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कालाअंब में दो दर्जन औद्योगिक इकाइयां बंद
Updated Sun, 03 Dec 2017 10:26 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
कालाअंब (सिरमौर)।
औद्योगिक क्षेत्र कालाअंब से उद्योगपति मुंह मोड़ने लगे हैं। आर्थिक तंगहाली की वजह से कालाअंब क्षेत्र के दो दर्जन से अधिक उद्योग बंद हो गए हैं। हालांकि, बंद होने वाले उद्योगों की अपेक्षा नई औद्योगिक इकाइयां खुलने की संख्या अधिक है लेकिन बड़े उद्योगों की बजाय अब लोग छोटे या मझले उद्योगों को अधिक तरजीह देने लगे हैं।
जिला सिरमौर के औद्योगिक क्षेत्र कालाअंब में पिछले साढ़े पांच साल में दो दर्जन औद्योगिक इकाइयां बंद हुई हैं। इनमें अधिकतर उद्योग बड़े दर्जे के थे। वित्तीय वर्ष अप्रैल 2012 से अगस्त 2017 तक 145 नई औद्योगिक इकाइयों ने पंजीकरण करवाया जबकि 22 उद्योगों का विस्तारीकरण किया गया। वर्ष 2012 से चालू वित्तीय वर्ष 2017 तक 24 उद्योग बंद हुए हैं। औद्योगिक क्षेत्र के जानकारों की मानें तो उद्योगों के बंद होने का मुख्य कारण उनकी आर्थिक तंगी रही है। कई स्थानों पर उद्योग में एक से अधिक भागीदारी होना भी इसकी वजह रही है।
वहीं, केंद्र सरकार के औद्योगिक पैकेज में कटौती और कई कर लगने से भी उद्योगपतियों ने घाटे में चल रहे उद्योगों को बंद करना मुनासिब समझा। उन्होंने बताया कि अमूमन आर्थिक तंगी के कारण मझले व लघु उद्योग बंदी के कगार पर पहुंचते हैं। बड़े पैमाने के उद्योगों की उत्पादन लागत और मझले व लघु उद्योगों की उत्पादन लागत में 30 से 40 प्रतिशत का अंतर पड़ जाता है जिस कारण छोटे उद्योग प्रतिस्पर्धा में पिछड़ जाते हैं।
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उधर, सिरमौर जिले के कालाअंब, खैरी, जोहड़ों व मोगीनंद क्षेत्र में 5 सालों के दौरान बंद इकाइयों की अपेक्षा नई इकाइयों की स्थापना तथा पुराने उद्योगों का विस्तारीकरण ज्यादा हुआ है। इनमें लगभग 3000 लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार प्राप्त हुआ है।
कालाअंब स्थित उद्योग विभाग के सिंगल विंडो क्लीयरेंस के सदस्य सचिव साक्षी सत्ती ने बताया कि पिछले 5 वर्षों के दौरान लगभग पौने दो सौ छोटी बड़ी इकाइयों की स्थापना व विस्तारीकरण के लिए पंजीकरण किया गया। जबकि नए उद्योगों की तुलना में बंद होने वाले उद्योगों की संख्या कम है। उन्होंने बताया कि बीते 5 सालों में हजारों लोगों को औद्योगिक इकाइयों में रोजगार मिला है।
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कालाअंब (सिरमौर)।
औद्योगिक क्षेत्र कालाअंब से उद्योगपति मुंह मोड़ने लगे हैं। आर्थिक तंगहाली की वजह से कालाअंब क्षेत्र के दो दर्जन से अधिक उद्योग बंद हो गए हैं। हालांकि, बंद होने वाले उद्योगों की अपेक्षा नई औद्योगिक इकाइयां खुलने की संख्या अधिक है लेकिन बड़े उद्योगों की बजाय अब लोग छोटे या मझले उद्योगों को अधिक तरजीह देने लगे हैं।
जिला सिरमौर के औद्योगिक क्षेत्र कालाअंब में पिछले साढ़े पांच साल में दो दर्जन औद्योगिक इकाइयां बंद हुई हैं। इनमें अधिकतर उद्योग बड़े दर्जे के थे। वित्तीय वर्ष अप्रैल 2012 से अगस्त 2017 तक 145 नई औद्योगिक इकाइयों ने पंजीकरण करवाया जबकि 22 उद्योगों का विस्तारीकरण किया गया। वर्ष 2012 से चालू वित्तीय वर्ष 2017 तक 24 उद्योग बंद हुए हैं। औद्योगिक क्षेत्र के जानकारों की मानें तो उद्योगों के बंद होने का मुख्य कारण उनकी आर्थिक तंगी रही है। कई स्थानों पर उद्योग में एक से अधिक भागीदारी होना भी इसकी वजह रही है।
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वहीं, केंद्र सरकार के औद्योगिक पैकेज में कटौती और कई कर लगने से भी उद्योगपतियों ने घाटे में चल रहे उद्योगों को बंद करना मुनासिब समझा। उन्होंने बताया कि अमूमन आर्थिक तंगी के कारण मझले व लघु उद्योग बंदी के कगार पर पहुंचते हैं। बड़े पैमाने के उद्योगों की उत्पादन लागत और मझले व लघु उद्योगों की उत्पादन लागत में 30 से 40 प्रतिशत का अंतर पड़ जाता है जिस कारण छोटे उद्योग प्रतिस्पर्धा में पिछड़ जाते हैं।
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उधर, सिरमौर जिले के कालाअंब, खैरी, जोहड़ों व मोगीनंद क्षेत्र में 5 सालों के दौरान बंद इकाइयों की अपेक्षा नई इकाइयों की स्थापना तथा पुराने उद्योगों का विस्तारीकरण ज्यादा हुआ है। इनमें लगभग 3000 लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार प्राप्त हुआ है।
कालाअंब स्थित उद्योग विभाग के सिंगल विंडो क्लीयरेंस के सदस्य सचिव साक्षी सत्ती ने बताया कि पिछले 5 वर्षों के दौरान लगभग पौने दो सौ छोटी बड़ी इकाइयों की स्थापना व विस्तारीकरण के लिए पंजीकरण किया गया। जबकि नए उद्योगों की तुलना में बंद होने वाले उद्योगों की संख्या कम है। उन्होंने बताया कि बीते 5 सालों में हजारों लोगों को औद्योगिक इकाइयों में रोजगार मिला है।