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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Rampur Bushahar News ›   The number of thrips on flowers is increasing, crops may get damaged

Rampur Bushahar News: फूलों पर बढ़ रही थ्रिप्स की संख्या, फसलों को हो सकता है नुकसान

Thu, 03 Apr 2025 11:56 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Thu, 03 Apr 2025 11:56 PM IST
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कम ऊंचाई वाले सेब बहुत क्षेत्रों में तापमान बढ़ने से सेब की फसल को खतरा
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सेब की सेटिंग के लिए 16 से 20 डिग्री के बीच अधिकतम तापमान अनुकूल
संवाद न्यूज एजेंसी
रोहड़ू। कम ऊंचाई वाले सेब बहुत क्षेत्रों में लगातार तापमान बढ़ने के कारण सेब की सेटिंग प्रभावित हो सकती है। गर्मी से सेब के बगीचों में फूलों की थ्रिप्स की संख्या बढ़ती जा रही है। बागवानी विशेषज्ञों के अनुसार, फूलों में थ्रिप्स की संख्या बढ़ने से फसल प्रभावित हो सकती है। सेब की सेटिंग के लिए अधिकतम तापमान 16 से 20 डिग्री के बीच अनुकूल माना जाता है। इन दिनों नाशपाती और सेब की सेटिंग का समय है। कम तापमान के लिए बगीचों में नमी की जरूरत होती है। सर्दियों में लंबे समय से बारिश नहीं हुई है। बगीचों की नमी लगातार कम हो रही है। दिन के समय तापमान बढ़ने से फूलों में थ्रिप्स की संख्या बढ़ रही है। बागवानी विशेषज्ञ एवं कृषि विज्ञान के पूर्व प्रभारी डाॅ. नरेंद्र कायथ का कहना है कि गर्मी से सेब के फूलों में थ्रिप्स की संख्या बढ़ने का खतरा रहता है। बागवानों को फूल खिलने पर बगीचों में लगातार नजर रखने की जरूरत है। थ्रिप्स की पहचान के लिए 50 फूलों के नमूनों से प्रति फूल पर थ्रिप्स की जीव संख्या 15 से अधिक हो तो ही इसकी रोकथाम के लिए दवाइयों का छिड़काव करें। इसकी रोकथाम के लिए क्लोरोपाइरीफॉस का छिड़काव करने से आने वाले समय में माइट की संख्या बढ़ सकती है। उन्होंने सलाह दी है कि नियमित रूप से पेड़ों का निरीक्षण करें और थ्रिप्स के संकेतों को देखें।

ऐसे करें पहचान
थ्रिप्स की एक वर्ष में कई पीढ़ियां (लगभग आठ तक) होती हैं। थ्रिप्स छोटे, पतले कीट होते हैं, जो फूलों और पत्तियों पर पाए जाते हैं। गुलाबी कली के दौरान थ्रिप्स फूल के अंदर घुसकर पूरा खिलने से पहले उसके परागण को क्षतिग्रस्त कर देते हैं, इसलिए इसकी समय-समय जांच जरूरी है। दिन के समय धूप में नंगी आंखों से इनकों देखने में कठिनाई होती है, इसलिए शाम के समय सूरज ढलने के बाद फूलों को हथेली पर झाड़कर उनकी संख्या का पता किया जा सकता है। थ्रिप्स को नियंत्रित करने के लिए रसायन के छिड़काव के अलावा सफाई और प्राकृतिक नियंत्रण के भी तरीके हैं।
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