{"_id":"5b77080d42c79246725ba057","slug":"31534527501-sirmour-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"बैकराउंड म्यूजिक जरूरी, तभी तो फिल्म में मजा आएगा....","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बैकराउंड म्यूजिक जरूरी, तभी तो फिल्म में मजा आएगा....
Updated Fri, 17 Aug 2018 11:08 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
... बैकराउंड म्यूजिक जरूरी, तभी फिल्म में मजा आएगा
नाहन के चौगान मैदान में अटल की बोली से बदल गया था रैली का माहौल
संजय भारद्वाज
नाहन (सिरमौर)।
फिल्म में बैकराउंड म्यूजिक जरूरी है, तभी तो मजा आएगा....। नाहन के चौगान मैदान में अपने भाषण को ठहराव देते हुए पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने जब यह कहा था तो पूरा चौगान तालियों और हंसी से गूंज उठा था। किस्सा वर्ष 1992-93 का है। पूर्व प्रधानमंत्री एक चुनावी रैली को संबोधित कर रहे थे। वे नाहन के चौगान में भाषण दे रहे थे।
अटल जैसे ही मंच पर बोलने लगे। पार्टी टिकट के तलबगार के करीब 120 कार्यकर्ता स्टेज के पीछे सड़क से नारे लगाते चलने लगे। सड़क मंच के साथ होने पर आवाज श्रोताओं के कानों तक गूंजने लगी। कुछ कार्यकर्ताओं ने पंडाल से उठने की कोशिश की थी कि अटल ने अपने भाषण को हल्का सा ठहराव दिया। कार्यकर्ताओं की मंशा भांपते हुए उन्होंने कहा - अरे, मित्रों कोई बात नहीं। फिल्म के बीच इस तरह का बैकराउंड म्यूजिक भी जरूरी है..., तभी तो मजा आएगा। इतना सुनते ही पूरा पंडाल ठहाकों से गूंज उठा। ठहाकों की आवाज इतनी जोरदार थी कि नारेबाजी करने वाले कार्यकर्ता भी शांत हो गए। नाहन कॉलेज में उस दौरान शिक्षा ग्रहण कर रहे सुरेश कुमार, जीएस नेगी, अरुण जोशी और मामराज शर्मा ने कहा कि अटल को सुनने के लिए वे उत्सुक थे। उन्होंने ऐसे बोल बोले कि जनसभा का माहौल ही अचानक बदल गया। ऐसे हाजिर जवाब नेता थे अटलजी। इसके बाद अटल करीब 45 मिनट तक बोले, एक भी बार विरोधी पार्टी पर अमर्यादित किसी भाषा का प्रयोग नहीं किया।
--
... जब पत्रकार से मांगा जिताऊ उम्मीदवार का नाम
वर्ष 1980 में अटल जब पार्टी अध्यक्ष थे तो उन्होंने नाहन के एक पत्रकार से अलग से मुलाकात कर जिताऊ उम्मीदवार का नाम देने की बात कही थी। इसके बाद हालांकि कभी पत्रकार ने न उनसे बात की और न उनका फोन आया। एक बार एक नेता के आग्रह पर पत्रकार एसपी जैरथ ने उन्हें फोन किया। उन्होंने बताया कि रात करीब 11 बजे बैककॉल आई। उनसे काफी देर बात हुई। उन्होंने नेता का नाम सुझाया और उन्हें टिकट भी दिया गया। यह बात अलग है कि उनके सुझाए नेता चुनाव में विजयी नहीं हो पाए।
विज्ञापन
--
नाहन के चौगान मैदान में अटल की बोली से बदल गया था रैली का माहौल
संजय भारद्वाज
नाहन (सिरमौर)।
फिल्म में बैकराउंड म्यूजिक जरूरी है, तभी तो मजा आएगा....। नाहन के चौगान मैदान में अपने भाषण को ठहराव देते हुए पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने जब यह कहा था तो पूरा चौगान तालियों और हंसी से गूंज उठा था। किस्सा वर्ष 1992-93 का है। पूर्व प्रधानमंत्री एक चुनावी रैली को संबोधित कर रहे थे। वे नाहन के चौगान में भाषण दे रहे थे।
अटल जैसे ही मंच पर बोलने लगे। पार्टी टिकट के तलबगार के करीब 120 कार्यकर्ता स्टेज के पीछे सड़क से नारे लगाते चलने लगे। सड़क मंच के साथ होने पर आवाज श्रोताओं के कानों तक गूंजने लगी। कुछ कार्यकर्ताओं ने पंडाल से उठने की कोशिश की थी कि अटल ने अपने भाषण को हल्का सा ठहराव दिया। कार्यकर्ताओं की मंशा भांपते हुए उन्होंने कहा - अरे, मित्रों कोई बात नहीं। फिल्म के बीच इस तरह का बैकराउंड म्यूजिक भी जरूरी है..., तभी तो मजा आएगा। इतना सुनते ही पूरा पंडाल ठहाकों से गूंज उठा। ठहाकों की आवाज इतनी जोरदार थी कि नारेबाजी करने वाले कार्यकर्ता भी शांत हो गए। नाहन कॉलेज में उस दौरान शिक्षा ग्रहण कर रहे सुरेश कुमार, जीएस नेगी, अरुण जोशी और मामराज शर्मा ने कहा कि अटल को सुनने के लिए वे उत्सुक थे। उन्होंने ऐसे बोल बोले कि जनसभा का माहौल ही अचानक बदल गया। ऐसे हाजिर जवाब नेता थे अटलजी। इसके बाद अटल करीब 45 मिनट तक बोले, एक भी बार विरोधी पार्टी पर अमर्यादित किसी भाषा का प्रयोग नहीं किया।
विज्ञापन
--
... जब पत्रकार से मांगा जिताऊ उम्मीदवार का नाम
वर्ष 1980 में अटल जब पार्टी अध्यक्ष थे तो उन्होंने नाहन के एक पत्रकार से अलग से मुलाकात कर जिताऊ उम्मीदवार का नाम देने की बात कही थी। इसके बाद हालांकि कभी पत्रकार ने न उनसे बात की और न उनका फोन आया। एक बार एक नेता के आग्रह पर पत्रकार एसपी जैरथ ने उन्हें फोन किया। उन्होंने बताया कि रात करीब 11 बजे बैककॉल आई। उनसे काफी देर बात हुई। उन्होंने नेता का नाम सुझाया और उन्हें टिकट भी दिया गया। यह बात अलग है कि उनके सुझाए नेता चुनाव में विजयी नहीं हो पाए।
विज्ञापन
--