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फर्जी बिल थमाकर लगाया लाखों का चूना
Updated Wed, 11 Oct 2017 01:00 PM IST
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फर्जी बिल थमाकर लगाया लाखों का चूना
हिमाचल इंस्टीट्यूट निदेशक ने दर्ज की शिकायत
पुलिस मामला दर्ज कर छानबीन में जुटी
अमर उजाला ब्यूरो
पांवटा साहिब (सिरमौर)।
पांवटा के कुंजा मतरालियों स्थित संस्थान में फर्जी बिल बना कर लाखों रुपये का चूना लगाने का मामला सामने आया है। संस्थान के निदेशक ने जालसाजी का मामला दर्ज करवा दिया है जिसके बाद पुलिस जांच टीम मामले की तफ्तीश में जुट गई है।
पांवटा में डॉ. पूरन चंद चेरीटेबल ट्रस्ट द्वारा संचालित हिमाचल इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मेसी को लाखों की चपत लगाई गई। शिकायत के अनुसार एक शख्स ने स्थानीय फार्मेसी प्रबंधन को आकर बताया कि वह एफआरआई देहरादून में माली का काम करता है। एफआरआई की पृष्ठभूमि के कारण उसको फार्मेसी में जड़ी-बूटियां, पौधों व बीज की आपूर्ति संस्थान को शुरू कर दी। 28 फरवरी 2017 की सप्लाई का एक बिल संस्थान के निदेशक के हाथ किसी तरह से लग गया जिसमें फार्मेसी की 10079 की देनदारी बताई गई। अपने स्तर पर प्रबंधन ने थोड़ी तफ्तीश करवाई तो बिल ही फर्जी निकला। कोई सप्लाई की नहीं जा रही थी।
फार्मेसी परिसर में ही फर्जी तरीके से वेरिफिकेशन करवाई जाती थी। फर्जीवाड़े में निदेशक, उप प्रधानाचार्य व अकाउंट विभाग की फर्जी मुहरें व हस्ताक्षर भी कर दिए जाते रहे। इसी तरह से आरोपी ने प्रबंधन से साढ़े 5 लाख रुपये का भुगतान मार्च 2016 तक लिया।
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उधर, डीएसपी पांवटा प्रमोद चौहान ने मामले की पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि संस्थान के निदेशक की शिकायत पर आरोपी के खिलाफ आईपीसी की धारा-420 मामला दर्ज कर जांच की जा रही है।
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सुरेश तोमर
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हिमाचल इंस्टीट्यूट निदेशक ने दर्ज की शिकायत
पुलिस मामला दर्ज कर छानबीन में जुटी
अमर उजाला ब्यूरो
पांवटा साहिब (सिरमौर)।
पांवटा के कुंजा मतरालियों स्थित संस्थान में फर्जी बिल बना कर लाखों रुपये का चूना लगाने का मामला सामने आया है। संस्थान के निदेशक ने जालसाजी का मामला दर्ज करवा दिया है जिसके बाद पुलिस जांच टीम मामले की तफ्तीश में जुट गई है।
पांवटा में डॉ. पूरन चंद चेरीटेबल ट्रस्ट द्वारा संचालित हिमाचल इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मेसी को लाखों की चपत लगाई गई। शिकायत के अनुसार एक शख्स ने स्थानीय फार्मेसी प्रबंधन को आकर बताया कि वह एफआरआई देहरादून में माली का काम करता है। एफआरआई की पृष्ठभूमि के कारण उसको फार्मेसी में जड़ी-बूटियां, पौधों व बीज की आपूर्ति संस्थान को शुरू कर दी। 28 फरवरी 2017 की सप्लाई का एक बिल संस्थान के निदेशक के हाथ किसी तरह से लग गया जिसमें फार्मेसी की 10079 की देनदारी बताई गई। अपने स्तर पर प्रबंधन ने थोड़ी तफ्तीश करवाई तो बिल ही फर्जी निकला। कोई सप्लाई की नहीं जा रही थी।
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फार्मेसी परिसर में ही फर्जी तरीके से वेरिफिकेशन करवाई जाती थी। फर्जीवाड़े में निदेशक, उप प्रधानाचार्य व अकाउंट विभाग की फर्जी मुहरें व हस्ताक्षर भी कर दिए जाते रहे। इसी तरह से आरोपी ने प्रबंधन से साढ़े 5 लाख रुपये का भुगतान मार्च 2016 तक लिया।
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उधर, डीएसपी पांवटा प्रमोद चौहान ने मामले की पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि संस्थान के निदेशक की शिकायत पर आरोपी के खिलाफ आईपीसी की धारा-420 मामला दर्ज कर जांच की जा रही है।
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सुरेश तोमर
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