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हाइड्रो प्रोजेक्ट के लिए जंगलों का कटान नहीं करेंगे बर्दाश्त : समिति
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उपमंडल निरमंड की कुर्पण हाइड्रो परियोजना के विरोध में उतरे ग्रामीणों ने रुकवाया काम। संवाद
कुर्पण वैली परियोजना के खिलाफ फूटा ग्रामीणों का गुस्सा
संघर्ष समिति ने खोला मोर्चा, परियोजना को तुरंत बंद करने की मांग
संवाद न्यूज एजेंसी
निरमंड (कुल्लू)।
निरमंड खंड के कुर्पण वैली हाइड्रो प्रोजेक्ट को लेकर ग्रामीणों में भारी रोष है। शनिवार को प्रभावित ग्रामीणों ने बैठक की। बैठक में पूर्व संघर्ष समिति के सभी पदाधिकारी मौजूद रहे। स्थानीय लोगाें ने हाइड्रो परियोजना के निर्माण को लेकर किए जा रहे अवैध कटान पर रोष जताया। संघर्ष समिति के सचिन और रोशन लाल ने बताया कि यह संघर्ष 14-15 साल से जारी है और आने वाले समय में भी इसी मजबूती के साथ जारी रहेगा। बैठक के दौरान संघर्ष समिति का पुनर्गठन किया गया और नई समिति ने सर्वसम्मति से फैसला लिया कि क्षेत्र की जनता इस हाइड्रो प्रोजेक्ट का पूरी तरह से विरोध करेगी। स्थानीय लोगों का कहना है कि परियोजना के लिए जंगलों का अवैध कटान किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जंगल उनकी पुश्तैनी धरोहर हैं और इनका संरक्षण उनकी पहली जिम्मेदारी है। ग्रामीणों ने यह स्पष्ट किया कि अपनी नदी-नालों का पानी परियोजना के लिए उपलब्ध नहीं करवाएंगे। इस परियोजना से न केवल पर्यावरणीय असंतुलन बढ़ेगा, बल्कि क्षेत्र के जलस्रोत, खेतीबाड़ी और स्थानीय आजीविका पर भी गंभीर असर पड़ेगा। बैठक में मौजूद लोगों ने एक स्वर में कहा कि प्रभावित और स्थानीय समुदाय के हितों की रक्षा के लिए आंदोलन को और अधिक मजबूत करेंगे। क्षेत्रवासी इस परियोजना का किसी भी हाल में समर्थन नहीं करेंगे और निर्माण कार्य नहीं होने देंगे। संघर्ष समिति ने सरकार और परियोजना से जुड़े अधिकारियों से आग्रह किया है कि स्थानीय जनता की भावनाओं का सम्मान करते हुए इस परियोजना को तुरंत प्रभाव से बंद करें, वर्ना आंदोलन तेज किया जाएगा।
बागा सराहन पंचायत प्रधान प्रेम सिंह ठाकुर ने कहा कि स्थानीय लोग ग्राम पंचायत कार्यालय आए थे। उन्होंने एक पत्र एसडीएम और पंचायत को दिया है। उसे पंचायत सचिव को उचित कार्रवाई करने के लिए दे दिया है। कुछ रोज पूर्व पंचायत की मासिक बैठक हुई। इस पत्र को पूरी पंचायत के समक्ष रखा गया है। सभी सदस्यों ने इसका विरोध किया है। यदि स्थानीय जनता के जो प्राकृतिक स्रोत हैं, उसका नुकसान कर रहे हैं, तो हम इस पक्ष में बिल्कुल नहीं है। सचिव को आदेश दिए गए हैं कि तत्कालीन पंचायत प्रधान और सचिव ने जो एनओसी दी है, ग्राम सभा के माध्यम से उसकी पड़ताल की जाए। उसकी प्रति की जांच की जाएगी। इसमें कौन-कौन सी शर्तें दी हैं, इसकी जांच कर उचित कार्रवाई की जाएगी।
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संघर्ष समिति ने खोला मोर्चा, परियोजना को तुरंत बंद करने की मांग
संवाद न्यूज एजेंसी
निरमंड (कुल्लू)।
निरमंड खंड के कुर्पण वैली हाइड्रो प्रोजेक्ट को लेकर ग्रामीणों में भारी रोष है। शनिवार को प्रभावित ग्रामीणों ने बैठक की। बैठक में पूर्व संघर्ष समिति के सभी पदाधिकारी मौजूद रहे। स्थानीय लोगाें ने हाइड्रो परियोजना के निर्माण को लेकर किए जा रहे अवैध कटान पर रोष जताया। संघर्ष समिति के सचिन और रोशन लाल ने बताया कि यह संघर्ष 14-15 साल से जारी है और आने वाले समय में भी इसी मजबूती के साथ जारी रहेगा। बैठक के दौरान संघर्ष समिति का पुनर्गठन किया गया और नई समिति ने सर्वसम्मति से फैसला लिया कि क्षेत्र की जनता इस हाइड्रो प्रोजेक्ट का पूरी तरह से विरोध करेगी। स्थानीय लोगों का कहना है कि परियोजना के लिए जंगलों का अवैध कटान किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जंगल उनकी पुश्तैनी धरोहर हैं और इनका संरक्षण उनकी पहली जिम्मेदारी है। ग्रामीणों ने यह स्पष्ट किया कि अपनी नदी-नालों का पानी परियोजना के लिए उपलब्ध नहीं करवाएंगे। इस परियोजना से न केवल पर्यावरणीय असंतुलन बढ़ेगा, बल्कि क्षेत्र के जलस्रोत, खेतीबाड़ी और स्थानीय आजीविका पर भी गंभीर असर पड़ेगा। बैठक में मौजूद लोगों ने एक स्वर में कहा कि प्रभावित और स्थानीय समुदाय के हितों की रक्षा के लिए आंदोलन को और अधिक मजबूत करेंगे। क्षेत्रवासी इस परियोजना का किसी भी हाल में समर्थन नहीं करेंगे और निर्माण कार्य नहीं होने देंगे। संघर्ष समिति ने सरकार और परियोजना से जुड़े अधिकारियों से आग्रह किया है कि स्थानीय जनता की भावनाओं का सम्मान करते हुए इस परियोजना को तुरंत प्रभाव से बंद करें, वर्ना आंदोलन तेज किया जाएगा।
बागा सराहन पंचायत प्रधान प्रेम सिंह ठाकुर ने कहा कि स्थानीय लोग ग्राम पंचायत कार्यालय आए थे। उन्होंने एक पत्र एसडीएम और पंचायत को दिया है। उसे पंचायत सचिव को उचित कार्रवाई करने के लिए दे दिया है। कुछ रोज पूर्व पंचायत की मासिक बैठक हुई। इस पत्र को पूरी पंचायत के समक्ष रखा गया है। सभी सदस्यों ने इसका विरोध किया है। यदि स्थानीय जनता के जो प्राकृतिक स्रोत हैं, उसका नुकसान कर रहे हैं, तो हम इस पक्ष में बिल्कुल नहीं है। सचिव को आदेश दिए गए हैं कि तत्कालीन पंचायत प्रधान और सचिव ने जो एनओसी दी है, ग्राम सभा के माध्यम से उसकी पड़ताल की जाए। उसकी प्रति की जांच की जाएगी। इसमें कौन-कौन सी शर्तें दी हैं, इसकी जांच कर उचित कार्रवाई की जाएगी।
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