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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Rampur Bushahar News ›   Unscientific and illegal dumping of debris by the project

Rampur Bushahar News: रौरा-II जल विद्युत परियोजना पर लगा चार लाख रुपये का पर्यावरणीय जुर्माना

Thu, 27 Aug 2026 11:08 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Thu, 27 Aug 2026 11:08 PM IST
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रौरा-II जल विद्युत परियोजना पर लगा चार लाख रुपये का पर्यावरणीय जुर्माना
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परियोजना की ओर से अवैज्ञानिक और अवैध रूप से मलबा डंप
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने परियोजना को सात दिन में जुर्माना जमा करने का दिया निर्देश
प्रकाश ठाकुर
रामपुर बुशहर। राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने रौरा-II जल विद्युत परियोजना (20 मेगावाट) का निर्माण कर रही कंपनी पर चार लाख रुपये का पर्यावरणीय जुर्माना लगाया है। यह जुर्माना किन्नौर जिले के चोलिंग गांव में स्थित इस परियोजना की ओर से अवैज्ञानिक और अवैध रूप से मलबा डालने करने के लिए लगाया गया है। यह कार्रवाई राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के 29 जुलाई 2013 के आदेशों के तहत की गई है, जो अवैज्ञानिक और अवैध मलबा डंपिंग से संबंधित थी। बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी रामपुर से मिली रिपोर्ट के आधार पर यह निर्णय लिया गया। रिपोर्ट में 21 जून को हुए निरीक्षण का हवाला दिया गया है। निरीक्षण के दौरान कई गंभीर अनियमितताएं पाई गईं। परियोजना से निकला मलबा रौरा खड्ड में या उसके पास बिना किसी सुरक्षा उपाय के डंप किया गया था। परियोजना प्रस्तावक ने इंटेक/बैराज साइट सहित कई स्थानों पर रिटेनिंग संरचनाएं नहीं बनाई थीं। कुछ स्थानों पर बनी रिटेनिंग संरचनाएं क्षतिग्रस्त पाई गईं। इन्हें मानसून में मलबे को खड्ड में बहने से रोकने के लिए ठीक करने की आवश्यकता थी। इससे खड्ड के पानी की गुणवत्ता खराब हो रही थी। बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी रामपुर ने परियोजना प्रस्तावक को दो कारण बताओ नोटिस जारी किए थे। ये नोटिस 25 जून और 10 जुलाई को जारी हुए। 18 जुलाई को दोबारा निरीक्षण में कोई खास सुधार नहीं दिखा। इकाई ने 12 जुलाई 2026 को अपना जवाब प्रस्तुत किया था। इस जवाब को क्षेत्रीय अधिकारी ने असंतोषजनक पाया। हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने भी इस मामले का गंभीर संज्ञान लिया है। क्षेत्रीय अधिकारी रामपुर ने चार साइटों के लिए प्रति साइट एक लाख रुपये की दर से कुल चार लाख रुपये का पर्यावरणीय जुर्माना लगाने की सिफारिश की थी। राज्य बोर्ड की ओर से गठित एक समिति ने भी इस सिफारिश का समर्थन किया। समिति का गठन उल्लंघनकर्ताओं पर पर्यावरणीय मुआवजे के आकलन के लिए 12 मई को किया गया था। यह जुर्माना जल (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम, 1974 के प्रावधानों का उल्लंघन है। बोर्ड ने परियोजना को यह जुर्माना सात दिनों के भीतर जमा करने का निर्देश दिया है। बोर्ड के संयुक्त सदस्य सचिव डॉ. गोपाल चंद गौतम ने यह आदेश जारी किया।
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