{"_id":"5c45c8e0bdec2229c12b7e44","slug":"51548077280-sirmour-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"रेणुका चिलिंग प्लांट पर पर लटका ताला","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
रेणुका चिलिंग प्लांट पर पर लटका ताला
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
रेणुका चिलिंग प्लांट पर पर लटका ताला
एक हजार से दो लीटर तक सिमट गया दूध का उत्पादन
37 वर्ष पहले पूर्व विधायक डॉ. प्रेम ने दी थी क्षेत्र को सौगात
योगेंद्र अग्रवाल
ददाहू (सिरमौर)। रेणुका विस क्षेत्र में खुले एकमात्र दुग्ध चिलिंग प्लांट को बंद कर दिया गया है। इस प्लांट को 37 साल पहले बडौन गांव में खोला गया था। राज्य दुग्ध प्रसंग के इस चिलिंग प्लांट में दुग्ध उत्पादन क्षमता घटकर महज दो लीटर ही रह गई थी। इसके चलते विभाग ने इसे बंद कर दिया।
गौरतलब है कि इस प्लांट की क्षमता एक हजार लीटर दूध के उत्पादन की थी। एक दशक से इसके उत्पादन में लगातार गिरावट आ रही थी। रेणुका के दिवंगत विधायक डॉ. प्रेम सिंह के प्रयासों से इस चिलिंग प्लांट को वर्ष 1982 में स्थापित किया गया था। वर्ष 2018 में इस चिलिंग प्लांट की उत्पादन क्षमता घटकर 20 लीटर पर स्थिर थी लेकिन, रेणुका मेला बीतने के बाद इस चिलिंग प्लांट की उत्पादन क्षमता 20 लीटर से घटकर 10 रह गई थी। जबकि, दिसंबर में उत्पादन दो लीटर पर सिमट गया। लगातार घाटे का सबब बनने के कारण विभाग ने इसे बंद करना ही उचित समझा। चिलिंग प्लांट के बंद होने से उसमें लगी मशीनें अब धूल फांक रही हैं। जबकि एक दशक पूर्व सैनधार और गिरिपार क्षेत्र की आधा दर्जन दुग्ध इकाइयां इस प्लांट को दूध की आपूर्ति किया करती थीं। लेकिन, विभाग के अड़ियल रवैये के कारण ही धीरे-धीरे दुग्ध इकाइयों ने इस चिलिंग प्लांट से मुंह मोड़ लिया। प्लांट में दुग्ध की आपूर्ति ठप होकर रह गई। विभाग ने चिलिंग प्लांट की दुकानों को फिलहाल खाली नहीं किया है। इससे विभाग पर मासिक किराये का बोझ भी बढ़ रहा है।
क्या कहते हैं विभाग के अधिकारी
राज्य दुग्ध प्रसंग के जिला प्रबंधक नागेश गुप्ता ने बताया कि रेणुका चिलिंग प्लांट को संचालित करने के सभी प्रयास नाकाम रहे। उत्पादन बढ़ने की बजाय लगातार घट रहा है। दिसंबर में जब उत्पादन मात्र दो लीटर पर सिमट गया तो इसे बंद करना ही विभाग के हित में था।
विज्ञापन
क्या कहते हैं क्षेत्र के विधायक
पूर्व विधायक डॉ. प्रेम के सुपुत्र और क्षेत्र के विधायक विनय कुमार ने कहा कि चिलिंग प्लांट का बंद होना दुर्भाग्यपूर्ण है। भाजपा सरकार नए संस्थान खोलने की बजाय पुराने संस्थानों को बंद करने पर अधिक जोर दे रही है। चिलिंग प्लांट के बंद होने से क्षेत्र की जनता को निश्चित तौर पर परेशानी होगी। वह इस मुद्दे को विधानसभा में प्रमुखता से उठाएंगे। इस प्लांट को दोबारा शुरू करवाने का प्रयास किया जाएगा।
विज्ञापन
एक हजार से दो लीटर तक सिमट गया दूध का उत्पादन
37 वर्ष पहले पूर्व विधायक डॉ. प्रेम ने दी थी क्षेत्र को सौगात
योगेंद्र अग्रवाल
ददाहू (सिरमौर)। रेणुका विस क्षेत्र में खुले एकमात्र दुग्ध चिलिंग प्लांट को बंद कर दिया गया है। इस प्लांट को 37 साल पहले बडौन गांव में खोला गया था। राज्य दुग्ध प्रसंग के इस चिलिंग प्लांट में दुग्ध उत्पादन क्षमता घटकर महज दो लीटर ही रह गई थी। इसके चलते विभाग ने इसे बंद कर दिया।
गौरतलब है कि इस प्लांट की क्षमता एक हजार लीटर दूध के उत्पादन की थी। एक दशक से इसके उत्पादन में लगातार गिरावट आ रही थी। रेणुका के दिवंगत विधायक डॉ. प्रेम सिंह के प्रयासों से इस चिलिंग प्लांट को वर्ष 1982 में स्थापित किया गया था। वर्ष 2018 में इस चिलिंग प्लांट की उत्पादन क्षमता घटकर 20 लीटर पर स्थिर थी लेकिन, रेणुका मेला बीतने के बाद इस चिलिंग प्लांट की उत्पादन क्षमता 20 लीटर से घटकर 10 रह गई थी। जबकि, दिसंबर में उत्पादन दो लीटर पर सिमट गया। लगातार घाटे का सबब बनने के कारण विभाग ने इसे बंद करना ही उचित समझा। चिलिंग प्लांट के बंद होने से उसमें लगी मशीनें अब धूल फांक रही हैं। जबकि एक दशक पूर्व सैनधार और गिरिपार क्षेत्र की आधा दर्जन दुग्ध इकाइयां इस प्लांट को दूध की आपूर्ति किया करती थीं। लेकिन, विभाग के अड़ियल रवैये के कारण ही धीरे-धीरे दुग्ध इकाइयों ने इस चिलिंग प्लांट से मुंह मोड़ लिया। प्लांट में दुग्ध की आपूर्ति ठप होकर रह गई। विभाग ने चिलिंग प्लांट की दुकानों को फिलहाल खाली नहीं किया है। इससे विभाग पर मासिक किराये का बोझ भी बढ़ रहा है।
विज्ञापन
क्या कहते हैं विभाग के अधिकारी
राज्य दुग्ध प्रसंग के जिला प्रबंधक नागेश गुप्ता ने बताया कि रेणुका चिलिंग प्लांट को संचालित करने के सभी प्रयास नाकाम रहे। उत्पादन बढ़ने की बजाय लगातार घट रहा है। दिसंबर में जब उत्पादन मात्र दो लीटर पर सिमट गया तो इसे बंद करना ही विभाग के हित में था।
विज्ञापन
क्या कहते हैं क्षेत्र के विधायक
पूर्व विधायक डॉ. प्रेम के सुपुत्र और क्षेत्र के विधायक विनय कुमार ने कहा कि चिलिंग प्लांट का बंद होना दुर्भाग्यपूर्ण है। भाजपा सरकार नए संस्थान खोलने की बजाय पुराने संस्थानों को बंद करने पर अधिक जोर दे रही है। चिलिंग प्लांट के बंद होने से क्षेत्र की जनता को निश्चित तौर पर परेशानी होगी। वह इस मुद्दे को विधानसभा में प्रमुखता से उठाएंगे। इस प्लांट को दोबारा शुरू करवाने का प्रयास किया जाएगा।