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शमशेर विल्ला सैरगाह में चीड़ के सैंकड़ों पेड़ छलनी
Updated Mon, 17 Sep 2018 10:56 PM IST
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शमशेर विल्ला सैरगाह में चीड़ के सैकड़ों पेड़ छलनी
नियमों को ताक पर रखकर निकाला जा रहा बिरोजा
सूखने के कगार पर पहुंचे पेड़, पर्यावरण को खतरा
हितेश शर्मा
नाहन (सिरमौर)। शहर की प्रसिद्ध सैरगाह शमशेर विल्ला में दूसरों को जिंदगी देने वाले पेड़ खुदके जीवन की फरियाद लगा रहे हैं। शहर के लोगों को शांति और तरोताजा करने वाली इस सैरगाह में चीड़ के पेड़ों का हश्र कुछ ठीक नहीं हो रहा। सैकड़ों पेड़ छलनी किए जा रहे हैं। यहां चंद पैसों के लिए अवैध ढंग से बिरोजा निकासी का कार्य जारी है। हैरानी इस बात की है कि नगर परिषद इस मामले में अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर पाई है। जबकि, पिछले लंबे समय से अवैध तरीके से बिरोजा निकाला जा रहा है। हालत यह हो गई है कि कई ऐसे पेड़ सूखने के कगार पर पहुंच गए हैं। शमशेर विल्ला में छतरी के बाईं तरफ चीड़ का निजी जंगल है। इस जंगल में सैकड़ों पेड़ बुरी तरह से छलनी किए गए हैं। यहां पर नियम के मुताबिक बिरोजा निकासी नहीं की जा रही है। विभाग के नियम के अनुसार एक पेड़ में एक कुप्पी में बिरोजा निकालने के लिए स्वीकृति दी जाती है, लेकिन यहां पर एक नहीं, कई जगह दो, कहीं तीन तो कुछ पेड़ों में चार से पांच कुप्पी भी पेड़ में ठूंसी गई हैं। इसके लिए पेड़ के दोनों तरफ का हिस्सा छलनी किया गया है। इससे न केवल पर्यावरण पर खतरा मंडरा रहा है बल्कि, पेड़ों की भी दुर्गति हो रही है। इस मामले में शहर के समाजसेवी, पर्यावरणविद एवं आरटीआई एक्टिविस्ट सुधीर रमौल ने वन विभाग के अधिकारियों को शिकायत भी की है। उन्होंने इस मामले की जांच मांगी है।
क्या है नियम
चीड़ के पेड़ से बिरोजा निकालने के लिए विभाग की ओर से नियम बनाए गए हैं। जिस पेड़ को बिरोजा निकालने के लिए चिन्हित किया जाता है उसमें एक ही कुप्पी लगाने का प्रावधान है। जिस स्थान से बिरोजा निकाला जाना है, वहां पर एक सीजन में पेड़ को बीच से 12 सेमी बाईं और 12 सेमी दाईं तरफ, लंबाई 32 सेमी, चौड़ाई 24 सेमी, गहराई 2 एमएम होनी चाहिए। जबकि, यहां ऐसा नहीं है।
मामले की जानकारी नहीं : ईओ
वन विभाग के अरण्यपाल बीएल नेगी ने बताया कि शिकायत मिली है लेकिन उनके पास जंगल की कंट्रोलिंग नहीं है। यह निजी जंगल है। इसकी कंट्रोलिंग नगर परिषद के पास है। वहीं, नप के कार्यकारी अधिकारी अजमेर सिंह ठाकुर ने बताया कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं है। जल्द ही वह इस मामले में कार्रवाई करेंगे।
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नियमों को ताक पर रखकर निकाला जा रहा बिरोजा
सूखने के कगार पर पहुंचे पेड़, पर्यावरण को खतरा
हितेश शर्मा
नाहन (सिरमौर)। शहर की प्रसिद्ध सैरगाह शमशेर विल्ला में दूसरों को जिंदगी देने वाले पेड़ खुदके जीवन की फरियाद लगा रहे हैं। शहर के लोगों को शांति और तरोताजा करने वाली इस सैरगाह में चीड़ के पेड़ों का हश्र कुछ ठीक नहीं हो रहा। सैकड़ों पेड़ छलनी किए जा रहे हैं। यहां चंद पैसों के लिए अवैध ढंग से बिरोजा निकासी का कार्य जारी है। हैरानी इस बात की है कि नगर परिषद इस मामले में अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर पाई है। जबकि, पिछले लंबे समय से अवैध तरीके से बिरोजा निकाला जा रहा है। हालत यह हो गई है कि कई ऐसे पेड़ सूखने के कगार पर पहुंच गए हैं। शमशेर विल्ला में छतरी के बाईं तरफ चीड़ का निजी जंगल है। इस जंगल में सैकड़ों पेड़ बुरी तरह से छलनी किए गए हैं। यहां पर नियम के मुताबिक बिरोजा निकासी नहीं की जा रही है। विभाग के नियम के अनुसार एक पेड़ में एक कुप्पी में बिरोजा निकालने के लिए स्वीकृति दी जाती है, लेकिन यहां पर एक नहीं, कई जगह दो, कहीं तीन तो कुछ पेड़ों में चार से पांच कुप्पी भी पेड़ में ठूंसी गई हैं। इसके लिए पेड़ के दोनों तरफ का हिस्सा छलनी किया गया है। इससे न केवल पर्यावरण पर खतरा मंडरा रहा है बल्कि, पेड़ों की भी दुर्गति हो रही है। इस मामले में शहर के समाजसेवी, पर्यावरणविद एवं आरटीआई एक्टिविस्ट सुधीर रमौल ने वन विभाग के अधिकारियों को शिकायत भी की है। उन्होंने इस मामले की जांच मांगी है।
क्या है नियम
चीड़ के पेड़ से बिरोजा निकालने के लिए विभाग की ओर से नियम बनाए गए हैं। जिस पेड़ को बिरोजा निकालने के लिए चिन्हित किया जाता है उसमें एक ही कुप्पी लगाने का प्रावधान है। जिस स्थान से बिरोजा निकाला जाना है, वहां पर एक सीजन में पेड़ को बीच से 12 सेमी बाईं और 12 सेमी दाईं तरफ, लंबाई 32 सेमी, चौड़ाई 24 सेमी, गहराई 2 एमएम होनी चाहिए। जबकि, यहां ऐसा नहीं है।
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मामले की जानकारी नहीं : ईओ
वन विभाग के अरण्यपाल बीएल नेगी ने बताया कि शिकायत मिली है लेकिन उनके पास जंगल की कंट्रोलिंग नहीं है। यह निजी जंगल है। इसकी कंट्रोलिंग नगर परिषद के पास है। वहीं, नप के कार्यकारी अधिकारी अजमेर सिंह ठाकुर ने बताया कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं है। जल्द ही वह इस मामले में कार्रवाई करेंगे।
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