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Rampur Bushahar News: सेब के बगीचों पर फ्रूट बोरर का बढ़ा खतरा
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फोटो रोहडू
तापमान बढ़ने से फल छेदक सुंडी फलों के गुच्छों को पहुंचा रही नुकसान
समय पर नियंत्रण नहीं किया, तो फलों को अधिक नुकसान होने की आशंका
संवाद न्यूज एजेंसी
रोहड़ू । रोहड़ू क्षेत्र के सेब के बगीचों में फल छेदक सुंडी (फ्रूट बोरर) ने फलों को नुकसान पहुंचाना शुरू कर दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि तापमान में आई बढ़ोतरी से बगीचों में फल छेदक सुंडी के हमले से बागवानों की परेशानी बढ़ने वाली है। समय पर नियंत्रण नहीं किया गया, तो फलों को अधिक नुकसान होने की आशंका है। इसे रोकने के लिए बागवानों को विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार कीटनाशकों का छिड़काव करना चाहिए। सरकार की ओर से अभी उद्यान विभाग के केंद्रों में दवाइयां उपलब्ध नहीं है। इस वजह से बागवानों को बाजार से महंगे दाम पर दवाइयां खरीदनी पड़ेंगी। विशेषज्ञों के अनुसार फल लगने के बाद अचानक तापमान में हुई बढ़ोतरी से सेब के बगीचों में गहरे हरे रंग की सुंडी फलों में छेद कर नुकसान पहुंचा रही है। फल विकास के साथ सुंडी गुच्छे में लगे सेब के फलों को अधिक नुकसान पहुंचाती है। निचले क्षेत्र में अधिक तापमान होने के कारण बगीचों में सुंडी का हमला बढ़ रहा है। फल छेदक सुंडी को रोकने के लिए अब बागवानों को बगीचे में आवश्यक दवाइयों के छिड़काव की आवश्यकता है। साल 2010 में सुंडी के प्रकोप से पहली बार सेब की फसल को भारी नुकसान हुआ था। बागवानी क्षेत्र में सुंडी से हुए नुकसान के बाद विशेषज्ञों की टीम ने कई बगीचों का दौरा कर इस पर नियंत्रण पाया था। मौसम में बदलाव के बाद इस साल फिर से फल छेदक सुंडी ने बगीचों पर हमला कर दिया है।
समय पर रोकथाम के लिए करे छिड़काव
कृषि विज्ञान केंद्र के पूर्व प्रभारी एवं बागवानी विशेषज्ञ डॉ. नरेंद्र कायथ के अनुसार कई क्षेत्रों से फल छेदक सुंडी (फ्रूट बोरर) की सूचना मिल रही है। रात के समय पतंगे कीट सेब के पौधे में फलों के गुच्छों के बीच अंडे छोड़ते हैं। सप्ताह में अंडे विकसित होकर सुंडी का रूप धारण कर फलों को नुकसान पहुंचाते हैं। उनका कहना है कि बागवान हर दिन बगीचों में इसकी जांच करें। बगीचे में फ्रूट बोरर नुकसान कर रहा है, तो विशेषज्ञों की सलाह के बाद ही दो सौ एमएल मैलाथियान दवाई को दो सौ लीटर पानी में मिलाकर पेड़ों पर छिड़काव करें। गलत दवाई के छिड़काव से फसल और पौधे को नुकसान की संभावना रहेगी, इसलिए विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार की दवाइयों का इसकी रोकथाम के लिए छिड़काव करें। अगर समय पर रोकथाम नहीं की गई तो फल को भारी नुकसान होने का खतरा रहता है।
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समय पर नियंत्रण नहीं किया, तो फलों को अधिक नुकसान होने की आशंका
संवाद न्यूज एजेंसी
रोहड़ू । रोहड़ू क्षेत्र के सेब के बगीचों में फल छेदक सुंडी (फ्रूट बोरर) ने फलों को नुकसान पहुंचाना शुरू कर दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि तापमान में आई बढ़ोतरी से बगीचों में फल छेदक सुंडी के हमले से बागवानों की परेशानी बढ़ने वाली है। समय पर नियंत्रण नहीं किया गया, तो फलों को अधिक नुकसान होने की आशंका है। इसे रोकने के लिए बागवानों को विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार कीटनाशकों का छिड़काव करना चाहिए। सरकार की ओर से अभी उद्यान विभाग के केंद्रों में दवाइयां उपलब्ध नहीं है। इस वजह से बागवानों को बाजार से महंगे दाम पर दवाइयां खरीदनी पड़ेंगी। विशेषज्ञों के अनुसार फल लगने के बाद अचानक तापमान में हुई बढ़ोतरी से सेब के बगीचों में गहरे हरे रंग की सुंडी फलों में छेद कर नुकसान पहुंचा रही है। फल विकास के साथ सुंडी गुच्छे में लगे सेब के फलों को अधिक नुकसान पहुंचाती है। निचले क्षेत्र में अधिक तापमान होने के कारण बगीचों में सुंडी का हमला बढ़ रहा है। फल छेदक सुंडी को रोकने के लिए अब बागवानों को बगीचे में आवश्यक दवाइयों के छिड़काव की आवश्यकता है। साल 2010 में सुंडी के प्रकोप से पहली बार सेब की फसल को भारी नुकसान हुआ था। बागवानी क्षेत्र में सुंडी से हुए नुकसान के बाद विशेषज्ञों की टीम ने कई बगीचों का दौरा कर इस पर नियंत्रण पाया था। मौसम में बदलाव के बाद इस साल फिर से फल छेदक सुंडी ने बगीचों पर हमला कर दिया है।
समय पर रोकथाम के लिए करे छिड़काव
कृषि विज्ञान केंद्र के पूर्व प्रभारी एवं बागवानी विशेषज्ञ डॉ. नरेंद्र कायथ के अनुसार कई क्षेत्रों से फल छेदक सुंडी (फ्रूट बोरर) की सूचना मिल रही है। रात के समय पतंगे कीट सेब के पौधे में फलों के गुच्छों के बीच अंडे छोड़ते हैं। सप्ताह में अंडे विकसित होकर सुंडी का रूप धारण कर फलों को नुकसान पहुंचाते हैं। उनका कहना है कि बागवान हर दिन बगीचों में इसकी जांच करें। बगीचे में फ्रूट बोरर नुकसान कर रहा है, तो विशेषज्ञों की सलाह के बाद ही दो सौ एमएल मैलाथियान दवाई को दो सौ लीटर पानी में मिलाकर पेड़ों पर छिड़काव करें। गलत दवाई के छिड़काव से फसल और पौधे को नुकसान की संभावना रहेगी, इसलिए विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार की दवाइयों का इसकी रोकथाम के लिए छिड़काव करें। अगर समय पर रोकथाम नहीं की गई तो फल को भारी नुकसान होने का खतरा रहता है।

फोटो रोहडू
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