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सड़क निर्माण में वन विभाग का पेंच, बनेगा रास्ता
Updated Tue, 23 Jan 2018 08:24 PM IST
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सड़क निर्माण में वन विभाग का पेंच, बनेगा रास्ता
भीतरकुई के लिए मनरेगा से बनेगा एक मीटर चौड़ा रास्ता
सिंचाई के लिए टैंक निर्माण को भी दी मौके पर ही मंजूरी
अमर उजाला ब्यूरो
सतौन (सिरमौर)।
शिलाई के अंतर्गत भीतरकुई गांव के लिए सड़क निर्माण में वन विभाग का पेंच फंस गया है। सड़क निर्माण में वन विभाग की जमीन आने की वजह से इसमें काफी वक्त लगेगा। हालांकि, जिला प्रशासन गांव तक सड़क पहुंचाने के लिए राज्य सरकार से संस्तुति करने का आश्वासन दिया है लेकिन हैरत यह है कि आजादी के इतने वर्ष बाद भी राजनेता और प्रशासनिक अधिकारी आखिर क्या करते रहे।
खैर, सड़क निर्माण से पहले गांव तक पक्का रास्ता बनाने के लिए मनरेगा की सहायता ली जाएगी। मनरेगा के अंतर्गत पोका से भीतरकुई तक करीब एक मीटर चौड़ा पक्का रास्ता बनाया जाएगा ताकि गांव में पैदा होने वाले कृषि एवं बागवानी संबंधी उत्पादों को घोड़ों व खच्चरों पर आसानी से मंडियों तक पहुंचाया जा सके।
गौरतलब है कि सोमवार को बीडीओ की अगुवाई में एक टीम भीतरकुई पहुंची थी जिसमें पलायन की मुख्य वजह सड़क नहीं होना बताया गया। कोटगा से भीतरकुई तक करीब साढ़े तीन किलोमीटर सड़क निर्माण के लिए जिला प्रशासन जल्द ही सरकार से संस्तुति करेगा। बीडीओ पांवटा ने पंचायत प्रधान को इस कार्य को मनरेगा की शेल्फ में डालने के आदेश दिए हैं जिसका बजट तुरंत जारी किया जाएगा।
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इसके अलावा बागवानी विभाग ने मनरेगा के अंतर्गत खेतों में पौधे लगाने की बात कही है। जबकि सिंचाई के लिए टैंक का भी निर्माण किया जाएगा। गर्मियों में पानी की समस्या से निजात दिलाने के लिए उठाऊ पेयजल योजना बनाई जाएगी। जबकि थ्री फेस विद्युत सप्लाई के लिए बिजली बोर्ड ने भी हामी भर दी है।
डीएफओ रेणुका सुशील राणा ने बताया कि वन विभाग एक किलोमीटर तक की सड़क वहां पर बना सकता है, जहां पर वन विभाग का कोई भवन हो लेकिन भीतरकुई में ऐसा नहीं है। सड़क लोनिवि के अंतर्गत ही बनेगी जिसकी औपचारिकताएं पहले पूरी करनी होगी।
पंचायत प्रधान पोका शीला देवी ने बताया कि पोका से भीतरकुई तक एक किलोमीटर पक्का रास्ता बनाने का प्रस्ताव शेल्फ में डाला जाएगा।
----------
बॉक्स के लिए--
क्या कहते हैं अधिकारी
---उपायुक्त ललित जैन ने बताया कि इलाके की समस्याएं सुलझाने के प्रयास किए गए हैं। सड़क निर्माण में खर्चा काफी अधिक होना है। इतना अधिक बजट जारी करना डीसी के भी अधिकार में नहीं है। वह सरकार का प्रपोजल भेज कर गांव के किसी अन्य हैड से धन मंजूर करवाकर सड़क पहुंचाने का प्रयास करेंगे।
---संजय भारद्वाज
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सड़क निर्माण में वन विभाग का पेंच, बनेगा रास्ता
भीतरकुई के लिए मनरेगा से बनेगा एक मीटर चौड़ा रास्ता
सिंचाई के लिए टैंक निर्माण को भी दी मौके पर ही मंजूरी
अमर उजाला ब्यूरो
सतौन (सिरमौर)।
शिलाई के अंतर्गत भीतरकुई गांव के लिए सड़क निर्माण में वन विभाग का पेंच फंस गया है। सड़क निर्माण में वन विभाग की जमीन आने की वजह से इसमें काफी वक्त लगेगा। हालांकि, जिला प्रशासन गांव तक सड़क पहुंचाने के लिए राज्य सरकार से संस्तुति करने का आश्वासन दिया है लेकिन हैरत यह है कि आजादी के इतने वर्ष बाद भी राजनेता और प्रशासनिक अधिकारी आखिर क्या करते रहे।
खैर, सड़क निर्माण से पहले गांव तक पक्का रास्ता बनाने के लिए मनरेगा की सहायता ली जाएगी। मनरेगा के अंतर्गत पोका से भीतरकुई तक करीब एक मीटर चौड़ा पक्का रास्ता बनाया जाएगा ताकि गांव में पैदा होने वाले कृषि एवं बागवानी संबंधी उत्पादों को घोड़ों व खच्चरों पर आसानी से मंडियों तक पहुंचाया जा सके।
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गौरतलब है कि सोमवार को बीडीओ की अगुवाई में एक टीम भीतरकुई पहुंची थी जिसमें पलायन की मुख्य वजह सड़क नहीं होना बताया गया। कोटगा से भीतरकुई तक करीब साढ़े तीन किलोमीटर सड़क निर्माण के लिए जिला प्रशासन जल्द ही सरकार से संस्तुति करेगा। बीडीओ पांवटा ने पंचायत प्रधान को इस कार्य को मनरेगा की शेल्फ में डालने के आदेश दिए हैं जिसका बजट तुरंत जारी किया जाएगा।
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इसके अलावा बागवानी विभाग ने मनरेगा के अंतर्गत खेतों में पौधे लगाने की बात कही है। जबकि सिंचाई के लिए टैंक का भी निर्माण किया जाएगा। गर्मियों में पानी की समस्या से निजात दिलाने के लिए उठाऊ पेयजल योजना बनाई जाएगी। जबकि थ्री फेस विद्युत सप्लाई के लिए बिजली बोर्ड ने भी हामी भर दी है।
डीएफओ रेणुका सुशील राणा ने बताया कि वन विभाग एक किलोमीटर तक की सड़क वहां पर बना सकता है, जहां पर वन विभाग का कोई भवन हो लेकिन भीतरकुई में ऐसा नहीं है। सड़क लोनिवि के अंतर्गत ही बनेगी जिसकी औपचारिकताएं पहले पूरी करनी होगी।
पंचायत प्रधान पोका शीला देवी ने बताया कि पोका से भीतरकुई तक एक किलोमीटर पक्का रास्ता बनाने का प्रस्ताव शेल्फ में डाला जाएगा।
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बॉक्स के लिए--
क्या कहते हैं अधिकारी
---उपायुक्त ललित जैन ने बताया कि इलाके की समस्याएं सुलझाने के प्रयास किए गए हैं। सड़क निर्माण में खर्चा काफी अधिक होना है। इतना अधिक बजट जारी करना डीसी के भी अधिकार में नहीं है। वह सरकार का प्रपोजल भेज कर गांव के किसी अन्य हैड से धन मंजूर करवाकर सड़क पहुंचाने का प्रयास करेंगे।
---संजय भारद्वाज