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सेब के बगीचों में फैला वूली एफिड, बागवान चिंतित
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आजकल सेब के बगीचों में तेजी से फैल रहा वुलिएफिड का संक्रमण
- फोटो : RAMPUR-HP
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रोहडू। क्षेत्र में सेब के बगीचों में वूली एफिड कीट का संक्रमण तेजी से बढ़ रहा है। परजीवी कीट के हमले से पौधों और फसल को भारी नुकसान हो रहा है। इससे बागवानों की चिंता बढ़ गई है। बागवानी विशेषज्ञों के मुताबिक अधिक गर्मी और सूखे को इसकी मुख्य वजह माना जा रहा है। चिंता इस बात की है कि मौसम में बदलाव के बाद भी बगीचों में कीट का हमला कम नहीं हो रहा है। वूली एफिड के हमले से फसल और सेब के पौधों की छाल खराब हो रही है। इसके अलावा बीमों को भी नुकसान हो रहा है।
बागवानी विभाग के मुताबिक वूली एफिड के संक्रमण की सूचना उपमंडल के कई क्षेत्रों से आ रही है। इससे आशंका है कि क्षेत्र के अधिकांश क्षेत्र में इस कीट ने हमला कर दिया है। इससे आने वाले सीजन की फसल पर भी प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि सेब की फसल के तुड़ान से पहले इस बीमारी के कीट को रोकने के लिए कीटनाशक के छिड़काव की सिफारिश नहीं की जा सकती। सेब तुड़ान के बाद बागवान विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार वूली एफिड को रोकने के लिए छिड़काव कर सकते हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक मानसून में बारिश होने के बाद कीट के संक्रमण में कमी आएगी। सेब तुड़ान के लिए अभी दो महीने का समय शेष है। ऐसे में फसल और फल को अधिक नुकसान होने की आशंका है।
क्या है वूली एफिड
सेब की टहनियों पर रूई या बर्फ के फाहे की तरह सफेद पदार्थ जमने को वूली एफिड होता है। इसके अंदर गहरे लाल और भूरे रंग के छोटे-छोटे कीट जमा होते हैं। वूली एफिड कीट पेड़ की छाल तने और शाखाओं का रस चूसता है। इससे पौधे में गांठें बनती हैं। सर्दियों में कीट जड़ों में पहुंच जाता है और पौधे की जड़ों को नुकसान पहुंचाता है। इससे पौधे का विकास रुक जाता है। बीमे क्षतिग्रस्त होने से फल लगने की क्षमता भी कम हो जाती है।
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कृषि विज्ञान केंद्र रोहडू़ के बागवानी विशेषज्ञ डॉ. नरेंद्र कायथ ने बताया कि वूली एफिड कीट की साल में तेरह पीढ़ियां होती हैं। छोटे कीट पैदा होने के 24 घंटे में सफेद रूई की तरह का पदार्थ छोड़ते हैं। कीट इसके सुरक्षा चक्र में बचा रहता है। इसकी रोकथाम के लिए रासायनिक प्रबंधन उचित तरीका है।
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बागवानी विभाग के मुताबिक वूली एफिड के संक्रमण की सूचना उपमंडल के कई क्षेत्रों से आ रही है। इससे आशंका है कि क्षेत्र के अधिकांश क्षेत्र में इस कीट ने हमला कर दिया है। इससे आने वाले सीजन की फसल पर भी प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि सेब की फसल के तुड़ान से पहले इस बीमारी के कीट को रोकने के लिए कीटनाशक के छिड़काव की सिफारिश नहीं की जा सकती। सेब तुड़ान के बाद बागवान विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार वूली एफिड को रोकने के लिए छिड़काव कर सकते हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक मानसून में बारिश होने के बाद कीट के संक्रमण में कमी आएगी। सेब तुड़ान के लिए अभी दो महीने का समय शेष है। ऐसे में फसल और फल को अधिक नुकसान होने की आशंका है।
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क्या है वूली एफिड
सेब की टहनियों पर रूई या बर्फ के फाहे की तरह सफेद पदार्थ जमने को वूली एफिड होता है। इसके अंदर गहरे लाल और भूरे रंग के छोटे-छोटे कीट जमा होते हैं। वूली एफिड कीट पेड़ की छाल तने और शाखाओं का रस चूसता है। इससे पौधे में गांठें बनती हैं। सर्दियों में कीट जड़ों में पहुंच जाता है और पौधे की जड़ों को नुकसान पहुंचाता है। इससे पौधे का विकास रुक जाता है। बीमे क्षतिग्रस्त होने से फल लगने की क्षमता भी कम हो जाती है।
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कृषि विज्ञान केंद्र रोहडू़ के बागवानी विशेषज्ञ डॉ. नरेंद्र कायथ ने बताया कि वूली एफिड कीट की साल में तेरह पीढ़ियां होती हैं। छोटे कीट पैदा होने के 24 घंटे में सफेद रूई की तरह का पदार्थ छोड़ते हैं। कीट इसके सुरक्षा चक्र में बचा रहता है। इसकी रोकथाम के लिए रासायनिक प्रबंधन उचित तरीका है।