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Rampur Bushahar News: कम हिमपात का असर, श्रीखंड महादेव की चोटी पर मार्च में सिर्फ चार फीट बर्फ

Tue, 10 Mar 2026 11:39 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Tue, 10 Mar 2026 11:39 PM IST
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The impact of less snowfall, only four feet of snow fell on the peak of Shrikhand Mahadev in March
पर्वतारोही प्रशिक्षु बालकृष्ण ने फतह की श्रीखंड महादेव कैलाश की चोटी। स्रोत : जागरूक पाठक
. पर्वतारोही बालकृष्ण ने मार्च में श्रीखंड महादेव कैलाश की चोटी फतह करके बनाया नया रिकॉर्ड
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. आमतौर पर मार्च में चोटी पर होती थी 8 फीट मोटी बर्फ

संवाद न्यूज एजेंसी
निरमंड (कुल्लू)। इस बार कम हिमपात होने का असर श्रीखंड महादेव की चोटी पर भी दिख रहा है। मार्च में इस चोटी पर सिर्फ चार फीट मोटी बर्फ बची है। कुछ साल पहले इस चोटी पर मार्च महीने में 8 से 10 फीट मोटी बर्फ की चादर बिछी होती थी। बीते दो से तीन साल से इस चोटी पर बर्फबारी कम होती जा रही है। निरमंड उपमंडल के पहले पर्वतारोही प्रशिक्षु बालकृष्ण ठाकुर ने 8 मार्च को श्रीखंड महादेव कैलाश की चोटी को फतह किया। यह एक नया रिकॉर्ड भी है, क्योंकि मार्च में इस चोटी पर चढ़ पाना मुश्किल होता है। समुद्रतल से करीब 5,187 मीटर ऊंची श्रीखंड महादेव कैलाश पर्वत पर अक्सर मई जून में शिव भक्त भोले बाबा के दर्शन के लिए जाते हैं। आधिकारिक तौर से उत्तर भारत की सबसे मशहूर धार्मिक यात्राओं में शुमार श्रीखंड महादेव कैलाश की यात्रा जुलाई में शुरू होती है। इस बार कम बर्फबारी होने से यात्रा जुलाई माह से पहले होने की संभावना जताई जा रही है। पर्वतारोही प्रशिक्षु बालकृष्ण ठाकुर ने बताया कि इस बार बर्फ कम होने के कारण वह रैकी करने के लिए 8 मार्च को बराटीनाला से रात करीब 2 बजे महादेव के दिव्य धाम के लिए रवाना हुए। सुबह करीब 5 बजे कालीघाटी पहुंच गए। इसके बाद भीम डवारी में सुबह 9 बजे पहुंचे। जलपान करने के बाद सुबह 10 बजे पार्वतीबाग पहुंचे। पूर्वाह्न करीब 11 बजे 75 फीट ऊंचे श्री खंड महादेव शिवलिंग के दर्शन किए। पूजा-अर्चना के बाद थोड़ी देर विश्राम करके घर के लिए रवाना हुए। उन्होंने पूरी यात्रा में 9 घंटे 1 मिनट का समय लगाया। उन्होंने बताया कि पिछले साल की अपेक्षा इस बार बर्फ बेहद ही कम है। श्रीखंड में करीब चार फीट बर्फ बची हुई है। यदि प्रशासन यात्रा एक माह पहले शुरू करेगा, तो भीम डवारी में स्नो ब्रिज के बगैर यात्रा करना बेहद ही कठिन हो सकता है। उन्होंने लोगों से अपील की है कि वे इस समय यात्रा के लिए बिल्कुल भी मन न बनाएं। उनका मकसद सिर्फ रैकी करना था, जो बिना प्रशिक्षण के पूरी नहीं की जा सकती। बता दें कि इससे पहले बालकृष्ण ठाकुर ने किन्नौर के 6,791 मीटर ऊंचे लेरो पर्वत की चढ़ाई कर चुके हैं।
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