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Rampur Bushahar News: शिरगुली में 20 से अधिक कमरों वाले दो मकान जले
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देहा के शिरगुली गांव में मकानों में लगी आग। संवाद
करोड़ों रुपये के नुकसान का अनुमान, दमकल कर्मियों ने चार घंटे की मशक्कत के बाद पाया काबू
संवाद न्यूज एजेंसी
ठियोग (रामपुर बुशहर)। उपतहसील देहा की घोड़ना पंचायत के शिरगुली गांव में बुधवार दोपहर करीब 2:30 बजे अचानक आग ने ऐसा तांडव मचाया कि देखते ही देखते दो विशाल लकड़ी के मकान धू-धू कर जल उठे। कुछ ही घंटों में करीब 20 कमरों वाले दोनों मकान राख के ढेर में तब्दील हो गए। इस घटना में दो परिवारों की जिंदगीभर की कमाई आग की लपटों में समा गई। राजस्व विभाग की टीम मौके पर पहुंची और आकलन में जुट गई। आग से करोड़ों रुपये के नुकसान का अनुमान है। आग लगने का कारण शॉर्ट सर्किट बताया जा रहा है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, आग सबसे पहले लायक राम बकसेठ के मकान में भड़की। लकड़ी से निर्मित मकान होने के कारण आग ने कुछ ही मिनटों में विकराल रूप धारण कर लिया। आग ने पास स्थित सेबी रमाइक के घर को भी अपनी चपेट में ले लिया। लपटें इतनी भयावह थीं कि दोनों परिवार अपने घरों से एक सुई तक नहीं निकाल पाए। देखते ही देखते वर्षों की मेहनत से खड़े किए गए आशियाने उनकी आंखों के सामने राख बन गए। स्थानीय ग्रामीणों ने बागवानी में इस्तेमाल होने वाले पावर स्प्रेयर और अन्य मशीनों के सहारे आग बुझाने का प्रयास करते रहे, लेकिन आग की भयावहता के आगे सभी प्रयास नाकाम साबित हुए। आग की ऊंची लपटें और धुएं के गुबार कई किलोमीटर दूर से दिखाई दे रहे थे। सूचना मिलते ही चौपाल से दो, कोटखाई से एक और देहा से एक अग्निशमन वाहन मौके के लिए रवाना हुए। हालांकि, संकरी और दुर्गम सड़कें राहत कार्य में बड़ी बाधा बनीं, जिससे दमकल वाहनों को घटनास्थल तक पहुंचने में अपेक्षा से अधिक समय लगा। इसके बावजूद अग्निशमन कर्मियों ने हिम्मत नहीं हारी और करीब चार घंटे तक लगातार संघर्ष के बाद आग पर काबू पाया।
दमकल की टीमें नहीं पहुंचती तो 15 से अधिक मकान जल जाते
ग्रामीणों का कहना है कि यदि दमकल विभाग की टीमें समय पर नहीं पहुंचतीं, तो शिरगुली गांव में 15 से अधिक मकान आग की चपेट में आ सकते थे और पूरा गांव तबाही का मंजर देखता। लोगों का यह भी कहना है कि यदि सड़क बेहतर होती और दमकल वाहन जल्दी पहुंच पाते और कम से कम एक मकान को बचाया जा सकता था। घटना की सूचना मिलते ही चौपाल के विधायक बलवीर वर्मा मौके पर पहुंचे और प्रभावित परिवारों से मुलाकात कर हरसंभव सहायता का भरोसा दिया। नायब तहसीलदार सुरेंद्र चौहान उनके सहयोगी सुनील रपटा और प्रशासनिक टीम ने भी घटनास्थल का दौरा कर नुकसान का जायजा लिया। प्रशासन ने तत्काल राहत के रूप में दोनों परिवारों को 15-15 हजार रुपये की फौरी सहायता, तिरपाल और कंबल उपलब्ध करवाए हैं।
आंखों के सामने राख हो गए सपने
ग्रामीणों के अनुसार आग इतनी तेज थी कि परिवारों को संभलने तक का मौका नहीं मिला। घरों में रखा फर्नीचर, नकदी, कपड़े, बर्तन, अनाज, जरूरी दस्तावेज और वर्षों से संजोया गया सामान कुछ ही घंटों में राख हो गया। अब दोनों परिवार खुले आसमान के नीचे नई शुरुआत करने को मजबूर हैं।
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संवाद न्यूज एजेंसी
ठियोग (रामपुर बुशहर)। उपतहसील देहा की घोड़ना पंचायत के शिरगुली गांव में बुधवार दोपहर करीब 2:30 बजे अचानक आग ने ऐसा तांडव मचाया कि देखते ही देखते दो विशाल लकड़ी के मकान धू-धू कर जल उठे। कुछ ही घंटों में करीब 20 कमरों वाले दोनों मकान राख के ढेर में तब्दील हो गए। इस घटना में दो परिवारों की जिंदगीभर की कमाई आग की लपटों में समा गई। राजस्व विभाग की टीम मौके पर पहुंची और आकलन में जुट गई। आग से करोड़ों रुपये के नुकसान का अनुमान है। आग लगने का कारण शॉर्ट सर्किट बताया जा रहा है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, आग सबसे पहले लायक राम बकसेठ के मकान में भड़की। लकड़ी से निर्मित मकान होने के कारण आग ने कुछ ही मिनटों में विकराल रूप धारण कर लिया। आग ने पास स्थित सेबी रमाइक के घर को भी अपनी चपेट में ले लिया। लपटें इतनी भयावह थीं कि दोनों परिवार अपने घरों से एक सुई तक नहीं निकाल पाए। देखते ही देखते वर्षों की मेहनत से खड़े किए गए आशियाने उनकी आंखों के सामने राख बन गए। स्थानीय ग्रामीणों ने बागवानी में इस्तेमाल होने वाले पावर स्प्रेयर और अन्य मशीनों के सहारे आग बुझाने का प्रयास करते रहे, लेकिन आग की भयावहता के आगे सभी प्रयास नाकाम साबित हुए। आग की ऊंची लपटें और धुएं के गुबार कई किलोमीटर दूर से दिखाई दे रहे थे। सूचना मिलते ही चौपाल से दो, कोटखाई से एक और देहा से एक अग्निशमन वाहन मौके के लिए रवाना हुए। हालांकि, संकरी और दुर्गम सड़कें राहत कार्य में बड़ी बाधा बनीं, जिससे दमकल वाहनों को घटनास्थल तक पहुंचने में अपेक्षा से अधिक समय लगा। इसके बावजूद अग्निशमन कर्मियों ने हिम्मत नहीं हारी और करीब चार घंटे तक लगातार संघर्ष के बाद आग पर काबू पाया।
दमकल की टीमें नहीं पहुंचती तो 15 से अधिक मकान जल जाते
ग्रामीणों का कहना है कि यदि दमकल विभाग की टीमें समय पर नहीं पहुंचतीं, तो शिरगुली गांव में 15 से अधिक मकान आग की चपेट में आ सकते थे और पूरा गांव तबाही का मंजर देखता। लोगों का यह भी कहना है कि यदि सड़क बेहतर होती और दमकल वाहन जल्दी पहुंच पाते और कम से कम एक मकान को बचाया जा सकता था। घटना की सूचना मिलते ही चौपाल के विधायक बलवीर वर्मा मौके पर पहुंचे और प्रभावित परिवारों से मुलाकात कर हरसंभव सहायता का भरोसा दिया। नायब तहसीलदार सुरेंद्र चौहान उनके सहयोगी सुनील रपटा और प्रशासनिक टीम ने भी घटनास्थल का दौरा कर नुकसान का जायजा लिया। प्रशासन ने तत्काल राहत के रूप में दोनों परिवारों को 15-15 हजार रुपये की फौरी सहायता, तिरपाल और कंबल उपलब्ध करवाए हैं।
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आंखों के सामने राख हो गए सपने
ग्रामीणों के अनुसार आग इतनी तेज थी कि परिवारों को संभलने तक का मौका नहीं मिला। घरों में रखा फर्नीचर, नकदी, कपड़े, बर्तन, अनाज, जरूरी दस्तावेज और वर्षों से संजोया गया सामान कुछ ही घंटों में राख हो गया। अब दोनों परिवार खुले आसमान के नीचे नई शुरुआत करने को मजबूर हैं।

देहा के शिरगुली गांव में मकानों में लगी आग। संवाद
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