{"_id":"5b9a9dee867a557ff5670112","slug":"11536859630-sirmour-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"मेरी जो हिंदी है चढ़ता सूरज है सिंदूरी बिंदी है.....","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मेरी जो हिंदी है चढ़ता सूरज है सिंदूरी बिंदी है.....
Updated Thu, 13 Sep 2018 11:06 PM IST
विज्ञापन
‘बाबाओं का झमेला, पकड़ा गया अकेला-अकेला’
राजभाषा पखवाड़े पर सराहां में कवि सम्मेलन आयोजित
कवियों ने अपनी-अपनी रचनाएं सुनाकर लूटी वाहवाही
अमर उजाला ब्यूरो
सराहां (सिरमौर)। भाषा एवं संस्कृति विभाग कार्यालय नाहन की ओर से राजभाषा पखवाड़ा के अवसर पर राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला सराहां में जिला स्तरीय कवि सम्मेलन का आयोजन किया। इसमें जिला भर से आए कवियों ने कविता पाठ किया। कार्यक्रम में सेवानिवृत्त प्राध्यापक एनडी शर्मा ने बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की। जबकि, अध्यक्षता विद्या नंद सरैक ने की। मंच संचालन दलीप वशिष्ठ ने किया। इस दौरान जिला भाषा अधिकारी अनिल हारटा, प्रधानाचार्य रोहित वर्मा, रणजी क्रिकेटर संग्राम सिंह विशेष रूप से उपस्थित रहे। सबसे पहले युवा कवि धनवीर परमार ने भारतीयों की देह में जब तक आत्मा जिंदा रहेगी..., कविता सुनाई। ममता ठाकुर ने बाबाओं का झमेला, पकड़ा गया अकेला-अकेला... सुनाकर खूब तालियां बटोरीं। वरिष्ठ कवि दीप चंद कौशल ने बालक को प्यारी लगे अपनी की बिंदी.., से समा बांधा। युवा कवि पंकज तन्हा ने शहर में शुरू नई दास्तां हो गई, सच बेजुबां हुआ, झूठ की जुबान हो गई.., रचना से उपस्थित श्रोताओं का मनोरंजन किया। गीता राम माहिया ने मेरे भारत को दरिंदों ने दो जख बना डाला.., से दाद बटोरी। माम राज शर्मा ने भारत का जन मन क्या सोचे उनकी बात बताता हूं.., कविता से खूब तालियां बटोरीं, जबकि शबनम शर्मा ने अंबर की खिड़की से झांकती हिंदी, टप-टप आंसू बहाने लगी.., कविता सुनाई। आचार्य ओम प्रकाश राही ने टिकट की खातिर हम तो पल्ला भी अपना झाड़ लेते हैं और एक तुम हो कि इसे बेरुखी से फाड़ लेते हैं.., से समा बांधा। दलीप वशिष्ठ ने मेरी जो हिंदी है चढ़ता सूरज है सिंदूरी बिंदी है.., से हिंदी के महत्व पर प्रकाश डाला। इसी प्रकार स्पर्श चौहान ने कोशिश कर हल निकलेगा, आज नहीं तो कल निकलेगा... से वाहवाही लूटी। अर्चना शर्मा ने जहां रोटी को न जद्दोजहद हो, एक ऐसा घर बनाना चाहती हूं..., गजल से समा बांध दिया। इस अवसर पर चिरानंद, डॉ. ईश्वर राही, हेतराम, नासिर युसुफजई, डॉ. ओम प्रकाश राही, शून्य विनोद, सावित्री, कनिका पांडे, नितिका शर्मा, प्रियंका, महक आदि ने भी कविता पाठ किया।
विज्ञापन
राजभाषा पखवाड़े पर सराहां में कवि सम्मेलन आयोजित
कवियों ने अपनी-अपनी रचनाएं सुनाकर लूटी वाहवाही
अमर उजाला ब्यूरो
सराहां (सिरमौर)। भाषा एवं संस्कृति विभाग कार्यालय नाहन की ओर से राजभाषा पखवाड़ा के अवसर पर राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला सराहां में जिला स्तरीय कवि सम्मेलन का आयोजन किया। इसमें जिला भर से आए कवियों ने कविता पाठ किया। कार्यक्रम में सेवानिवृत्त प्राध्यापक एनडी शर्मा ने बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की। जबकि, अध्यक्षता विद्या नंद सरैक ने की। मंच संचालन दलीप वशिष्ठ ने किया। इस दौरान जिला भाषा अधिकारी अनिल हारटा, प्रधानाचार्य रोहित वर्मा, रणजी क्रिकेटर संग्राम सिंह विशेष रूप से उपस्थित रहे। सबसे पहले युवा कवि धनवीर परमार ने भारतीयों की देह में जब तक आत्मा जिंदा रहेगी..., कविता सुनाई। ममता ठाकुर ने बाबाओं का झमेला, पकड़ा गया अकेला-अकेला... सुनाकर खूब तालियां बटोरीं। वरिष्ठ कवि दीप चंद कौशल ने बालक को प्यारी लगे अपनी की बिंदी.., से समा बांधा। युवा कवि पंकज तन्हा ने शहर में शुरू नई दास्तां हो गई, सच बेजुबां हुआ, झूठ की जुबान हो गई.., रचना से उपस्थित श्रोताओं का मनोरंजन किया। गीता राम माहिया ने मेरे भारत को दरिंदों ने दो जख बना डाला.., से दाद बटोरी। माम राज शर्मा ने भारत का जन मन क्या सोचे उनकी बात बताता हूं.., कविता से खूब तालियां बटोरीं, जबकि शबनम शर्मा ने अंबर की खिड़की से झांकती हिंदी, टप-टप आंसू बहाने लगी.., कविता सुनाई। आचार्य ओम प्रकाश राही ने टिकट की खातिर हम तो पल्ला भी अपना झाड़ लेते हैं और एक तुम हो कि इसे बेरुखी से फाड़ लेते हैं.., से समा बांधा। दलीप वशिष्ठ ने मेरी जो हिंदी है चढ़ता सूरज है सिंदूरी बिंदी है.., से हिंदी के महत्व पर प्रकाश डाला। इसी प्रकार स्पर्श चौहान ने कोशिश कर हल निकलेगा, आज नहीं तो कल निकलेगा... से वाहवाही लूटी। अर्चना शर्मा ने जहां रोटी को न जद्दोजहद हो, एक ऐसा घर बनाना चाहती हूं..., गजल से समा बांध दिया। इस अवसर पर चिरानंद, डॉ. ईश्वर राही, हेतराम, नासिर युसुफजई, डॉ. ओम प्रकाश राही, शून्य विनोद, सावित्री, कनिका पांडे, नितिका शर्मा, प्रियंका, महक आदि ने भी कविता पाठ किया।