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Rampur Bushahar News: स्कूल प्रवक्ता संघ ने ड्रेस कोड लगाने के फैसले का किसा स्वागत
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संवाद न्यूज एजेंसी
रोहड़ू। हिमाचल प्रदेश स्कूल प्रवक्ता संघ जिला शिमला ने शिक्षकों के लिए ड्रेस कोड लगाने के फैसले के स्वागत किया है। संघ के अध्यक्ष अजय नेगी, महासचिव आकाशदीप, वरिष्ठ उपाध्यक्ष जेपी पराशर, वित्त सचिव देवेंद्र लक्टू, मुख्य राज्य सलाहकार प्रेमपाल दुल्टा, कानूनी सलाहकार विकेश जनारथा, दुर्गा मेहता ,वेद प्रकाश, प्रेम शर्मा, सुरेंद्र रोंगटा ,नरेश लाल, विवेक मेहता, उमेश दाउटू, युगल किशोर सूरज चौहान, तरुण नेष्टा, वीरेंद्र वॉशिंगटा ने संयुक्त बयान में कहा कि शिक्षक समाज का मार्गदर्शक, प्रेरणा स्रोत और छात्रों के लिए आदर्श होता है। एक शिक्षक का आचरण व्यवहार और पहनावा विद्यार्थियों के चरित्र निर्माण में अहम भूमिका निभाता है। ऐसे में डिसेंट या फॉर्मल ड्रेस का चयन एक सराहनीय कदम है। इसे सभी अध्यापक व्यक्तिगत स्तर पर अपनाने के लिए सहमत हैं। हालांकि, संघ इस बात पर भी जोर देता है कि किसी भी विभागीय आदेश की आड़ में शिक्षकों पर यूनिफॉर्म कोड थोपना न केवल अनुचित है, बल्कि शिक्षक समुदाय की स्वतंत्रता और गरिमा के विपरीत है। शिक्षक एक बौद्धिक वर्ग से संबंध रखते हैं और उन्हें अपने पहनावे का चयन अपनी सुविधा और गरिमा के अनुसार करने की आजादी होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जिला शिमला के कुछ स्कूलों में प्रधानाचार्य अनावश्यक आदेशों से शिक्षकों का मनोबल गिराने का प्रयास कर रहे हैं। ऐसे आदेश शिक्षक समाज की गरिमा को ठेस पहुंचाते हैं। कुछ स्कूलों के प्रधानाचार्य की ओर से डिसेंट को यूनिफॉर्म कोर्ट के रूप में गलत तरीके से प्रस्तुत किया जा रहा है।
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रोहड़ू। हिमाचल प्रदेश स्कूल प्रवक्ता संघ जिला शिमला ने शिक्षकों के लिए ड्रेस कोड लगाने के फैसले के स्वागत किया है। संघ के अध्यक्ष अजय नेगी, महासचिव आकाशदीप, वरिष्ठ उपाध्यक्ष जेपी पराशर, वित्त सचिव देवेंद्र लक्टू, मुख्य राज्य सलाहकार प्रेमपाल दुल्टा, कानूनी सलाहकार विकेश जनारथा, दुर्गा मेहता ,वेद प्रकाश, प्रेम शर्मा, सुरेंद्र रोंगटा ,नरेश लाल, विवेक मेहता, उमेश दाउटू, युगल किशोर सूरज चौहान, तरुण नेष्टा, वीरेंद्र वॉशिंगटा ने संयुक्त बयान में कहा कि शिक्षक समाज का मार्गदर्शक, प्रेरणा स्रोत और छात्रों के लिए आदर्श होता है। एक शिक्षक का आचरण व्यवहार और पहनावा विद्यार्थियों के चरित्र निर्माण में अहम भूमिका निभाता है। ऐसे में डिसेंट या फॉर्मल ड्रेस का चयन एक सराहनीय कदम है। इसे सभी अध्यापक व्यक्तिगत स्तर पर अपनाने के लिए सहमत हैं। हालांकि, संघ इस बात पर भी जोर देता है कि किसी भी विभागीय आदेश की आड़ में शिक्षकों पर यूनिफॉर्म कोड थोपना न केवल अनुचित है, बल्कि शिक्षक समुदाय की स्वतंत्रता और गरिमा के विपरीत है। शिक्षक एक बौद्धिक वर्ग से संबंध रखते हैं और उन्हें अपने पहनावे का चयन अपनी सुविधा और गरिमा के अनुसार करने की आजादी होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जिला शिमला के कुछ स्कूलों में प्रधानाचार्य अनावश्यक आदेशों से शिक्षकों का मनोबल गिराने का प्रयास कर रहे हैं। ऐसे आदेश शिक्षक समाज की गरिमा को ठेस पहुंचाते हैं। कुछ स्कूलों के प्रधानाचार्य की ओर से डिसेंट को यूनिफॉर्म कोर्ट के रूप में गलत तरीके से प्रस्तुत किया जा रहा है।