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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Rampur Bushahar News ›   The practice of burning garden waste has not improved in Shimla

Rampur Bushahar News: शिमला में नहीं सुधरी बगीचोंं के अपशिष्ट जलाने की परंपरा

Thu, 22 Jan 2026 11:00 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Thu, 22 Jan 2026 11:00 PM IST
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चौपाल (रोहड़ू)। सेब के बगीचों में अपशिष्ट और कृषि कचरे के जलाने से होने वाले प्रदूषण को रोकने के लिए निर्णायक कदम शिमला से उठा, लेकिन लागू चंबा में हुआ। ऊपरी शिमला की स्थिति अभी भी नहीं सुधरी है। चंबा प्रशासन ने कृषि और बागवानी अपशिष्ट जलाने पर ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति लागू कर दी है। इस अभियान की प्रेरणा विशाल चौहान की दूरदर्शी सोच मानी जा रही है। चौपाल निवासी पर्यावरण प्रेमी विशाल चौहान ने सबसे पहले यह मुद्दा उठाया था। कृषि कचरा जलाने से न केवल वायु प्रदूषित होती है, बल्कि मिट्टी के मित्र कीट भी नष्ट होते हैं और भूमि की उर्वरता लगातार घटती जा रही है। उनकी पहल ने पहले शिमला प्रशासन का ध्यान खींचा, लेकिन मौके पर हालात नहीं सुधरे। वहीं, विशाल चौहान का कहना है कि पर्यावरण संरक्षण केवल कागजों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसे धरातल पर सख्ती से लागू करना जरूरी है। जब पहाड़ों की हवा जहरीली होने लगे, तो कड़े फैसले लेना अनिवार्य हो जाता है। कृषि, बागवानी विशेषज्ञों और पर्यावरणविदों के अनुसार कचरा जलाने से नुकसान बहुआयामी हैं। खेतों की आग कई बार अनियंत्रित होकर जंगलों को चपेट में ले लेती है, जिससे करोड़ों की वन संपदा नष्ट हो जाती है। सर्दियों में धुएं के जमाव से सांस के रोगियों की परेशानी बढ़ जाती हैं और मिट्टी की उर्वरता भी खत्म होती है।-----
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