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दुराचार के मामले में शिक्षक को दस वर्ष की कैद

Tue, 19 Mar 2019 10:02 PM IST
rajeshwar gautam rajeshwar gautam
Updated Tue, 19 Mar 2019 10:02 PM IST
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दुराचार के मामले में शिक्षक को दस वर्ष की कैद
चंडीगढ़ कोर्ट, हाईकोर्ट, अदालत, न्यायालय - फोटो : file photo
अमर उजाला ब्यूरो
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नाहन (सिरमौर)। दसवीं की छात्रा से जबरन दुष्कर्म करने का अभियोग साबित होने पर जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने एक शिक्षक को दस वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। आरोपी को 50 हजार रुपये का जुर्माना भी अदा करना होगा। जुर्माना अदा नहीं करने की सूरत में आरोपी को एक साल का अतिरिक्त कारावास भोगना होगा।

जिला न्यायवादी एमके शर्मा ने अदालत में मामले की पैरवी की। उन्होंने बताया कि मामला सितंबर 2015 का है। इस दौरान आरोपी सिरमौर जिले के संगड़ाह उपमंडल के एक सरकारी स्कूल में शिक्षक था। सितंबर 2015 में दोषी ने पीड़िता को अखबार में लिपटा कुछ सामान अपने किराये के कमरे में भिजवाया। छात्रा जब वहां पहुंची तो आरोपी पहले से ही कमरे में मौजूद था। इस दौरान उसने छात्रा से दुष्कर्म किया और इसकी शिकायत करने पर उसके माता-पिता को जान से मारने की धमकी दी। यहां तक कि आरोपी शिक्षक ने पीड़िता को शिक्षा प्रमाणपत्र नहीं देने की भी बात कही। डरी सहमी छात्रा ने इसकी शिकायत किसी ने नहीं की लेकिन, दो महीने बाद छात्रा की हालत बिगड़ी तो परिजन उसे लेकर नाहन अस्पताल पहुंचे। यहां टेस्ट के बाद उसमें एनीमिया की शिकायत पाई गई लेकिन, करीब सात महीने के बाद उसके पेट में दर्द शुरू हो गया। तत्पश्चात पीड़िता की बहन ने उसका प्रेग्नेंसी टेस्ट करवाया। इसकी रिपोर्ट पॉजीटिव आने पर मामले का खुलासा हुआ। इसके बाद परिजनों ने रेणुका थाना में इसका मामला दर्ज करवाया। मामला दर्ज होने के बाद पीड़िता ने 9 मई 2016 को नाहन अस्पताल में बेटे को जन्म दिया। पुलिस ने पीड़िता सहित शिक्षक और नवजात शिशु का डीएनए प्रोफाइलिंग का टेस्ट भी करवाया। डीएनए टेस्ट में पुष्टि हुई कि आरोपी शिक्षक ही शिशु का जैविक पिता है। इसी के आधार पर अदालत में चालान दाखिल किया गया। जिला न्यायवादी एमके शर्मा ने अदालत में मामले की पैरवी की। उन्होंने बताया कि अदालत ने 13 गवाहों की सुनवाई के बाद यह फैसला सुनाया है। आरोपी को पोक्सो एक्ट की धारा छह के तहत दस साल की कठोर कैद और 50 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई है। जुर्माना नहीं देने पर उसे एक साल की अतिरिक्त कैद भुगतनी पड़ेगी।
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