{"_id":"5aa934bc4f1c1bb7758b559e","slug":"121521038524-sirmour-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"यहां उपचार के लिए मिलती है तारीख, भटक रहे मरीज-तीमारदार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
यहां उपचार के लिए मिलती है तारीख, भटक रहे मरीज-तीमारदार
Updated Wed, 14 Mar 2018 10:57 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हितेश शर्मा
नाहन (सिरमौर)। केंद्र और राज्य सरकार ने बजट में मरीजों की सुविधा के लिए चिकित्सा बीमा योजना का प्रावधान किया है लेकिन विडंबना है कि क्षेत्रीय अस्पताल नाहन में स्टाफ ही पूरा नहीं है। इनमें डॉक्टर और पैरा मेडिकल स्टाफ शामिल है। साथ ही अन्य सुविधाओं की भी भारी कमी चल रही है। ऐसे में मरीजों के इलाज की क्या कल्पना की जा सकती है।
क्षेत्रीय अस्पताल नाहन को मेडिकल कॉलेज का दर्जा भले ही मिल गया हो लेकिन हालात अभी नहीं सुधरे हैं। पहले पर्ची बनाने और फिर ओपीडी में घंटों बारी का इंतजार करने के बाद भी कई मरीजों का नंबर नहीं लग रहा। गर्भवती महिलाएं सबसे अधिक परेशान है। चिकित्सीय जांच के बाद भी गर्भवती महिलाओं का समय पर अल्ट्रासाउंड नहीं हो रहा है। गायनी ओपीडी में भी एक दिन में 3 दर्जन महिलाओं की जांच हो रही है। जबकि अल्ट्रासाउंड के लिए एक से दो सप्ताह बाद की डेट मिल रही है।
हालात यह है कि मेडिकल कॉलेज में सीटी स्कैन मशीन लंबे समय से खराब चल रही है। मशीन पर भारी भरकम खर्च करने के बाद भी मरीजों को इसकी सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। बताया जा रहा है कि मशीन आउट डेटिड हो चुकी है।
विज्ञापन
--
बॉक्स के लिए---
विशेषज्ञ चिकित्सक बढ़े, सेवाएं फिर भी नाममात्र
पिछले लंबे समय से विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी झेल रहे मेडिकल कॉलेज में मौजूदा समय में डाक्टर बढने लगे हैं। लेकिन, मरीजों को मिलने वाली सुविधाएं अभी भी ढर्रे पर नहीं आई हैं। स्री रोग विशेषज्ञों की संख्या पांच हो गई। चाइल्ड स्पेशलिस्ट की संख्या भी बढ़कर तीन हो गई है। वहीं कालेज में 4 रेडियोलाजिस्ट की तैनाती हो चुकी है। लेकिन, अल्ट्रासाउंड मशीन सिर्फ एक है।
--------
बाक्स के लिए...
डॉक्टरों और पैरा मेडिकल स्टाफ में भारी कमी
साइकोलॉजी विभाग में ट्यूटर के दो, बायोकेमेस्ट्री में एसोसिएट प्रोफेसर का एक, पैथालॉजी में एसोसिएट प्रोफेसर का एक, असिस्टेंट प्रोफेसर का एक, माइक्रोबायलॉजी में ट्यूटर का एक, जनरल मेडिसिन में एसोसिएट प्रोफेसर के दो, जूनियर रेजीडेंट के तीन, सर्जरी में सीनियर रेजीजेंट के दो, जूनियर रेजीडेंट के दो, प्रोफेसर का एक समेत कुछ अन्य विभागों भी कुछ एक पद खाली चल रहे हैं। सके अलावा मेडिकल कॉलेज में पैरा मेडिकल स्टाफ की जितनी तैनाती होनी चाहिए, अभी तक नहीं हो पाई है। कॉलेज में तीसरे बैच की तैयारी हो चुकी है लेकिन इसके मुकाबले फैकल्टी की भारी कमी बनी हुई है।
----------
समय पर नहीं होता उपचार
कॉलेज में अल्ट्रासाउंड व उपचार के लिए गर्भवती महिलाओं के साथ पहुंचे तीमारदार रजनी देवी, सुनीता शर्मा, लक्ष्मी व सुलोचना आदि ने बताया कि अल्ट्रासाउंड समय पर नहीं हो रहे हैं। गायनी ओपीडी में भी एक दिन में 30-40 महिलाओं की जांच होती है। जिला के दूरदराज से पैसा खर्च कर अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों को उसी दिन जांच व टेस्ट आदि की सुविधा नहीं मिल पा रही है।
----------
हो रहा सुधार
उधर, वरिष्ठ मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉ. केके पराशर ने बताया कि मेडिकल कॉलेज की व्यवस्थाओं में सुधार हो रहा है। कॉलेज में विशेषज्ञ डॉक्टर की संख्या बढ़ रही है। हां, यह जरूर है कि पैरा मेडिकल स्टाफ की कमी चल रही है। उन्होंने बताया कि अल्ट्रासाउंड मशीन एक है। वहीं सीटी स्कैन मशीन आउट डेटिड हो चुकी है।
विज्ञापन
नाहन (सिरमौर)। केंद्र और राज्य सरकार ने बजट में मरीजों की सुविधा के लिए चिकित्सा बीमा योजना का प्रावधान किया है लेकिन विडंबना है कि क्षेत्रीय अस्पताल नाहन में स्टाफ ही पूरा नहीं है। इनमें डॉक्टर और पैरा मेडिकल स्टाफ शामिल है। साथ ही अन्य सुविधाओं की भी भारी कमी चल रही है। ऐसे में मरीजों के इलाज की क्या कल्पना की जा सकती है।
क्षेत्रीय अस्पताल नाहन को मेडिकल कॉलेज का दर्जा भले ही मिल गया हो लेकिन हालात अभी नहीं सुधरे हैं। पहले पर्ची बनाने और फिर ओपीडी में घंटों बारी का इंतजार करने के बाद भी कई मरीजों का नंबर नहीं लग रहा। गर्भवती महिलाएं सबसे अधिक परेशान है। चिकित्सीय जांच के बाद भी गर्भवती महिलाओं का समय पर अल्ट्रासाउंड नहीं हो रहा है। गायनी ओपीडी में भी एक दिन में 3 दर्जन महिलाओं की जांच हो रही है। जबकि अल्ट्रासाउंड के लिए एक से दो सप्ताह बाद की डेट मिल रही है।
विज्ञापन
हालात यह है कि मेडिकल कॉलेज में सीटी स्कैन मशीन लंबे समय से खराब चल रही है। मशीन पर भारी भरकम खर्च करने के बाद भी मरीजों को इसकी सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। बताया जा रहा है कि मशीन आउट डेटिड हो चुकी है।
विज्ञापन
--
बॉक्स के लिए---
विशेषज्ञ चिकित्सक बढ़े, सेवाएं फिर भी नाममात्र
पिछले लंबे समय से विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी झेल रहे मेडिकल कॉलेज में मौजूदा समय में डाक्टर बढने लगे हैं। लेकिन, मरीजों को मिलने वाली सुविधाएं अभी भी ढर्रे पर नहीं आई हैं। स्री रोग विशेषज्ञों की संख्या पांच हो गई। चाइल्ड स्पेशलिस्ट की संख्या भी बढ़कर तीन हो गई है। वहीं कालेज में 4 रेडियोलाजिस्ट की तैनाती हो चुकी है। लेकिन, अल्ट्रासाउंड मशीन सिर्फ एक है।
--------
बाक्स के लिए...
डॉक्टरों और पैरा मेडिकल स्टाफ में भारी कमी
साइकोलॉजी विभाग में ट्यूटर के दो, बायोकेमेस्ट्री में एसोसिएट प्रोफेसर का एक, पैथालॉजी में एसोसिएट प्रोफेसर का एक, असिस्टेंट प्रोफेसर का एक, माइक्रोबायलॉजी में ट्यूटर का एक, जनरल मेडिसिन में एसोसिएट प्रोफेसर के दो, जूनियर रेजीडेंट के तीन, सर्जरी में सीनियर रेजीजेंट के दो, जूनियर रेजीडेंट के दो, प्रोफेसर का एक समेत कुछ अन्य विभागों भी कुछ एक पद खाली चल रहे हैं। सके अलावा मेडिकल कॉलेज में पैरा मेडिकल स्टाफ की जितनी तैनाती होनी चाहिए, अभी तक नहीं हो पाई है। कॉलेज में तीसरे बैच की तैयारी हो चुकी है लेकिन इसके मुकाबले फैकल्टी की भारी कमी बनी हुई है।
----------
समय पर नहीं होता उपचार
कॉलेज में अल्ट्रासाउंड व उपचार के लिए गर्भवती महिलाओं के साथ पहुंचे तीमारदार रजनी देवी, सुनीता शर्मा, लक्ष्मी व सुलोचना आदि ने बताया कि अल्ट्रासाउंड समय पर नहीं हो रहे हैं। गायनी ओपीडी में भी एक दिन में 30-40 महिलाओं की जांच होती है। जिला के दूरदराज से पैसा खर्च कर अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों को उसी दिन जांच व टेस्ट आदि की सुविधा नहीं मिल पा रही है।
----------
हो रहा सुधार
उधर, वरिष्ठ मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉ. केके पराशर ने बताया कि मेडिकल कॉलेज की व्यवस्थाओं में सुधार हो रहा है। कॉलेज में विशेषज्ञ डॉक्टर की संख्या बढ़ रही है। हां, यह जरूर है कि पैरा मेडिकल स्टाफ की कमी चल रही है। उन्होंने बताया कि अल्ट्रासाउंड मशीन एक है। वहीं सीटी स्कैन मशीन आउट डेटिड हो चुकी है।