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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Rampur Bushahar News ›   The court accepted the cancellation report of the case registered five and a half years ago

Rampur Bushahar News: साढ़े पांच साल पहले दर्ज मामले की कैंसलेशन रिपोर्ट को अदालत ने किया स्वीकार

Thu, 29 Jan 2026 11:35 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Thu, 29 Jan 2026 11:35 PM IST
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व्यक्ति पर संक्रमण को फैलाने, दूसरे की संपत्ति में घुसने का लगा था आरोप
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. पुलिस ने जांच में शिकायतकर्ता के आरोपों को झूठा पाया
संवाद न्यूज एजेंसी
रामपुर बुशहर। झाकड़ी थाना की पुलिस ने भारतीय दंड संहिता की धारा-270, 278, 447 और 427 के तहत करीब साढ़े पांच साल पहले दर्ज एक मामले की कैंसलेशन रिपोर्ट अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट रामपुर में दर्ज की थी। इस रिपोर्ट को अदालत ने स्वीकार कर लिया है। इस मामले में आरोपी व्यक्ति पर रोग के संक्रमण को फैलाने और दूसरे की संपत्ति में गैर कानूनी तरीके से घुसने का आरोप था। पुलिस ने अपनी जांच में शिकायतकर्ता के आरोपों को झूठा पाया है।झाकड़ी थाना में यह एफआईआर 6 अक्तूबर 2020 को दर्ज हुई थी। मलोगी गांव के एक व्यक्ति ने आरोपी पर रोग के संक्रमण को फैलाने और दूसरे की संपत्ति में गैर कानूनी तरीके से घुसने का आरोप लगाया था। जांच करने के बाद जांच अधिकारी ने कैंसलेशन रिपोर्ट अदालत में दाखिल की। रिपोर्ट में बताया कि आरोपी व्यक्ति के खिलाफ आईपीसी की धारा-270, 278, 447 और 427 के तहत कोई अपराध नहीं बनता है। साथ ही शिकायतकर्ता के खिलाफ की धारा-182 यानी लोक सेवक को झूठी सूचना देना के तहत कार्रवाई करने की सिफारिश की। शिकायतकर्ता ने कैंसलेशन रिपोर्ट के खिलाफ आपत्तियां दायर कीं। उसने आरोप लगाया कि जांच एजेंसी ने आरोपी के साथ मिलीभगत करके रिपोर्ट तैयार की है। अदालत ने फैसला दिया है कि केस फाइल देखने से पता चलता है कि जांच अधिकारी ने गवाहों के बयान दर्ज किए हैं और शिकायतकर्ता के आरोपों को झूठा पाया है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि जांच अधिकारी ने मनमाने और अनुचित तरीके से काम किया है, लेकिन उसने इस तथ्य को साबित करने के लिए कोई सबूत पेश नहीं किया है। शिकायतकर्ता जांच अधिकारी का आरोपी पक्ष से कोई संबंध साबित करने में भी विफल रहा है। रिकॉर्ड में ऐसा कुछ भी नहीं है, जिससे यह पता चले कि जांच अधिकारी ने आरोपी पक्ष को कोई अनुचित लाभ देने के लिए जांच निष्पक्ष तरीके से नहीं की है, इसलिए यह अदालत जांच एजेंसी के इस निष्कर्ष से संतुष्ट है कि इस शिकायत में कोई अपराध नहीं बनता है। शिकायतकर्ता की आपतियां खारिज की जाती हैं और कैंसलेशन रिपोर्ट स्वीकार की जाती है।
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