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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Shimla Petition of woman accused in child death case rejected 12-year-old child had committed suicide

Shimla Casteism Case: 12 वर्षीय बच्चे की मौत मामले में आरोपी महिला की याचिका खारिज, जातिवाद के लगे थे आरोप

Fri, 14 Nov 2025 09:56 PM IST
अंकेश डोगरा संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।
संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला। Published by: अंकेश डोगरा Updated Fri, 14 Nov 2025 09:56 PM IST
सार

हिमाचल प्रदेश के जिला शिमला में 20 सितंबर 2025 को चिड़गांव थाना क्षेत्र के तहत एक नाबालिग बच्चे ने आत्महत्या कर ली थी। बच्चे की मां ने आरोप लगाया कि पुष्पा देवी ने बच्चे को गुस्से में आकर गोशाला में बंद कर दिया और फिर उसे बाहर निकालने के लिए बकरा देने की मांग की। पढ़ें पूरा मामला...

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Shimla Petition of woman accused in child death case rejected 12-year-old child had committed suicide
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

विस्तार

शिमला जिले के चिड़गांव क्षेत्र में एक नाबालिग बच्चे की आत्महत्या के मामले में आरोपी पुष्पा देवी की जमानत याचिका को विशेष अदालत ने खारिज कर दिया। अदालत ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपी को जमानत देने से मना कर दिया।

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पुष्पा देवी पर यह आरोप है कि उसने बच्चे को बंधक बना लिया और उसे अपनी दुकान से कुछ सामान चुराने के आरोप में सजा दी। इसके बाद आरोपी ने कथित तौर पर बच्चे का मानसिक उत्पीड़न किया। इससे वह डिप्रेशन में आकर आत्महत्या करने पर मजबूर हो गया। यह मामला 20 सितंबर 2025 को चिड़गांव थाना क्षेत्र का है। मामला और भी जटिल हो गया है जब बच्चे की मां ने आरोप लगाया कि पुष्पा देवी ने बच्चे को गुस्से में आकर गोशाला में बंद कर दिया और फिर उसे बाहर निकालने के लिए बकरा देने की मांग की। इसके बाद बच्चे ने डर और उत्पीड़न के कारण जहरीला पदार्थ खा लिया तथा अस्पताल में उसकी मृत्यु हो गई। यह मामला और भी संवेदनशील हो गया है कि इसमें जातिवाद का एंगल भी जुड़ा है।
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आरोप है कि पुष्पा देवी ने बच्चे के जाति के आधार पर उसे अपमानित किया जिसके कारण इस मामले में एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत आरोप लगाए हैं। अदालत में पेश किए गए साक्ष्यों में कॉल डिटेल रिकॉर्ड्स, वीडियो साक्षात्कार और फोरेंसिक रिपोर्ट्स ने पुष्पा देवी के खिलाफ मामले को मजबूत किया। इसके अलावा जमानत याचिका खारिज करने के पीछे यह भी तर्क था कि आरोपी के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य मौजूद हैं और जमानत मिलने से वह साक्ष्य को प्रभावित कर सकती हैं।

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