{"_id":"69fe3ba754c88205ae08d0db","slug":"the-problem-of-drinking-water-shortage-in-nalagarh-has-not-been-solved-till-date-rampur-hp-news-c-176-1-ssml1044-168980-2026-05-09","type":"story","status":"publish","title_hn":"Rampur Bushahar News: नालागढ़ में आज तक नहीं सुलझ पाई पेयजल किल्लत की समस्या","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Rampur Bushahar News: नालागढ़ में आज तक नहीं सुलझ पाई पेयजल किल्लत की समस्या
विज्ञापन
एचआर धीमान
नालागढ़ (सोलन)। नालागढ़ में नगर परिषद पीने के पानी की समस्या का अभी तक हल नहीं कर पाई हैं। नगर परिषद नालागढ़ के तहत आने वाले नौ वार्डों में पेयजल किल्लत विकराल रूप धारण कर चुकी है।
विडंबना यह है कि भीषण गर्मी के बीच लोगों को पर्याप्त पानी मिलना तो दूर, गंदा पानी पीने को मजबूर होना पड़ रहा है। वर्तमान में जारी चुनावी सरगर्मी के बीच स्थानीय जनता प्रत्याशियों के सामने इस समस्या को प्रमुखता से उठा रही है।
अब देखना यह होगा कि सत्ता की कुर्सी पर बैठने वाले नेता इस पुरानी समस्या का स्थायी समाधान निकालते हैं या यह केवल चुनावी वादा बनकर रह जाएगा। नालागढ़ में आबादी का गणित बिगड़ता जा रहा है।
विज्ञापन
रिकॉर्ड में आबादी 30 हजार है, लेकिन बड़ी संख्या में प्रवासियों और किरायेदारों के कारण यह आंकड़ा 50 हजार के पार पहुंच चुका है। जनसंख्या बढ़ने के बावजूद जलआपूर्ति के साधन पुराने हैं। नगर परिषद आज भी पुराने कुओं और बावड़ियों पर ही निर्भर है, जहां पुरानी मोटरें मांग के अनुरूप पानी नहीं खींच पा रही हैं। संवाद
विज्ञापन
नालागढ़ (सोलन)। नालागढ़ में नगर परिषद पीने के पानी की समस्या का अभी तक हल नहीं कर पाई हैं। नगर परिषद नालागढ़ के तहत आने वाले नौ वार्डों में पेयजल किल्लत विकराल रूप धारण कर चुकी है।
विडंबना यह है कि भीषण गर्मी के बीच लोगों को पर्याप्त पानी मिलना तो दूर, गंदा पानी पीने को मजबूर होना पड़ रहा है। वर्तमान में जारी चुनावी सरगर्मी के बीच स्थानीय जनता प्रत्याशियों के सामने इस समस्या को प्रमुखता से उठा रही है।
विज्ञापन
अब देखना यह होगा कि सत्ता की कुर्सी पर बैठने वाले नेता इस पुरानी समस्या का स्थायी समाधान निकालते हैं या यह केवल चुनावी वादा बनकर रह जाएगा। नालागढ़ में आबादी का गणित बिगड़ता जा रहा है।
विज्ञापन
रिकॉर्ड में आबादी 30 हजार है, लेकिन बड़ी संख्या में प्रवासियों और किरायेदारों के कारण यह आंकड़ा 50 हजार के पार पहुंच चुका है। जनसंख्या बढ़ने के बावजूद जलआपूर्ति के साधन पुराने हैं। नगर परिषद आज भी पुराने कुओं और बावड़ियों पर ही निर्भर है, जहां पुरानी मोटरें मांग के अनुरूप पानी नहीं खींच पा रही हैं। संवाद