रहे हैं। निजी क्लीनिक संचालक डॉ. रोहताश नागिया ने कहा कि अक्तूबर माह में ही एक दर्जन डेंगू के मरीज सामने आ चुके हैं। इनमें से अधिकतर उपचार के बाद घर लौट गए हैं। डेंगू होने पर सही समय पर सही उपचार जरूरी है। डेंगू का इलाज होम्योपैथिक में संभव है। वहीं, पांवटा सिविल अस्पताल में भी डेंगू के 4 मरीज पहुंच चुके हैं। चिकित्सकों का कहना है कि प्लेटलेट्स कम हैं तो वायरल भी वजह हो सकती है। इस तरह के सभी मामलों में डेंगू होना जरूरी नहीं है। उधर, सतौन पंचायत प्रधान रजनीश चौहान व उपप्रधान रामेश्वर शर्मा ने कहा कि डेंगू के काफी मरीज सामने आ चुके हैं। इसके बाद पंचायत क्षेत्र में फॉगिंग करवाई गई है। जल ठहराव वाले स्थलों को साफ करवाया जा रहा है।
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सिविल अस्पताल पांवटा के प्रभारी डॉ. संजीव सहगल ने कहा कि अस्पताल में डेंगू के 4 मरीज अब तक सामने आए हैं। पांच दिनों के भीतर एलाइजा टेस्ट करवाने पर डेंगू के लक्षण सामने आ जाते हैं। ज्यादा दिनों बाद टेस्ट करवाने से परिणाम कई बार गलत भी सामने आ सकते हैं। डेंगू से बचने के लिए सतर्कता व बचाव जरूरी है। डेंगू के लक्षण होने पर जांच करवानी चाहिए।
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