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नाम सीएचसी, सुविधाएं पीएचसी के बराबर भी नहीं
Updated Fri, 21 Sep 2018 11:08 PM IST
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नाम सीएचसी, सुविधाएं पीएचसी के बराबर भी नहीं
राजपुर सीएचसी में खाली चल रहे चिकित्सकों के पद
डेपुटेशन पर चल रहा अस्पताल का कार्य, लोगों में रोष
अमर उजाला ब्यूरो
राजपुर (सिरमौर)। आंजभोज क्षेत्र के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र राजपुर में स्वास्थ्य सुविधाएं लड़खड़ा गई हैं। कहने को तो यहां सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र खोला गया है, लेकिन मरीजों को सुविधाएं पीएचसी के बराबर भी नहीं मिल रही हैं। यहां चिकित्सकों और अन्य स्टाफ के पद लंबे समय से रिक्त चल रहे हैं। हालत यह है कि अस्पताल के समीप बने आवासीय भवन भी अब खंडहर बनने लगे हैं। इन जर्जर भवनों में अब घास और झाड़ियां उगी हुई हैं। आंजभोज क्षेत्र के बीडीसी चेयरमैन रमेश तोमर, राजपुर पंचायत प्रधान केतकी शर्मा, निशीकांत मेहता, सुनीता शर्मा प्रधान डांडा, सुरेश शर्मा प्रधान नघेता, सुनील चौहान प्रधान बनौर, निर्मला तोमर प्रधान बढाना, दिनेश शर्मा, अर्जुन सिंह, जगदीश चौहान, अमरेश शर्मा, काकाराम शर्मा, चतर चौहान, बालक राम शर्मा आदि ने बताया कि राजपुर अस्पताल डेपुटेशन के सहारे चल रहा है। वर्तमान में यहां केवल एक बीएमओ ही तैनात है। एक अन्य चिकित्सक को भंगानी से डेपुटेशन पर यहां तैनात किया गया है। दो डॉक्टर, स्टाफ नर्स, एक फार्मासिस्ट सहित कई पद खाली चल रहे हैं। वर्तमान में कार्यरत बीएमओ को दो सीएचसी, नौ पीएचसी तथा 40 डिस्पेंसरियों का जिम्मा भी है। क्षेत्र की जनता ने जनमंच कार्यक्रम में भी यह मांग प्रमुखता से उठाई थी लेकिन, आश्वासन के अलावा कुछ नहीं मिला। हालत यह है कि यदि बीएमओ को किसी कार्यक्रम में इलाके से बाहर जाना पड़ता है तो यहां मरीजों को उपचार नहीं मिल पाता।
इन इलाकों की बीस हजार आबादी है निर्भर
भौगोलिक दृष्टि से सीएचसी राजपुर में डांडा-कंडेला, अंबोया, सालवाला, नघेता, बनौर, शिवा-सुनोग, किल्लौड़, बढ़ाना, खोदरी माजरी, भगानी, मानपुर देवड़ा, कुलथीना-शमयाला, टौरू भैला आदि पंचायतों की करीब 20 हजार आबादी को फायदा पहुंचता है। लेकिन, चिकित्सकों एवं स्टाफ की कमी के कारण यहां लोगों को पर्याप्त सुविधाएं नहीं मिल रहीं। लोग मजबूरन पांवटा या फिर हरियाणा के विकास नगर जाने को विवश हैं।
क्या कहते हैं अधिकारी
खंड चिकित्सा अधिकारी उदय ठाकुर ने माना कि उनका क्षेत्र काफी बड़ा है। कई बार हमें स्वास्थ्य शिविर और दूसरे अस्पतालों के निरीक्षण के लिए भी जाना पड़ता है। तब अस्पताल में ओपीडी और दाखिल मरीजों के उपचार के लिए चिकित्सकों की कमी महसूस होती है। रिक्त पदों की पूर्ति के लिए सरकार और उच्च अधिकारियों को पत्राचार किया गया है।
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राजपुर सीएचसी में खाली चल रहे चिकित्सकों के पद
डेपुटेशन पर चल रहा अस्पताल का कार्य, लोगों में रोष
अमर उजाला ब्यूरो
राजपुर (सिरमौर)। आंजभोज क्षेत्र के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र राजपुर में स्वास्थ्य सुविधाएं लड़खड़ा गई हैं। कहने को तो यहां सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र खोला गया है, लेकिन मरीजों को सुविधाएं पीएचसी के बराबर भी नहीं मिल रही हैं। यहां चिकित्सकों और अन्य स्टाफ के पद लंबे समय से रिक्त चल रहे हैं। हालत यह है कि अस्पताल के समीप बने आवासीय भवन भी अब खंडहर बनने लगे हैं। इन जर्जर भवनों में अब घास और झाड़ियां उगी हुई हैं। आंजभोज क्षेत्र के बीडीसी चेयरमैन रमेश तोमर, राजपुर पंचायत प्रधान केतकी शर्मा, निशीकांत मेहता, सुनीता शर्मा प्रधान डांडा, सुरेश शर्मा प्रधान नघेता, सुनील चौहान प्रधान बनौर, निर्मला तोमर प्रधान बढाना, दिनेश शर्मा, अर्जुन सिंह, जगदीश चौहान, अमरेश शर्मा, काकाराम शर्मा, चतर चौहान, बालक राम शर्मा आदि ने बताया कि राजपुर अस्पताल डेपुटेशन के सहारे चल रहा है। वर्तमान में यहां केवल एक बीएमओ ही तैनात है। एक अन्य चिकित्सक को भंगानी से डेपुटेशन पर यहां तैनात किया गया है। दो डॉक्टर, स्टाफ नर्स, एक फार्मासिस्ट सहित कई पद खाली चल रहे हैं। वर्तमान में कार्यरत बीएमओ को दो सीएचसी, नौ पीएचसी तथा 40 डिस्पेंसरियों का जिम्मा भी है। क्षेत्र की जनता ने जनमंच कार्यक्रम में भी यह मांग प्रमुखता से उठाई थी लेकिन, आश्वासन के अलावा कुछ नहीं मिला। हालत यह है कि यदि बीएमओ को किसी कार्यक्रम में इलाके से बाहर जाना पड़ता है तो यहां मरीजों को उपचार नहीं मिल पाता।
इन इलाकों की बीस हजार आबादी है निर्भर
भौगोलिक दृष्टि से सीएचसी राजपुर में डांडा-कंडेला, अंबोया, सालवाला, नघेता, बनौर, शिवा-सुनोग, किल्लौड़, बढ़ाना, खोदरी माजरी, भगानी, मानपुर देवड़ा, कुलथीना-शमयाला, टौरू भैला आदि पंचायतों की करीब 20 हजार आबादी को फायदा पहुंचता है। लेकिन, चिकित्सकों एवं स्टाफ की कमी के कारण यहां लोगों को पर्याप्त सुविधाएं नहीं मिल रहीं। लोग मजबूरन पांवटा या फिर हरियाणा के विकास नगर जाने को विवश हैं।
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क्या कहते हैं अधिकारी
खंड चिकित्सा अधिकारी उदय ठाकुर ने माना कि उनका क्षेत्र काफी बड़ा है। कई बार हमें स्वास्थ्य शिविर और दूसरे अस्पतालों के निरीक्षण के लिए भी जाना पड़ता है। तब अस्पताल में ओपीडी और दाखिल मरीजों के उपचार के लिए चिकित्सकों की कमी महसूस होती है। रिक्त पदों की पूर्ति के लिए सरकार और उच्च अधिकारियों को पत्राचार किया गया है।
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