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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Rampur Bushahar News ›   The Green Pigeon has been spotted for the first time in the state's high-altitude Himalayan region

Rampur Bushahar News: प्रदेश के उच्च हिमालयी क्षेत्र में पहली बार दिखा हरियल पक्षी

Fri, 24 Jul 2026 11:32 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Fri, 24 Jul 2026 11:32 PM IST
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रक्छम–चितकुल में 3,400 मीटर की ऊंचाई पर देखा गया 2,400 मीटर तक की ऊंचाई पर पाया जाने वाला पक्षी
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संवाद न्यूज एजेंसी
सांगला (किन्नौर)। हिमाचल प्रदेश के उच्च हिमालयी क्षेत्र में हरियल (येलो-फुटेड ग्रीन पिजन) पक्षी पहली बार दर्ज किया गया है। किन्नौर जिले के रक्छम–चितकुल वन्यजीव अभयारण्य में इसे लगभग 3,400 मीटर की ऊंचाई पर देखा गया।
यह हिमाचल प्रदेश में इस प्रजाति का अभी तक का सर्वाधिक ऊंचाई पर दर्ज रिकॉर्ड है। यह किन्नौर जिले का भी पहला प्रमाणित रिकॉर्ड है। वन खंड अधिकारी संतोष कुमार ठाकुर और वन मित्र अल्पना नेगी ने यह महत्वपूर्ण अवलोकन किया। हरियल आमतौर पर मैदानी और उप पहाड़ी वनों, बाग-बगीचों में 2,400 मीटर तक की ऊंचाई पर पाया जाता है। यह प्रजाति सामान्यतः हिमालय के अत्यधिक ठंडे और ऊंचाई वाले क्षेत्रों से दूर रहती है।
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ऐसे में शीत मरुस्थलीय क्षेत्र से सटी बस्पा घाटी में 3,400 मीटर की ऊंचाई पर इसका मिलना अत्यंत असाधारण है। यह पारिस्थितिक दृष्टि से एक महत्वपूर्ण घटना मानी जा रही है। इस रिकॉर्ड को राज्य के पक्षी विशेषज्ञों के साथ साझा किया गया है।
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प्रकृतिविद् हिमांशु चौधरी ने इस रिकॉर्ड पर टिप्पणी करते हुए बताया कि यह संभवतः हिमाचल प्रदेश में इस प्रजाति का अब तक का सर्वाधिक ऊंचाई वाला रिकॉर्ड है। उन्होंने वर्ष 2020 में लद्दाख के माथो गांव में लगभग 3,500 मीटर पर दर्ज एक दुर्लभ रिकॉर्ड का भी उल्लेख किया। इससे स्पष्ट होता है कि सामान्यतः मैदानी और तराई क्षेत्रों में रहने वाली यह प्रजाति बहुत कम अवसरों पर इतनी अधिक ऊंचाई तक पहुंचती है। ई-बर्ड के उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार, हिमाचल प्रदेश में यह पक्षी मुख्यतः कांगड़ा, सोलन और शिमला जिले के निचले क्षेत्रों में दर्ज किया गया है। अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों से इसके रिकॉर्ड अत्यंत दुर्लभ हैं। पक्षी वैज्ञानिकों और वन अधिकारियों का मानना है कि इस प्रकार के असामान्य रिकॉर्ड पर्वतीय क्षेत्रों में पक्षियों के वितरण में व्यापक पारिस्थितिक परिवर्तनों की ओर संकेत कर सकते हैं।
बढ़ते तापमान के कारण ऊंचाई वाले क्षेत्रों में आवासीय परिस्थितियां बदल रही हैं। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि किसी ठोस निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए दीर्घकालीन निगरानी और वैज्ञानिक अध्ययन आवश्यक होंगे। यह रिकॉर्ड पश्चिमी हिमालय में पक्षियों के बदलते वितरण को समझने में एक महत्वपूर्ण कड़ी साबित होगा।

उप अरण्यपाल अशोक नेगी ने बताया कि किन्नौर की जैव विविधता अत्यंत समृद्ध है। हमारे क्षेत्रीय वन अधिकारियों और कर्मचारियों की सतत् निगरानी एवं समर्पित कार्य के कारण इस क्षेत्र में पक्षियों की नई-नई प्रजातियों का लगातार दस्तावेजीकरण हो रहा है। उपायुक्त अमित कुमार शर्मा ने कहा कि मुझे विश्वास है कि वन्यजीव प्रभाग की टीम भविष्य में भी किन्नौर की पक्षी विविधता से जुड़े ऐसे अनेक महत्वपूर्ण रिकॉर्ड सामने लाएगी।
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