Shimla: आत्महत्या मामलों में रोकथाम के लिए किए इंतजामों पर विवि-कॉलेजों से शिक्षा निदेशक ने मांगी रिपोर्ट
सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों, सरकारी, निजी और सहायता प्राप्त कॉलेजों समेत सभी उच्च शिक्षण संस्थानों से विद्यार्थियों की सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े इंतजामों का पूरा ब्योरा मांगा गया है।
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विद्यार्थी आत्महत्या के मामलों पर सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों, सरकारी, निजी और सहायता प्राप्त कॉलेजों समेत सभी उच्च शिक्षण संस्थानों से विद्यार्थियों की सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े इंतजामों का पूरा ब्योरा मांगा गया है। उच्च शिक्षा निदेशालय ने सभी संस्थानों को तीन दिन के भीतर निर्धारित प्रारूप में अनुपालन रिपोर्ट भेजने के निर्देश दिए हैं। संस्थानों को 22 बिंदुओं वाले प्रारूप में जानकारी देनी होगी। इसमें एंटी रैगिंग समिति और स्कवॉयड, आंतरिक शिकायत समिति, छात्र शिकायत निवारण समिति के गठन, बैठकों, शिकायतों और उनकी कार्यप्रणाली भी शामिल है। शिक्षकों, गैर-शिक्षण कर्मचारियों, कुलपति, रजिस्ट्रार और अन्य प्रमुख प्रशासनिक पदों की रिक्तियों और उन्हें भरने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी भी देनी होगी।
आवासीय संस्थानों को 24 घंटे योग्य चिकित्सा सुविधा और मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ की उपलब्धता भी बतानी होगी। संस्थानों को यह भी बताना होगा कि दिव्यांग और ट्रांसजेंडर विद्यार्थियों के लिए रैंप, सुलभ शौचालय, छात्रावास, सहायक तकनीक और परीक्षा में जरूरी सुविधाएं उपलब्ध हैं या नहीं। शिक्षकों और कर्मचारियों को छात्र तनाव की पहचान के लिए प्रशिक्षण देने की जानकारी भी देनी होगी। उच्च शिक्षा निदेशक सुनीता सिंह ने स्पष्ट किया है कि अनुपालन नहीं होने पर संबंधित संस्थान प्रमुख की व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय होगी। निदेशालय ने स्पष्ट किया है कि सभी संस्थानों से मिली जानकारी एकत्र कर सुप्रीम कोर्ट में समेकित अनुपालन रिपोर्ट पेश की जाएगी।
हर छात्र आत्महत्या और अस्वाभाविक मौत की पुलिस को देनी होगी सूचना
सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया है कि किसी भी छात्र की आत्महत्या या अस्वाभाविक मौत की जानकारी मिलते ही संस्थान को तुरंत पुलिस को सूचित करना होगा। हॉस्टल, पीजी, किराये के मकान या परिसर से बाहर हुई घटनाएं भी इसमें शामिल होंगी। सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षकों, गैर-शिक्षण कर्मचारियों, कुलपति, रजिस्ट्रार और अन्य प्रमुख पदों की रिक्तियां चार माह के भीतर भरने को कहा है। आरक्षित वर्ग के खाली पदों को प्राथमिकता देने के निर्देश भी दिए हैं। लंबित छात्रवृत्तियां भी चार माह में जारी करनी होंगी।