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स्वीकृति के बावजूद नहीं हुई पॉलीहाउस की मरम्मत
Updated Mon, 16 Apr 2018 11:27 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
सराहां (सिरमौर)।
राज्य सरकार की योजना का फायदा कंपनी की कथित तानाशाही के कारण किसानों को नहीं मिल पा रहा है। पॉलीहाउस की मरम्मत के लिए 50 फीसदी अनुदान की योजना सिरे नहीं चढ़ पाई। संबंधित कंपनी कार्य करने में दिलचस्पी नहीं दिखा रही जिस वजह से किसानों को घाटा उठाना पड़ रहा है। पच्छाद क्षेत्र में ऐसे दर्जनों किसान हैं जिनके पॉलीहाउस की मरम्मत की फाइलें मंजूर हुई हैं, लेकिन दस महीने बीतने के बाद भी इनकी मरम्मत नहीं हो पा रही है। इस वजह से किसान पॉलीहाउस में फसल नहीं उगा पा रहे हैं।
किसान भूपेंद्र भंडारी, शमशेर ठाकुर, उमा दत्त, सुरेंद्र कुमार, राजेंद्र सिंह, नरेश कुमार, शिवदत्त, राम सिंह, सतीश कुमार समेत दर्जनों किसानों ने मांग की है कि पूर्व सरकार के समय में पॉलीहाउस की मरम्मत के लिए योजना शुरू हुई थी। इसके लिए किसानों से आवेदन मांगे गए थे। सरकार ने अधिसूचना जारी की थी कि जिन किसानों के पांच वर्षों से ज्यादा समय के बाद ग्रीन हाउस की शीटें प्राकृतिक आपदा से फटी हैं, उन किसानों की पचास फीसदी अनुदान व पचास फीसदी पैसा जमा करने के बाद सरकार मरम्मत करवाएगी लेकिन दस महीने बीत जाने के बाद भी मरम्मत नहीं हो रही। इस कारण किसान सितंबर-अक्टूबर में लगने वाली फसल नहीं लगा पाए। वहीं, अब मार्च-अप्रैल में लगने वाली शिमला मिर्च, टमाटर व फूल इत्यादि फसलें भी नहीं लग पाई हैं। लोग विभाग के चक्कर काटते-काटते थक गए हैं, मगर विभाग के कान पर जूं नहीं रेंग रही है।
भूपेंद्र भंडारी ने कहा कि प्राकृतिक आपदा से जो पॉलीहाउस एक साल के भीतर भी फट जाते हैं, उन्हें भी सरकार विभाग की रिपोर्ट लेने के बाद मरम्मत करवाएं क्योंकि पच्छाद क्षेत्र में कई ऐसे किसान हैं जिनके पॉलीहाउस तेज हवा व तूफान के कारण एक वर्ष के भीतर ही टूट गए थे।
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उधर, कृषि विभाग के कृषि विषयवाद विशेषज्ञ प्यारेलाल ने बताया कि मरम्मत का कार्य कंपनी को दिया गया है। कंपनी के अधिकारियों से बार-बार संपर्क भी किया गया है लेकिन वह कार्य करने में दिलचस्पी नहीं दिखा रहे। विभाग के आला अधिकारियों को भी इसकी जानकारी दी गई है।
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सराहां (सिरमौर)।
राज्य सरकार की योजना का फायदा कंपनी की कथित तानाशाही के कारण किसानों को नहीं मिल पा रहा है। पॉलीहाउस की मरम्मत के लिए 50 फीसदी अनुदान की योजना सिरे नहीं चढ़ पाई। संबंधित कंपनी कार्य करने में दिलचस्पी नहीं दिखा रही जिस वजह से किसानों को घाटा उठाना पड़ रहा है। पच्छाद क्षेत्र में ऐसे दर्जनों किसान हैं जिनके पॉलीहाउस की मरम्मत की फाइलें मंजूर हुई हैं, लेकिन दस महीने बीतने के बाद भी इनकी मरम्मत नहीं हो पा रही है। इस वजह से किसान पॉलीहाउस में फसल नहीं उगा पा रहे हैं।
किसान भूपेंद्र भंडारी, शमशेर ठाकुर, उमा दत्त, सुरेंद्र कुमार, राजेंद्र सिंह, नरेश कुमार, शिवदत्त, राम सिंह, सतीश कुमार समेत दर्जनों किसानों ने मांग की है कि पूर्व सरकार के समय में पॉलीहाउस की मरम्मत के लिए योजना शुरू हुई थी। इसके लिए किसानों से आवेदन मांगे गए थे। सरकार ने अधिसूचना जारी की थी कि जिन किसानों के पांच वर्षों से ज्यादा समय के बाद ग्रीन हाउस की शीटें प्राकृतिक आपदा से फटी हैं, उन किसानों की पचास फीसदी अनुदान व पचास फीसदी पैसा जमा करने के बाद सरकार मरम्मत करवाएगी लेकिन दस महीने बीत जाने के बाद भी मरम्मत नहीं हो रही। इस कारण किसान सितंबर-अक्टूबर में लगने वाली फसल नहीं लगा पाए। वहीं, अब मार्च-अप्रैल में लगने वाली शिमला मिर्च, टमाटर व फूल इत्यादि फसलें भी नहीं लग पाई हैं। लोग विभाग के चक्कर काटते-काटते थक गए हैं, मगर विभाग के कान पर जूं नहीं रेंग रही है।
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भूपेंद्र भंडारी ने कहा कि प्राकृतिक आपदा से जो पॉलीहाउस एक साल के भीतर भी फट जाते हैं, उन्हें भी सरकार विभाग की रिपोर्ट लेने के बाद मरम्मत करवाएं क्योंकि पच्छाद क्षेत्र में कई ऐसे किसान हैं जिनके पॉलीहाउस तेज हवा व तूफान के कारण एक वर्ष के भीतर ही टूट गए थे।
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उधर, कृषि विभाग के कृषि विषयवाद विशेषज्ञ प्यारेलाल ने बताया कि मरम्मत का कार्य कंपनी को दिया गया है। कंपनी के अधिकारियों से बार-बार संपर्क भी किया गया है लेकिन वह कार्य करने में दिलचस्पी नहीं दिखा रहे। विभाग के आला अधिकारियों को भी इसकी जानकारी दी गई है।