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Rampur Bushahar News: महीने में दो बार सबजे देवता साहिब दोगणू का दरबार
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मंदिर में प्रवेश के लिए अंडे, चिकन, शराब का पांच दिन का परहेज
संवाद न्यूज एजेंसी
डंसा (रामपुर बुशहर)। भगवान परशुराम की चार ठहरियों में शुमार लयापुरी लालसा में अब श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए महीने में दो रविवार को देवता साहिब दोगणू का दरबार सजेगा। धार्मिक परंपराओं का निर्वहन करते हुए हर महीने के दूसरे और चौथे रविवार को देवता दैवीय कार्यों और न्याय से जुड़े मामलों की सुनवाई करेंगे।
मंगला काली देवता दोगणू मंदिर समिति के प्रधान शीश शर्मा ने बताया कि देवता साहिब के आदेशों के अनुसार सभी कारिंदों और देवलुओं को मंदिर में पारंपरिक वेशभूषा के तहत टोपी पहनकर आना अनिवार्य किया गया है। इसके साथ ही मंदिर में पवित्रता बनाए रखने के लिए विशेष निर्देश जारी किए गए हैं। चिकन, अंडा और शराब का सेवन करने की स्थिति में देवता को स्पर्श करने की अनुमति नहीं होगी। साथ ही श्रद्धालुओं को अंडा और चिकन का सेवन कम से कम पांच दिन पहले बंद करने की सलाह दी गई है।
गौरतलब है कि मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा से पहले हर रविवार देवता का दरबार लगता था, लेकिन अब देवता साहिब के आदेशानुसार इसे महीने में दो रविवार तक सीमित किया गया है। मंदिर समिति का कहना है कि इस निर्णय से धार्मिक परंपराओं का और बेहतर तरीके से पालन सुनिश्चित होगा।
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संवाद न्यूज एजेंसी
डंसा (रामपुर बुशहर)। भगवान परशुराम की चार ठहरियों में शुमार लयापुरी लालसा में अब श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए महीने में दो रविवार को देवता साहिब दोगणू का दरबार सजेगा। धार्मिक परंपराओं का निर्वहन करते हुए हर महीने के दूसरे और चौथे रविवार को देवता दैवीय कार्यों और न्याय से जुड़े मामलों की सुनवाई करेंगे।
मंगला काली देवता दोगणू मंदिर समिति के प्रधान शीश शर्मा ने बताया कि देवता साहिब के आदेशों के अनुसार सभी कारिंदों और देवलुओं को मंदिर में पारंपरिक वेशभूषा के तहत टोपी पहनकर आना अनिवार्य किया गया है। इसके साथ ही मंदिर में पवित्रता बनाए रखने के लिए विशेष निर्देश जारी किए गए हैं। चिकन, अंडा और शराब का सेवन करने की स्थिति में देवता को स्पर्श करने की अनुमति नहीं होगी। साथ ही श्रद्धालुओं को अंडा और चिकन का सेवन कम से कम पांच दिन पहले बंद करने की सलाह दी गई है।
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गौरतलब है कि मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा से पहले हर रविवार देवता का दरबार लगता था, लेकिन अब देवता साहिब के आदेशानुसार इसे महीने में दो रविवार तक सीमित किया गया है। मंदिर समिति का कहना है कि इस निर्णय से धार्मिक परंपराओं का और बेहतर तरीके से पालन सुनिश्चित होगा।
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