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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Shimla: High Court takes a strict view on the allotment of housing to journalists on the same lines as officia

शिमला: अधिकारियों की तर्ज पर पत्रकारों को आवास आवंटन पर हाईकोर्ट सख्त, सरकार को हलफनामा दायर करने के निर्देश

Thu, 17 Sep 2026 10:04 PM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।
संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Thu, 17 Sep 2026 10:04 PM IST
सार

 हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य में सरकारी आवासों के नियमों के विरुद्ध आवंटन और अवैध कब्जों को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए पूर्व मुख्य संसदीय सचिवों को दिए गए विशेष लाभ और सरकारी अधिकारियों की तर्ज पर पत्रकारों को बांटे गए मकानों पर सवाल उठाए हैं। 

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Shimla: High Court takes a strict view on the allotment of housing to journalists on the same lines as officia
हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

अफसरों की तर्ज पर पत्रकारों को आवास आवंटन पर हाईकोर्ट सख्त हो गया है और पूछा है कि उन्हें किस टाइप के मकान दिए गए हैं। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य में सरकारी आवासों के नियमों के विरुद्ध आवंटन और अवैध कब्जों को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए पूर्व मुख्य संसदीय सचिवों को दिए गए विशेष लाभ और सरकारी अधिकारियों की तर्ज पर पत्रकारों को बांटे गए मकानों पर सवाल उठाए हैं। इसी बीच अदालत को सूचित किया गया कि राज्य में अन्य सरकारी अधिकारियों की तर्ज पर बड़ी संख्या में सरकारी आवासों पर पत्रकारों का कब्जा है।

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इस पर संज्ञान लेते हुए मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश जिया लाल भारद्वाज की खंडपीठ ने राज्य सरकार को एक और नया हलफनामा दायर करने के निर्देश दिए हैं। सरकार को अब यह स्पष्ट करना होगा कि पत्रकारों की ओर से कुल कितने सरकारी आवास घेरे हैं। उन्हें किस कानून या प्रावधान में ये आवास आवंटित किए गए। इन आवंटनों की तारीखें क्या हैं और उन्हें किस श्रेणी (टाइप) के मकान दिए गए हैं। हाईकोर्ट ने सरकार के ढुलमुल रवैये और हलफनामा न सौंपने पर नाराजगी जताते हुए मामले की अगली सुनवाई 28 अक्तूबर तय की है। तब तक राज्य सरकार को पूर्व सीपीएस और पत्रकारों, दोनों ही मामलों में विस्तृत ब्योरा अदालत के समक्ष पेश करना होगा।
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5 अगस्त 2026 को हुई सुनवाई के दौरान यह बात सामने आई थी कि राज्य सरकार ने हिमाचल प्रदेश सरकारी आवास आवंटन (सामान्य पूल) नियम 1994 के नियम 24 के तहत अपनी शक्तियों का इस्तेमाल कर छह पूर्व मुख्य संसदीय सचिवों के रहने को नियमित कर दिया था। इसके लिए संबंधित व्यक्तियों की ओर से कोई आवेदन भी नहीं किया गया था।कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा था कि यदि हाईकोर्ट ने इस मामले में नोटिस जारी न किया होता, तो राज्य सरकार इस पूरे मामले को कालीन के नीचे दबा देती।
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इस पर मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने मुख्य सचिव से हलफनामा मांगा था कि पूर्व में ऐसे कितने कर्मचारियों को विशेष अनुमति दी गई है और इन छह लोगों को बिना आवेदन के यह विशेष लाभ क्यों दिया जा रहा है। कोर्ट ने यह भी पूछा था कि क्या यह शक्तियों का मनमाना इस्तेमाल नहीं है। राज्य सरकार पिछली सुनवाई के आदेश के बावजूद अपना हलफनामा दायर करने में विफल रही।

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