Khushwant Singh Litfest: कांति प्रसाद बाजपेयी बोले- चीन से होगा अगला दलाई लामा, भारत को करना होगा समर्थन
कसौली में खुशवंत सिंह लिटफेस्ट के दूसरे दिन अंतरराष्ट्रीय मामलों के विशेषज्ञ और लेखक कांति प्रसाद बाजपेयी ने कहा कि अगला धर्मगुरु दलाई लामा चीन से होगा। तिब्बती समुदाय समेत बुद्धिस्ट लोग भी अपना दलाई लामा तैयार करेंगे, मगर भारत को चीन का समर्थन करना होगा। सीमाओं पर विवाद और न बढ़े, इसके लिए यह जरूरी है।
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कसौली में खुशवंत सिंह लिटफेस्ट के दूसरे दिन ‘इंडियाज चाइना चैलेंजिज’ सत्र में लेखकों ने देश से जुड़े अहम मसलों पर बेबाकी से अपनी राय रखी। अंतरराष्ट्रीय मामलों के विशेषज्ञ और लेखक कांति प्रसाद बाजपेयी ने कहा कि अगला धर्मगुरु दलाई लामा चीन से होगा।
तिब्बती समुदाय समेत बुद्धिस्ट लोग भी अपना दलाई लामा तैयार करेंगे, मगर भारत को चीन का समर्थन करना होगा। सीमाओं पर विवाद और न बढ़े, इसके लिए यह जरूरी है। उन्होंने कहा कि तिब्बत के लोग भारत को अपना मानते हैं, इसके बावजूद चीन को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। 1962 से लेकर अभी तक भारत के नेताओं ने बातचीत करने की सही कोशिश नहीं की, जिससे संबंध सुधारे जाएं। यही कारण है कि चीन लगातार हमारी भूमि पर कब्जे करता आ रहा है। कहा कि नेहरू समेत चीन के नेताओं ने कभी भी बात की कोशिश नहीं की। वक्ताओं ने कहा कि आज भारत के राजनेताओं ने अरबों रुपये खर्च कर दिए, मगर संबंध सुधारने के नाम पर कुछ नहीं हुआ। लेखक एलैक्ट ट्रैवेली ने कहा कि भारत विश्व में दूसरा बड़ा पॉवरफुल देश बन रहा है। ऐसे में आगामी समय में चीन और भारत में कौन हावी होगा, यह काफी रोचक रहेगा।
भारत के सामने कई चुनौतियां
लेखक अनंथ कृष्णन ने कहा कि भारत के साथ चीन से अगले 20 से 30 सालों में कई बड़ी चुनौतियां होंगी। सबसे बड़ा चुनौती यह रहेगी कि देश के नेता किस तरह से चीन के साथ बातचीत करेंगे। इसके अलावा इकोनोमी और सेना का चैलेंज भी काफी बड़ा है। भारत कहीं न कहीं अभी भी कई वस्तुओं के लिए चीन पर ही निर्भर है। साथ ही भारत को चारों ओर देखने की जरूरत है क्योंकि चीन के अलावा श्रीलंका, पाकिस्तान, नेपाल, मालद्वीप के साथ भी संबंध किस तरह से रहेंगे, उस पर भी काफी निर्भर करेगा।
मैडम कमिश्नर पर हुई चर्चा, सजा में देरी पर उठाए सवाल
पूर्व आईपीएस अधिकारी डॉ. मीना बोरवणकर ने अपनी किताब ‘मैडम कमिश्नर’ पर चर्चा करते हुए कानून व्यवस्था और सजा में देरी पर सवाल उठाए। कहा- एक केस 2004 में चला था, मगर 2023 तक उसमें आरोपी को सजा नहीं हो पाई। उन्होंने एक मशहूर कारोबारी के बेटे के केस का जिक्र करते हुए कहा कि उसने एक 18 साल की लड़की से दुष्कर्म किया था। उसमें पीड़ित पक्ष पर केस वापस लेने का दबाव बनाया गया।
राजनीति ने लोगों को धर्म और जाति में बांटा: नुसरत
लेखिका नुरसत जाफरी ने कहा कि जब मैं पैदा हुई तो उस समय बाबरी मस्जिद का विवाद चल रहा था। इस विवाद के बाद हिंदुओं और मुस्लिमों के बीच एक दीवार सी खड़ी हो गई। हमें अहसास होने लगा कि धर्म भी कुछ मायने रखता है। अपनी किताब ‘दिस लैंड वी कॉल होम’ पर चर्चा करते हुए कहा कि देश की राजनीति ने धर्म और जाति में लोगों को बांटा है, जबकि पहले इस तरह का कुछ नहीं था।
70 के दशक में डायलॉग से चलती थीं फिल्मेंः इम्तियाज
मशहूर फिल्म निर्देशक इम्तियाज अली ने कहा कि 1970 के दशक में डायलॉग के आधार पर फिल्में चलती थीं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि शोले, डॉन जैसी फिल्मों के डायलॉग लोगों को आज भी याद हैं। कहा कि अब वह समय नहीं है। कई फिल्में ऐसी हैं जो मैंने देखी हैं, मगर मुझे उनके नाम तक याद नहीं हैं।
'मोदी सरकार बिना विशेषज्ञों की सलाह के लाई थी चीते'
वन्य प्राणी व प्रकृति लेखक लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित डॉक्टर एमके रणजीत सिंह झाला ने साउथ अफ्रीका और नामीबिया से लाए गए चीतों और उनके शावकों की मौत पर मोदी सरकार पर सवाल उठाए। खुशवंत सिंह लिटफेस्ट के दौरान अपनी नई किताब ‘माउंटेन मेमल्स ऑफ द वर्ल्ड’ पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि मोदी सरकार बिना किसी विशेषज्ञ की सलाह के चीतों को लाई। यहां कूनो नेशनल पार्क में कई चीतों की मौत हो गई।
हिमाचल ने आईबैक्स के संरक्षण पर कुछ नहीं किया
झाला ने हिमाचल सरकार पर भी सवाल उठाए। कहा कि हिमाचल में दुर्लभ आईबैक्स स्पीति क्षेत्र में पाया जाता है मगर उनके संरक्षण के लिए हिमाचल सरकार भी कोई काम नहीं कर रही। रणजीत सिंह ने कहा कि वहां पर कुछ बौद्ध लोग हैं जो इन प्रजातियों का संरक्षण कर रहे हैं। सरकार की ओर से इन पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। सुझाव दिया कि यदि सरकार वन्य प्राणियों को बचाने के लिए कार्य करेगी तो हमारी आगामी पीढ़ियां इन्हें देख पाएंगी। नहीं तो पहले ही यह प्रजातियां विलुप्त हो जांएगी। उनकी नई किताब में आईबैक्स की तस्वीरें छपी।