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सूखे का कहर : सिरमौर में लटकी गेहूं की बिजाई
Updated Sun, 10 Dec 2017 10:41 PM IST
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गरुड़ के छटिया गांव में पावर टिलर से खेत जोतता एक कृषक।
- फोटो : amar ujala
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अमर उजाला ब्यूरो
नाहन (सिरमौर)।
जिला सिरमौर में बारिश न होने से किसानों में हाहाकार मच गया है। दिसंबर माह का दूसरा सप्ताह शुरू हो चुका है लेकिन बारिश नहीं हो रही। इससे किसान गेहूं की बिजाई नहीं कर पा रहे। जिन किसानों ने बिजाई की है वहां फसल या तो मुर्झाने लगी है या फिर नमी की कमी के कारण बीज अंकुरित ही नहीं हो पा रहे। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यदि दो-चार रोज के भीतर बारिश न हुई तो इस सीजन की फसल प्रभावित हो सकती है।
गौरतलब है कि किसान 15 नवंबर तक क्षेत्र में गेहूं की बिजाई कर लेते थे लेकिन दिसंबर माह का दूसरा सप्ताह शुरू होने के बावजूद गेहूं की बिजाई पूरी नहीं हो पाई है। अधिकांश क्षेत्रों में बिजाई शुरू भी नहीं हो पाई। वहीं सरसों, तिलहन और दूसरी फसलों पर भी बारिश न होने का असर दिखने लगा है। जिला में पिछले करीब 3 महीने से बारिश नहीं हुई है। अधिकतर इलाके के किसान बारिश का इंतजार कर रहे हैं। केवल सिंचित भूमि वाले किसान ही खेतों में गेहूं की बुआई कर रहे हैं लेकिन बारिश पर निर्भर रहने वाले अधिकतर किसान बारिश के लिए आसमान की ओर टकटकी लगाए हुए हैं।
उधर, कृषि उपनिदेशक विद्यासागर ने बताया कि 15 दिसंबर तक बारिश नहीं हुई तो गेेहूं का उत्पादन प्रभावित हो सकता है। इस समय बारिश की नितांत आवश्यकता है।
बॉक्स के लिए---
80 फीसदी इलाके में नहीं सिंचाई सुविघा
गिरिपार क्षेत्र के संगड़ाह, पच्छाद, राजगढ़, कमरऊ, बडवास, दुगाना, शिल्ला, मस्तभोज, जेलभोज व शिलाई क्षेत्र के अनेकों गांवों समेत जिले के 80 फीसदी क्षेत्र की कृषि बारिश पर निर्भर है। वर्षा न होने के कारण गेहूं, जौ व अन्य फसलों की बिजाई का कार्य रुका पड़ा है। बिजाई का समय जैसे-जैसे निकला जा रहा है वैसे-वैसे किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें भी गहरी होती जा रही है।
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क्षेत्र के राजीव, सतपाल मान, रमेश शर्मा, सुरेंद्र सिंह, किशोरी लाल, प्रभुदयाल, आकाश वर्मा आदि किसानों ने बताया कि वह सभी मौसमी वर्षा पर निर्भर हैं। बारिश न होने के कारण वह गेहूं की बिजाई नहीं कर पा रहे हैं। उन्होंने बताया कि यदि दो चार रोज के भीतर बारिश नहीं हुई तो वह गेहूं नहीं बीज पाएंगे।
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नाहन (सिरमौर)।
जिला सिरमौर में बारिश न होने से किसानों में हाहाकार मच गया है। दिसंबर माह का दूसरा सप्ताह शुरू हो चुका है लेकिन बारिश नहीं हो रही। इससे किसान गेहूं की बिजाई नहीं कर पा रहे। जिन किसानों ने बिजाई की है वहां फसल या तो मुर्झाने लगी है या फिर नमी की कमी के कारण बीज अंकुरित ही नहीं हो पा रहे। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यदि दो-चार रोज के भीतर बारिश न हुई तो इस सीजन की फसल प्रभावित हो सकती है।
गौरतलब है कि किसान 15 नवंबर तक क्षेत्र में गेहूं की बिजाई कर लेते थे लेकिन दिसंबर माह का दूसरा सप्ताह शुरू होने के बावजूद गेहूं की बिजाई पूरी नहीं हो पाई है। अधिकांश क्षेत्रों में बिजाई शुरू भी नहीं हो पाई। वहीं सरसों, तिलहन और दूसरी फसलों पर भी बारिश न होने का असर दिखने लगा है। जिला में पिछले करीब 3 महीने से बारिश नहीं हुई है। अधिकतर इलाके के किसान बारिश का इंतजार कर रहे हैं। केवल सिंचित भूमि वाले किसान ही खेतों में गेहूं की बुआई कर रहे हैं लेकिन बारिश पर निर्भर रहने वाले अधिकतर किसान बारिश के लिए आसमान की ओर टकटकी लगाए हुए हैं।
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उधर, कृषि उपनिदेशक विद्यासागर ने बताया कि 15 दिसंबर तक बारिश नहीं हुई तो गेेहूं का उत्पादन प्रभावित हो सकता है। इस समय बारिश की नितांत आवश्यकता है।
बॉक्स के लिए---
80 फीसदी इलाके में नहीं सिंचाई सुविघा
गिरिपार क्षेत्र के संगड़ाह, पच्छाद, राजगढ़, कमरऊ, बडवास, दुगाना, शिल्ला, मस्तभोज, जेलभोज व शिलाई क्षेत्र के अनेकों गांवों समेत जिले के 80 फीसदी क्षेत्र की कृषि बारिश पर निर्भर है। वर्षा न होने के कारण गेहूं, जौ व अन्य फसलों की बिजाई का कार्य रुका पड़ा है। बिजाई का समय जैसे-जैसे निकला जा रहा है वैसे-वैसे किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें भी गहरी होती जा रही है।
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क्षेत्र के राजीव, सतपाल मान, रमेश शर्मा, सुरेंद्र सिंह, किशोरी लाल, प्रभुदयाल, आकाश वर्मा आदि किसानों ने बताया कि वह सभी मौसमी वर्षा पर निर्भर हैं। बारिश न होने के कारण वह गेहूं की बिजाई नहीं कर पा रहे हैं। उन्होंने बताया कि यदि दो चार रोज के भीतर बारिश नहीं हुई तो वह गेहूं नहीं बीज पाएंगे।