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गढ़ीवाला में घासवाली झोंपड़ी में जल रही शिक्षा की लौ
Updated Thu, 04 Jan 2018 10:46 PM IST
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नाहन (सिरमौर)।
गुणवत्तायुक्त एवं आधुनिक शिक्षा देने के भले ही सरकारें लाखों दावे कर लें, मगर धरातल पर इसकी सच्चाई कुछ और ही बयां कर रही है। अभी भी कई स्कूल ऐसे मिल जाएंगे जहां स्कूल तो खोले गए लेकिन भवन नसीब नहीं हुए।
जनपद सिरमौर में ऐसा ही एक स्कूल पिछले पांच साल से छत की इंतजार कर रहा है। स्कूल में पठन-पाठन के लिए दूसरी सुविधाएं जुटाना तो दूर की बात। चारों तरफ से घने जंगल एवं टेढ़े मेड़े रास्ते के बीच यह स्कूल छप्पर (झोंपड़ी) में चल रहा है।
बात हो रही है प्राथमिक पाठशाला गढ़ीवाला की। माजरा शिक्षा खंड के तहत आने वाली इस पाठशाला में घासफूस के छप्परों में बच्चों का भविष्य कैद है। कभी एक छप्पर में पढ़ाई का कार्य चलता है तो कुछ समय बाद ऐसे ही दूसरे छप्पर का इंतजाम कर दिया जाता है। गर्मी, बरसात व सर्दी तीनों मौसमों में बच्चे कभी गर्मी से झुलसते हैं तो कभी सर्दी की मार भारी पड़ती है। वहीं बरसात में भी इनकी मुश्किलें कम नहीं हैं।
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स्कूल में अध्ययनरत 17 बच्चों के साथ शिक्षक भी विपरीत मौसमों की मार झेल रहे हैं। ऐसे में उनका भविष्य संवारने के सारे दावे भी बेमानी साबित हो रहे हैं। घासफूस के झोंपड़े में आधुनिक शिक्षा जैसी बातें भी किसी काल्पनिकता से कम नहीं हैं। झोंपड़ों में पढ़ाई के साथ-साथ मिड-डे-मील भी बन रहा है। हालांकि, यह रिमोट स्कूल है लेकिन पिछले पांच साल से यह स्कूल एक ही स्थान पर चल रहा है। ग्रामीण व शहरी इलाकों की तर्ज पर भवन नसीब होने का सपना ग्रामीण लंबे समय से देख रहे हैं। इस स्कूल के बच्चों की संख्या इन माइनों में भी बड़ी है क्योंकि ग्रामीण क्षेत्रों के अच्छे भवनों वाले कई स्कूलों में भी छात्रों की संख्या इतनी नहीं हैं। इस स्कूल में दो नियमित जेबीटी शिक्षिकाएं सेवाएं दे रही हैं।
बाक्स--
पहली बार स्कूल पहुंचे शिक्षा उपनिदेशक
गढ़ीवाला स्कूल का पहली बार ही किसी अधिकारी ने दौरा किया। इससे पहले कोई भी अधिकारी इस स्कूल तक नहीं पहुंचा। शिक्षा उपनिदेशक प्रारंभिक दिलीप सिंह नेगी पाठशाला पहुंचे तो अभिभावकों ने उनसे मुलाकात की और स्कूल की समस्याओं को उजागर किया। इस दौरान अधिकारी ने अभिभावकों को भी मोटिवेट किया और हर सुविधा देने का आश्वासन भी दिया।
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पांच साल से चल रहा स्कूल--
गढ़ीवाला स्कूल पिछले पांच साल से चल रहा है। यह स्कूल एक छप्पर रूपी झोंपड़े में चल रहा है। स्कूल में गुर्जर समुदाय के लोगों के बच्चे पढ़ रहे हैं। जल्द ही इस दिशा में बजट का प्रावधान किया जाएगा। ग्रामीणों का कहना है कि कोई भी अधिकारी इस स्कूल में नहीं पहुंचा था।
-दिलीप सिंह नेगी, उपनिदेशक, प्रारंभिक शिक्षा।
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गुणवत्तायुक्त एवं आधुनिक शिक्षा देने के भले ही सरकारें लाखों दावे कर लें, मगर धरातल पर इसकी सच्चाई कुछ और ही बयां कर रही है। अभी भी कई स्कूल ऐसे मिल जाएंगे जहां स्कूल तो खोले गए लेकिन भवन नसीब नहीं हुए।
जनपद सिरमौर में ऐसा ही एक स्कूल पिछले पांच साल से छत की इंतजार कर रहा है। स्कूल में पठन-पाठन के लिए दूसरी सुविधाएं जुटाना तो दूर की बात। चारों तरफ से घने जंगल एवं टेढ़े मेड़े रास्ते के बीच यह स्कूल छप्पर (झोंपड़ी) में चल रहा है।
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बात हो रही है प्राथमिक पाठशाला गढ़ीवाला की। माजरा शिक्षा खंड के तहत आने वाली इस पाठशाला में घासफूस के छप्परों में बच्चों का भविष्य कैद है। कभी एक छप्पर में पढ़ाई का कार्य चलता है तो कुछ समय बाद ऐसे ही दूसरे छप्पर का इंतजाम कर दिया जाता है। गर्मी, बरसात व सर्दी तीनों मौसमों में बच्चे कभी गर्मी से झुलसते हैं तो कभी सर्दी की मार भारी पड़ती है। वहीं बरसात में भी इनकी मुश्किलें कम नहीं हैं।
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स्कूल में अध्ययनरत 17 बच्चों के साथ शिक्षक भी विपरीत मौसमों की मार झेल रहे हैं। ऐसे में उनका भविष्य संवारने के सारे दावे भी बेमानी साबित हो रहे हैं। घासफूस के झोंपड़े में आधुनिक शिक्षा जैसी बातें भी किसी काल्पनिकता से कम नहीं हैं। झोंपड़ों में पढ़ाई के साथ-साथ मिड-डे-मील भी बन रहा है। हालांकि, यह रिमोट स्कूल है लेकिन पिछले पांच साल से यह स्कूल एक ही स्थान पर चल रहा है। ग्रामीण व शहरी इलाकों की तर्ज पर भवन नसीब होने का सपना ग्रामीण लंबे समय से देख रहे हैं। इस स्कूल के बच्चों की संख्या इन माइनों में भी बड़ी है क्योंकि ग्रामीण क्षेत्रों के अच्छे भवनों वाले कई स्कूलों में भी छात्रों की संख्या इतनी नहीं हैं। इस स्कूल में दो नियमित जेबीटी शिक्षिकाएं सेवाएं दे रही हैं।
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पहली बार स्कूल पहुंचे शिक्षा उपनिदेशक
गढ़ीवाला स्कूल का पहली बार ही किसी अधिकारी ने दौरा किया। इससे पहले कोई भी अधिकारी इस स्कूल तक नहीं पहुंचा। शिक्षा उपनिदेशक प्रारंभिक दिलीप सिंह नेगी पाठशाला पहुंचे तो अभिभावकों ने उनसे मुलाकात की और स्कूल की समस्याओं को उजागर किया। इस दौरान अधिकारी ने अभिभावकों को भी मोटिवेट किया और हर सुविधा देने का आश्वासन भी दिया।
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पांच साल से चल रहा स्कूल--
गढ़ीवाला स्कूल पिछले पांच साल से चल रहा है। यह स्कूल एक छप्पर रूपी झोंपड़े में चल रहा है। स्कूल में गुर्जर समुदाय के लोगों के बच्चे पढ़ रहे हैं। जल्द ही इस दिशा में बजट का प्रावधान किया जाएगा। ग्रामीणों का कहना है कि कोई भी अधिकारी इस स्कूल में नहीं पहुंचा था।
-दिलीप सिंह नेगी, उपनिदेशक, प्रारंभिक शिक्षा।