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रेणुका मेले में लोगों को खींच रही जलेबी की मिठास
Updated Thu, 22 Nov 2018 10:29 PM IST
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रेणुका मेले में लोगों को खींच रही जलेबी की मिठास
250 से 400 क्विंटल हो रहा है जलेबी का कारोबार
अमर उजाला ब्यूरो
ददाहू (सिरमौर)। अंतरराष्ट्रीय रेणुका मेले का बाजार इन दिनों जलेबी की मिठास और सुगंध से महक रहा है। रेणुका मेला जहां अपनी धार्मिक पराकाष्ठा और पौराणिक पहचान रखता है वहीं इस मेले का व्यापारिक महत्व भी है। ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को इस मेले में जमकर खरीदारी करने का अवसर मिलता है। ग्रामीण परिवेश में मनाए जाने वाले इस मेले में आज भी कुछ परिवार ऐसे हैं जो साल भर में केवल इस मेले के दौरान ही अपनी खरीदारी करते हैं। मेले के दौरान बर्तन और गर्म वस्तुओं की जमकर बिक्री होती है। यही नहीं, रेणुका मेले की जलेबी का स्वाद लोगों को मेले की ओर खींच लाता है। यहां जलेबी खाना और खिलाना भी विशेष मायने रखता है। रेणुका मेले में जलेबी को ममता भरे मिलन की मिठाई माना जाता है। यहां सर्वाधिक कारोबार जलेबी का ही होता है। मेले में लगाई गई अधिकतर दुकानें हलवाई की ही होती हैं। कुछ हलवाई पारंपरिक तौर पर भी जलेबी की दुकानों को पिछले कई दशकों से लगातार लगाते आ रहे हैं। एक अनुमान के मुताबिक रेणुका मेले में 250 से 400 क्विंटल के करीब जलेबी का कारोबार होता है। एक परिवार दो से ढाई किलो के बीच जलेबी खरीदकर सामूहिक रूप से खाता है। हालांकि, इन दिनों मेले में जलेबी सौ रुपये प्रति किलो बिक रही है। जबकि इससे पूर्व मेले में सबसे सस्ता जलेबी को ही माना जाता था। मेले से लौटते वक्त लोग जलेबी को घर ले जाना अति शुभ मानते हैं।
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250 से 400 क्विंटल हो रहा है जलेबी का कारोबार
अमर उजाला ब्यूरो
ददाहू (सिरमौर)। अंतरराष्ट्रीय रेणुका मेले का बाजार इन दिनों जलेबी की मिठास और सुगंध से महक रहा है। रेणुका मेला जहां अपनी धार्मिक पराकाष्ठा और पौराणिक पहचान रखता है वहीं इस मेले का व्यापारिक महत्व भी है। ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को इस मेले में जमकर खरीदारी करने का अवसर मिलता है। ग्रामीण परिवेश में मनाए जाने वाले इस मेले में आज भी कुछ परिवार ऐसे हैं जो साल भर में केवल इस मेले के दौरान ही अपनी खरीदारी करते हैं। मेले के दौरान बर्तन और गर्म वस्तुओं की जमकर बिक्री होती है। यही नहीं, रेणुका मेले की जलेबी का स्वाद लोगों को मेले की ओर खींच लाता है। यहां जलेबी खाना और खिलाना भी विशेष मायने रखता है। रेणुका मेले में जलेबी को ममता भरे मिलन की मिठाई माना जाता है। यहां सर्वाधिक कारोबार जलेबी का ही होता है। मेले में लगाई गई अधिकतर दुकानें हलवाई की ही होती हैं। कुछ हलवाई पारंपरिक तौर पर भी जलेबी की दुकानों को पिछले कई दशकों से लगातार लगाते आ रहे हैं। एक अनुमान के मुताबिक रेणुका मेले में 250 से 400 क्विंटल के करीब जलेबी का कारोबार होता है। एक परिवार दो से ढाई किलो के बीच जलेबी खरीदकर सामूहिक रूप से खाता है। हालांकि, इन दिनों मेले में जलेबी सौ रुपये प्रति किलो बिक रही है। जबकि इससे पूर्व मेले में सबसे सस्ता जलेबी को ही माना जाता था। मेले से लौटते वक्त लोग जलेबी को घर ले जाना अति शुभ मानते हैं।