{"_id":"5a4b92174f1c1b10788b618c","slug":"61514902039-sirmour-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"सिरमौर के नौनिहालों की सेहत पर बना संकट","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सिरमौर के नौनिहालों की सेहत पर बना संकट
Updated Tue, 02 Jan 2018 10:41 PM IST
विज्ञापन
HOSPITAL OF HORRORS
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
संजय भारद्वाज
नाहन (सिरमौर)।
अपने बच्चे को उपचार के लिए नाहन मेडिकल कॉलेज आ रहे हैं तो यहां आपको मायूसी ही हाथ लगेगी। दरअसल, मेडिकल कॉलेज में इन दिनों शिशु रोग विशेषज्ञ नहीं है। अपने बच्चों को उपचार के लिए यहां ला रहे परिजनों को मायूस होकर लौटना पड़ रहा है। इमरजेंसी में बच्चों को यहां से रेफर किया जा रहा है।
सिरमौर जिले में नाहन मेडिकल कॉलेज ही सबसे बड़ा स्वास्थ्य संस्थान है। मेडिकल कॉलेज बनने के लिए लोगों को उम्मीद थी कि यहां पर अब विशेषज्ञ चिकित्सकों के पद भरे जाएंगे और मरीजों को सहूलियत होगी। मेडिकल कॉलेज बनने के बाद यहां जिला अस्पताल का वजूद मिट गया। मेडिकल कॉलेज भी बन गया, लेकिन सुविधाएं नहीं जुटाई जा रही। बिना रिलीवर के लिए यहां से चिकित्सक भेजे जा रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार कुछ अरसे पहले ही मेडिकल कॉलेज में तैनात एक चिकित्सक शिमला ट्रांसफर हुए हैं, जबकि एक अन्य चिकित्सक पहली जनवरी के बाद चंडीगढ़ में ट्रेनिंग के लिए निकल गए हैं। ऐसे में मेडिकल कॉलेज नाहन में शिशु रोग विशेषज्ञ के लिए बनाया गया कैबिन बंद पड़ गया है।
विज्ञापन
बाक्स के लिए ---
अस्पताल में 500 से अधिक ओपीडी
अस्पताल में सामान्य तौर पर 500 रोगियों से ज्यादा ओपीडी रहती है। इनमें बच्चों की संख्या कहीं अधिक है। सर्दी का मौसम होने के कारण इन दिनों बच्चे बुखार, खासी और सर्दी-जुखाम की चपेट में आ रहे हैं लेकिन उन्हें देखने वाला कोई नहीं। बच्चों को विशेषज्ञों की बजाय दूसरे चिकित्सकों को चेक करवाना पड़ रहा है।
----------
दुर्गम क्षेत्र के रोगी पहुंचते हैं नाहन
जिला सिरमौर के दुर्गम क्षेत्रों के सैकड़ों रोगी इलाज के लिए नाहन पहुंचते हैं। अस्पताल का चक्कर काटने के बाद कभी रोगियों को डॉक्टर नहीं मिलता तो कभी दूसरी सुविधाएं। रोगी अपना पैसा व वक्त बर्बाद करने के बाद मजबूरन निजी चिकित्सालयों की ओर रुख करते हैं। मंगलवार को इलाज के लिए पहुंचे सुरेश कुमार, आदेश ठाकुर, सुनीता देवी ने बताया कि यहां चिकित्सक नहीं होने से दिक्कत हो रही है। विशेषज्ञ चिकित्सक नहीं होने के कारण वह अपने बच्चों को निजी अस्पताल लेकर जा रहे हैं।
-----------
मामला उच्चाधिकारियों के ध्यान में
इन दिनों मेडिकल कॉलेज में शिशु रोग विशेषज्ञ नहीं है। एक चिकित्सक पहले ही शिमला गए हैं, जबकि दूसरे चिकित्सक अब कोर्स के लिए चंडीगढ़ गए हैं। मामला उच्च अधिकारियों के ध्यान में है। जल्द ही नए चिकित्सक के आदेश हो जाएंगे।
-----डॉ. केके पराशर, चिकित्सा अधीक्षक नाहन मेडिकल कॉलेज।
विज्ञापन
नाहन (सिरमौर)।
अपने बच्चे को उपचार के लिए नाहन मेडिकल कॉलेज आ रहे हैं तो यहां आपको मायूसी ही हाथ लगेगी। दरअसल, मेडिकल कॉलेज में इन दिनों शिशु रोग विशेषज्ञ नहीं है। अपने बच्चों को उपचार के लिए यहां ला रहे परिजनों को मायूस होकर लौटना पड़ रहा है। इमरजेंसी में बच्चों को यहां से रेफर किया जा रहा है।
सिरमौर जिले में नाहन मेडिकल कॉलेज ही सबसे बड़ा स्वास्थ्य संस्थान है। मेडिकल कॉलेज बनने के लिए लोगों को उम्मीद थी कि यहां पर अब विशेषज्ञ चिकित्सकों के पद भरे जाएंगे और मरीजों को सहूलियत होगी। मेडिकल कॉलेज बनने के बाद यहां जिला अस्पताल का वजूद मिट गया। मेडिकल कॉलेज भी बन गया, लेकिन सुविधाएं नहीं जुटाई जा रही। बिना रिलीवर के लिए यहां से चिकित्सक भेजे जा रहे हैं।
विज्ञापन
सूत्रों के अनुसार कुछ अरसे पहले ही मेडिकल कॉलेज में तैनात एक चिकित्सक शिमला ट्रांसफर हुए हैं, जबकि एक अन्य चिकित्सक पहली जनवरी के बाद चंडीगढ़ में ट्रेनिंग के लिए निकल गए हैं। ऐसे में मेडिकल कॉलेज नाहन में शिशु रोग विशेषज्ञ के लिए बनाया गया कैबिन बंद पड़ गया है।
विज्ञापन
बाक्स के लिए ---
अस्पताल में 500 से अधिक ओपीडी
अस्पताल में सामान्य तौर पर 500 रोगियों से ज्यादा ओपीडी रहती है। इनमें बच्चों की संख्या कहीं अधिक है। सर्दी का मौसम होने के कारण इन दिनों बच्चे बुखार, खासी और सर्दी-जुखाम की चपेट में आ रहे हैं लेकिन उन्हें देखने वाला कोई नहीं। बच्चों को विशेषज्ञों की बजाय दूसरे चिकित्सकों को चेक करवाना पड़ रहा है।
----------
दुर्गम क्षेत्र के रोगी पहुंचते हैं नाहन
जिला सिरमौर के दुर्गम क्षेत्रों के सैकड़ों रोगी इलाज के लिए नाहन पहुंचते हैं। अस्पताल का चक्कर काटने के बाद कभी रोगियों को डॉक्टर नहीं मिलता तो कभी दूसरी सुविधाएं। रोगी अपना पैसा व वक्त बर्बाद करने के बाद मजबूरन निजी चिकित्सालयों की ओर रुख करते हैं। मंगलवार को इलाज के लिए पहुंचे सुरेश कुमार, आदेश ठाकुर, सुनीता देवी ने बताया कि यहां चिकित्सक नहीं होने से दिक्कत हो रही है। विशेषज्ञ चिकित्सक नहीं होने के कारण वह अपने बच्चों को निजी अस्पताल लेकर जा रहे हैं।
-----------
मामला उच्चाधिकारियों के ध्यान में
इन दिनों मेडिकल कॉलेज में शिशु रोग विशेषज्ञ नहीं है। एक चिकित्सक पहले ही शिमला गए हैं, जबकि दूसरे चिकित्सक अब कोर्स के लिए चंडीगढ़ गए हैं। मामला उच्च अधिकारियों के ध्यान में है। जल्द ही नए चिकित्सक के आदेश हो जाएंगे।
-----डॉ. केके पराशर, चिकित्सा अधीक्षक नाहन मेडिकल कॉलेज।