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Rampur Bushahar News: गाहन गांव में वन विभाग ने किया कंट्रोल बर्निंग का उपयोग

Tue, 10 Mar 2026 11:14 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Tue, 10 Mar 2026 11:14 PM IST
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The Forest Department used controlled burning in Gahan village
कुमारसैन के गाहन गांव में वन विभाग ने की कंट्रोल बर्निंग। स्रोत : विभाग
. बढ़ती गर्मी और आग के खतरे को देखते हुए वन विभाग ने किए पुख्ता इंतजाम
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. आग लगने पर तुरंत विभाग को सूचित करने का किया आह्वान

संवाद न्यूज एजेंसी

कुमारसैन (रामपुर बुशहर)। वनमंडल कोटगढ़ के तहत आहार बीट के गाहन गांव में मंगलवार को वन विभाग की टीम ने जंगलों में बढ़ते आग के खतरे को देखते हुए कंट्रोल बर्निंग (नियंत्रित आग) का सफलतापूर्वक उपयोग किया। इस दौरान विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों ने स्थानीय ग्रामीणों के सहयोग से जंगल की सूखी घास और झाड़ियों को नियंत्रित तरीके से जलाकर बड़ी आग की घटनाओं को रोकने का प्रयास किया। वन विभाग की ओर से की गई इस पहल का उद्देश्य क्षेत्र के बगीचों और आसपास के जंगलों को गर्मियों के मौसम में लगने वाली आग से सुरक्षित रखना है। गाहन गांव के आसपास बड़ी संख्या में सेब के बगीचे हैं और यदि जंगल में अनियंत्रित आग लग जाती है, तो इससे बगीचों और वन संपदा को बड़ा नुकसान होने की आशंका रहती है। इसी को ध्यान में रखते हुए विभाग ने समय रहते कंट्रोल बर्निंग की प्रक्रिया को अपनाया। वन विभाग के कर्मचारियों ने पहले पूरे क्षेत्र का निरीक्षण किया और जहां सूखी घास, पत्तियां और झाड़ियां अधिक मात्रा में जमा थीं, उन स्थानों को चिह्नित किया। इसके बाद पूरी सावधानी और सुरक्षा के साथ सीमित क्षेत्र में नियंत्रित आग लगाकर ज्वलनशील सामग्री को नष्ट किया गया। इस प्रक्रिया के दौरान यह सुनिश्चित किया गया कि आग जंगल के अन्य हिस्सों या आसपास के बगीचों की ओर न फैले। इस मौके पर वन विभाग की ओर से बीओ, वन रक्षक और वन मित्र भी मौजूद रहे। उन्होंने ग्रामीणों को भी जंगलों में आग लगने के कारणों और उससे होने वाले नुकसान के बारे में जानकारी दी। साथ ही लोगों से अपील की कि वे जंगलों में आग से संबंधित किसी भी घटना की सूचना तुरंत वन विभाग को दें, ताकि समय रहते उसे नियंत्रित किया जा सके।


वन विभाग के वन परिक्षेत्र अधिकारी कुमारसैन अरुण शर्मा ने बताया कि गर्मियों के मौसम में सूखी घास और पत्तियों के कारण जंगलों में आग लगने की घटनाएं बढ़ जाती हैं। कई बार छोटी सी चिंगारी भी बड़ी आग का रूप ले लेती है, जिससे वन संपदा, वन्यजीवों और बागवानों के बगीचों को भारी नुकसान होता है। ऐसे में कंट्रोल बर्निंग जैसी वैज्ञानिक पद्धति से पहले ही ज्वलनशील सामग्री को कम कर दिया जाता है, जिससे बड़े स्तर पर आग फैलने की संभावना कम हो जाती है। क्षेत्र के लोगों से अपील है कि वे जंगलों में जलती हुई बीड़ी-सिगरेट न फेंकें और आग लगने की किसी भी घटना की सूचना तुरंत विभाग को दें।
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