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Rampur Bushahar News: घोषणाओं में ही सिमट गया आनी को नगर पंचायत बनाने का सपना
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पंचायती राज चुनावों से पूर्व नगर पंचायत बनाने का सपना भी रह गया अधूरा
फिर से पंचायतों में शामिल होने से पंचायत मुख्यालयों के लिए लग रही 50 किलोमीटर की दौड़
हरिकृष्ण शर्मा
आनी (कुल्लू)।
आनी कस्बे को नगर पंचायत का दर्जा देने का सपना एक बार फिर अधूरा रह गया है। महज दो साल तक अस्तित्व में रहने के बाद नगर पंचायत आनी को वैधानिक प्रक्रिया पूरी न होने के चलते हाईकोर्ट ने निरस्त कर दिया था। इसके बाद सरकार को सभी कानूनी औपचारिकताएं पूरी कर दोबारा नगर पंचायत गठित करने के निर्देश दिए थे, लेकिन नई जनगणना न होने के कारण यह मामला अभी तक ठंडे बस्ते में पड़ा हुआ है। नगर पंचायत बनने से पहले आनी कस्बे को पांच पंचायतों आनी, बखनाओं, कराणा, कुंगश और नमहोंग से अलग कर पांच वार्डों में विभाजित किया गया था। नगर पंचायत के गठन के बाद कस्बे में सफाई व्यवस्था, विकास कार्यों की योजना और जनता की समस्याओं का समाधान एक ही स्थान पर सुव्यवस्थित तरीके से हो रहा था, लेकिन इसके निरस्त होने के बाद अब ये सभी वार्ड फिर से अपनी-अपनी मूल पंचायतों में मर्ज कर दिए गए हैं। राजनीतिक स्तर पर भी इस मुद्दे पर कई बार घोषणाएं की गईं। करीब एक वर्ष पूर्व मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने आनी मेले के दौरान नगर पंचायत को पुन: गठित करने की बात कही थी। वहीं, मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने भी निरमंड के बागा सराहन दौरे के दौरान इस दिशा में पहल का आश्वासन दिया था। इसके बावजूद जमीनी स्तर पर अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। नगर पंचायत समाप्त होने के बाद अब आनी कस्बे के निवासियों को फिर से पंचायत व्यवस्था के तहत अपनी समस्याओं के समाधान के लिए अलग-अलग पंचायत मुख्यालयों का रुख करना पड़ेगा। इनमें से अधिकांश पंचायतें मुख्यालय कस्बे से करीब 30 किलोमीटर दूर स्थित हैं, जिससे लोगों को भारी असुविधाओं का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि नगर पंचायत बनने से विकास कार्यों में तेजी आई थी और प्रशासनिक कार्य भी सरल हो गए थे। अब इसके निरस्त होने से एक बार फिर पुरानी समस्याएं सामने आने लगी हैं। कस्बे के लोग सरकार से मांग कर रहे हैं कि आवश्यक वैधानिक प्रक्रिया पूरी कर जल्द से जल्द आनी को दोबारा नगर पंचायत का दर्जा दिया जाए ताकि विकास की गति फिर से पटरी पर लौट सके।
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फिर से पंचायतों में शामिल होने से पंचायत मुख्यालयों के लिए लग रही 50 किलोमीटर की दौड़
हरिकृष्ण शर्मा
आनी (कुल्लू)।
आनी कस्बे को नगर पंचायत का दर्जा देने का सपना एक बार फिर अधूरा रह गया है। महज दो साल तक अस्तित्व में रहने के बाद नगर पंचायत आनी को वैधानिक प्रक्रिया पूरी न होने के चलते हाईकोर्ट ने निरस्त कर दिया था। इसके बाद सरकार को सभी कानूनी औपचारिकताएं पूरी कर दोबारा नगर पंचायत गठित करने के निर्देश दिए थे, लेकिन नई जनगणना न होने के कारण यह मामला अभी तक ठंडे बस्ते में पड़ा हुआ है। नगर पंचायत बनने से पहले आनी कस्बे को पांच पंचायतों आनी, बखनाओं, कराणा, कुंगश और नमहोंग से अलग कर पांच वार्डों में विभाजित किया गया था। नगर पंचायत के गठन के बाद कस्बे में सफाई व्यवस्था, विकास कार्यों की योजना और जनता की समस्याओं का समाधान एक ही स्थान पर सुव्यवस्थित तरीके से हो रहा था, लेकिन इसके निरस्त होने के बाद अब ये सभी वार्ड फिर से अपनी-अपनी मूल पंचायतों में मर्ज कर दिए गए हैं। राजनीतिक स्तर पर भी इस मुद्दे पर कई बार घोषणाएं की गईं। करीब एक वर्ष पूर्व मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने आनी मेले के दौरान नगर पंचायत को पुन: गठित करने की बात कही थी। वहीं, मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने भी निरमंड के बागा सराहन दौरे के दौरान इस दिशा में पहल का आश्वासन दिया था। इसके बावजूद जमीनी स्तर पर अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। नगर पंचायत समाप्त होने के बाद अब आनी कस्बे के निवासियों को फिर से पंचायत व्यवस्था के तहत अपनी समस्याओं के समाधान के लिए अलग-अलग पंचायत मुख्यालयों का रुख करना पड़ेगा। इनमें से अधिकांश पंचायतें मुख्यालय कस्बे से करीब 30 किलोमीटर दूर स्थित हैं, जिससे लोगों को भारी असुविधाओं का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि नगर पंचायत बनने से विकास कार्यों में तेजी आई थी और प्रशासनिक कार्य भी सरल हो गए थे। अब इसके निरस्त होने से एक बार फिर पुरानी समस्याएं सामने आने लगी हैं। कस्बे के लोग सरकार से मांग कर रहे हैं कि आवश्यक वैधानिक प्रक्रिया पूरी कर जल्द से जल्द आनी को दोबारा नगर पंचायत का दर्जा दिया जाए ताकि विकास की गति फिर से पटरी पर लौट सके।