{"_id":"5aabd0494f1c1bb8758b5d0b","slug":"11521209417-sirmour-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"मानदेय न मिलने पर पंचायत फेसिलिटेटर्स पहुंचे डीसी के दरबार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मानदेय न मिलने पर पंचायत फेसिलिटेटर्स पहुंचे डीसी के दरबार
Updated Fri, 16 Mar 2018 11:05 PM IST
विज्ञापन
2000 rupees
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अमर उजाला ब्यूरो
नाहन (सिरमौर)।
पिछले चार माह से मानदेय न दिए जाने के मामले में पंचायत फेसिलिटेटर्स का एक प्रतिनिधिमंडल उपायुक्त सिरमौर से मिला। इस मौके पर पंचायत फेसिलिटेटर्स ने एनजीओ के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
फेसिलिटेटर्स ने उपायुक्त को ज्ञापन भी सौंपा। ज्ञापन में कहा गया है कि केंद्र सरकार की योजना का कार्य एक एनजीओ के माध्यम से लिया जा रहा है। आईआईआरडी शिमला के माध्यम से चल रही एनजीओ मिशन रिवा ने आज तक उन्हें मानदेय का भुगतान नहीं किया है। आरोप है कि एनजीओ फेसिलिटेटर्स पर बेवजह अपना दबाव बनाने का काम कर रही है। हर पंचायत में तैनात 2-2 फेसिलिटेटर्स से काम लिया जा रहा है।
पंचायत फेसिलिटेटर्स कुलदीप सिंह, संतोष कुमार, अजय सिंह, रजनी चौहान, अतर चौहान, विपिन कुमार, ललित सिंह, इमरान कादरी, स्वाति, करिश्मा व मेंहदी शर्मा आदि ने बताया कि जुलाई 2017 में ऑनलाइन पोर्टल के द्वारा बेरोजगार युवक-युवतियों के मिशन रिवा एनजीओ ने आवेदन आमंत्रित किए थे। एनजीओ ने अपनी मर्जी के अनुसार हर प्रार्थी से 200, 500 व 600 रुपये का शुल्क वसूला गया। प्रदेश भर से हजारों युवाओं ने आवेदन किया। करीब 6000 पंचायत फेसिलिटेटर्स की नियुक्ति लिखित प्रतियोगिता परीक्षा के माध्यम से की गई।
विज्ञापन
नियुक्ति के समय कहा गया था कि 3 माह तक प्रशिक्षण के दौरान 7 हजार और बाद में 10 हजार मानदेय प्रदान किया जाएगा लेकिन पिछले चार माह से कोई मानदेय नहीं मिल पाया है। तीन माह की ट्रेनिंग भी तीन दिन में ही खत्म की गई। फेसिलिटेटर्स पर एनजीओ की तरफ से मेंबरशिप का भी दबाव बनाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि पांवटा ब्लॉक में 128 पंचायत फेसिलिटेटर्स काम कर रहे हैं। जबकि, प्रदेश में यह संख्या हजारों में है। अभी तक एनजीओ न तो मानदेय दे पाई है, उल्टा फेसिलिटेटर्स पर अपनी शर्तें थोपी जा रही हैं।
प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि एनजीओ के ज्वाइनिंग लेटर व आफर लेटर के अनुसार कोई भी कार्य नहीं हो रहा है। लिहाजा, फेसिलिटेटर्स को आर्थिक तंगी झेलनी पड़ रही है। उन्होंने डीसी सिरमौर से एनजीओ पर सख्त कार्रवाई की गुहार लगाई।
विज्ञापन
नाहन (सिरमौर)।
पिछले चार माह से मानदेय न दिए जाने के मामले में पंचायत फेसिलिटेटर्स का एक प्रतिनिधिमंडल उपायुक्त सिरमौर से मिला। इस मौके पर पंचायत फेसिलिटेटर्स ने एनजीओ के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
फेसिलिटेटर्स ने उपायुक्त को ज्ञापन भी सौंपा। ज्ञापन में कहा गया है कि केंद्र सरकार की योजना का कार्य एक एनजीओ के माध्यम से लिया जा रहा है। आईआईआरडी शिमला के माध्यम से चल रही एनजीओ मिशन रिवा ने आज तक उन्हें मानदेय का भुगतान नहीं किया है। आरोप है कि एनजीओ फेसिलिटेटर्स पर बेवजह अपना दबाव बनाने का काम कर रही है। हर पंचायत में तैनात 2-2 फेसिलिटेटर्स से काम लिया जा रहा है।
विज्ञापन
पंचायत फेसिलिटेटर्स कुलदीप सिंह, संतोष कुमार, अजय सिंह, रजनी चौहान, अतर चौहान, विपिन कुमार, ललित सिंह, इमरान कादरी, स्वाति, करिश्मा व मेंहदी शर्मा आदि ने बताया कि जुलाई 2017 में ऑनलाइन पोर्टल के द्वारा बेरोजगार युवक-युवतियों के मिशन रिवा एनजीओ ने आवेदन आमंत्रित किए थे। एनजीओ ने अपनी मर्जी के अनुसार हर प्रार्थी से 200, 500 व 600 रुपये का शुल्क वसूला गया। प्रदेश भर से हजारों युवाओं ने आवेदन किया। करीब 6000 पंचायत फेसिलिटेटर्स की नियुक्ति लिखित प्रतियोगिता परीक्षा के माध्यम से की गई।
विज्ञापन
नियुक्ति के समय कहा गया था कि 3 माह तक प्रशिक्षण के दौरान 7 हजार और बाद में 10 हजार मानदेय प्रदान किया जाएगा लेकिन पिछले चार माह से कोई मानदेय नहीं मिल पाया है। तीन माह की ट्रेनिंग भी तीन दिन में ही खत्म की गई। फेसिलिटेटर्स पर एनजीओ की तरफ से मेंबरशिप का भी दबाव बनाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि पांवटा ब्लॉक में 128 पंचायत फेसिलिटेटर्स काम कर रहे हैं। जबकि, प्रदेश में यह संख्या हजारों में है। अभी तक एनजीओ न तो मानदेय दे पाई है, उल्टा फेसिलिटेटर्स पर अपनी शर्तें थोपी जा रही हैं।
प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि एनजीओ के ज्वाइनिंग लेटर व आफर लेटर के अनुसार कोई भी कार्य नहीं हो रहा है। लिहाजा, फेसिलिटेटर्स को आर्थिक तंगी झेलनी पड़ रही है। उन्होंने डीसी सिरमौर से एनजीओ पर सख्त कार्रवाई की गुहार लगाई।